लेखक परिचय

प्रवक्‍ता ब्यूरो

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हमारा संपूर्ण जीवन इस धरती पर ईश्वर का दिया हुआ तपस्वीक वरदान है। अगर हमनें इस पवित्र धरती पर पैर रखा है, तो हमे संपूर्ण जीवन जीने का पूरा-पूरा हक है।

अब इस जीवन काल -चक्र मे हमें बिना उलझे हुए यह सुनिश्चित करना होगा की अपनी जिंदगी किस तरह निर्वाहन करना है। इस धर्म संकट से निपटने के लिए सर्वप्रथम अपने दिल -दिमाग एवं आतंरिक विवेक से एक कठिन एवं सफल निर्णय लेना है, ऐसा निर्णय जो अपनी अंतरात्मा, स्वाभिमान, गुणवत्ता, सहिष्णुता, नैतिकता एवं अमूल्य गुणों को अपने अंदर निहित करता है । हमें अपनी जीवन-सीमा सुनिश्चित करना है की इस काल-चक्र संसार में अपनी जन्म से मृत्यु तक का दायित्व को सही एवं कर्मठ तरीकों से निर्वहन किया जाए।

हमें इस सांसारिक सुखों के लिए ईश्वर ने इस दुनिया में नही भेज है, इसी पराकाष्ठा पे अपनी व्यक्तित्व विशेष का सही एवं उपयुक्ता को अपनाते हुए, नैतिक, समाजिक, पारिवारिक एवं उपयोगित पहलूओ को ध्यान मे रखते हुए जीवन को वैकल्पिक विन्दुओ में केंद्रित करना चाहिए ।

हमें अब असल विन्दुओ पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ..

 

नैतिक दायित्व का सही मूल्यांकन हम अकेले कर सकते है या नहीं,म यह आपके अंतरात्मा की परिभाषित शब्द है ।

हमें हमेशा ऐसा नही सोचना चाहिए की हम अकेले इस मूल्यों को सत्यापित कर पाते है या साथ लेकर जनता विशेष से .. उदहारण सरल है …

 

एक -एक बूंद से घड़ा भरता है, यह कहावत पूर्णतः सत्य है। सत्यापित तथ्यों को अपने मूल्यों में एकत्रित करते हमें हर मोड़ पर अपनी जिमेवारी निभाना चाहिए। हम मे से ऐसा कितने है, जो हमेशा अपने नैतिकता पे खरे उतरे हैं। इसका जवाब आपको ख़ुद अपनी अन्तरात्मा की ध्वनि से प्राप्त हो जाएगी । हम नही कहते की हम पूर्णतया अपनी नैतिकता को निर्वहन करते हैं, पर जब आप सफल निर्वहन करना अपना लेंगें तो यह सत्यापित खुद आप की अन्तरात्मा को सांकेतिक परिभाषा देगी।

कुछ ऐसे महापुरुष हुए जो नैतिक मूल्यों को जीवन भर महत्व दिया, किन्तु आज अन्तरात्मा की आवाज न सुनकर केवल भौतिक सुविधाओं की ओर ध्यान दिया जा रहा है। आज नैतिक मूल्यों के अभाव में परिवार बिखर रहे हैं, भाई -बंधू एक दूसरे के लिए लड़ाई – झगड़े कर रहे हैं, नैतिक मूल्यों के अभाव में व्यक्तियों के चरित्र में गिरावट आ रही हैं ।

कन्फ्यूशियस के अनुसार – “यदि आपका चरित्र अच्छा है तो आपके परिवार में शांति रहेगी, यदि आपके परिवार में शांति रहेगी तो समाज में शांति रहेगी, यदि समाज में शांति रहेगी तो राष्ट्र में शांति रहेगी” ।

मनुष्य की अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही शिक्षा है।- (स्वामी विवेकानन्द)

 

आध्यात्मिकता  का अर्थ है अपनी अन्तरात्मा की आवाज के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना हैं। नैतिकता का सम्बंध मानव जीवन की अभिव्यक्ति से हैं। मानव जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता, महत्त्व अनिवार्यता व अपरिहार्यता जरुरी हैं, ताकि वह अपने परिवार के साथ -साथ सामाजिक दायित्व को निभा सके।नैतिकता सामाजिक जीवन को सुगम एवं विस्तृत बनाती हैं ।वैदिक मन्त्रों में नैतिकता को विशेष महत्व दिया जाता हैं ।

हेनरी थोरू के शब्दों में- Men have become the tools of their tools.

आचार संहिता ही नैतिकता की परिभाषा हैं, शिक्षा व्यक्ति की अंतर्निहित क्षमता एवं  व्यक्तित्त्व को  विकसित करने वाली विधि हैं, जनता का आशिर्वाद, प्रेम, स्नेह आपको प्रफ़ुलित करेगा, यही आपकी सही मूल्यांकन होगा ।

उद्दाहरण स्वरुप बताना चाहूंगा …

 

हर रोज जन्दगी कुछ पुरानी, नयी उम्मीदें एवं नया रूप दिखाती हैं,  कुछ चीजों को हम ध्यानित करते हैं, एवं कुछ चीजों को भूल जाते हैं। कुछ अच्छाईयां, बुराईया हमें एक नया रास्ता बताती हैं। अब हम इस मोड़ पर क्या नया कदम चुनेगे, यह आपका दिल और दिमाग ही बता पायेगा । हमें हमेशा लगनपूर्वक सामाजिक, सांसारिक जिमेवारी निभाते हुए कुछ अलग करने की साहस रखना होगा । यह तभी सम्भव हैं, जब हर इंसान अपनी नैतिक मूल्यों का सही मूल्यांकन अपने सहासिक कदमो से इस धरती पर गौरवान्वित करें।

हम एक श्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी सम्पन का पाएंगे । एक पहलू हमेशा हमें आध्यात्मिक  चीजों से जोड़ता हैं, जो हमें चेतना एवं स्फ्रूति प्रदान करता हैं।

हमारी स्वक्छ्ता एवं निर्मलता जो एक श्रेष्ठ राष्ट्र में महत्पूर्ण हैं । जो निम्नांकित कविता में अन्तर्निहित हैं ।

 

“नैतिक बल का सही उपयोग …

श्रेठ राष्ट्र में उचित प्रयोग …

जन-जन  में भर दे जोश ..

हमारा राष्ट्र एक शांति-प्रेम राष्ट्र ..

भारत …हिंदुस्तान …..

जय भारत .जय राष्ट्र …भारत “…

 

अखिलेश कुमार भारती

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