लेखक परिचय

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

जगदीश्‍वर चतुर्वेदी

वामपंथी चिंतक। कलकत्‍ता वि‍श्‍ववि‍द्यालय के हि‍न्‍दी वि‍भाग में प्रोफेसर। मीडि‍या और साहि‍त्‍यालोचना का वि‍शेष अध्‍ययन।

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आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों ने मुसलमानों के खिलाफ जिस तरह प्रचार आरंभ किया है उसे देखते हुए सामयिक तौर पर मुसलमानों की इमेज की रक्षा के लिए सभी भारतवासियों को सामने आना चाहिए। मुसलमानों को देशद्रोही और आतंकी करार देने में इन दिनों मीडिया का एक वर्ग भी सक्रिय हो उठा है,ऐसे में मुसलमानों की भूमिका को जोरदार ढ़ंग से सामने लाने की जरुरत है। सबसे पहली बात यह कि भारत के अधिकांश मुसलमान लोकतांत्रिक हैं और देशभक्त हैं। वे किसी भी किस्म की साम्प्रदायिक राजनीति का अंग नहीं रहे हैं। चाहे वह मुस्लिम साम्प्रदायिकता ही क्यों न हो। भारत के मुसलमानों ने आजादी के पहले और बाद में मिलकर देश के निर्माण में बड़ी भूमिका निभायी है और उनके योगदान की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

भारतीय मुसलमानों के बारे में जिस तरह का स्टीरियोटाइप प्रचार अभियान मीडिया ने आरंभ किया है कि मुसलमान कट्टरपंथी होते हैं,अनुदार होते हैं,नवाजी होते हैं,गऊ का मांस खाते हैं,हिन्दुओं से नफरत करते हैं,चार शादी करते हैं,आतंकी या माफिया गतिविधियां करते हैं।इस तरह के स्टीरियोटाइप प्रचार जरिए मुसलमान को भारत मुख्यधारा से भिन्न दर्शाने की कोशिशें की जाती हैं। जबकि सच यह है मुसलमानों या हिन्दुओं को स्टीरियोटाइप के आधार पर समझ ही नहीं सकते। हिन्दू का मतलब संघी नहीं होता। संघ की हिन्दुत्व की अवधारणा अधिकांश हिन्दू नहीं मानते।भारत के अधिकांश हिन्दू- मुसलमान कुल मिलाकर भारत के संविधान के द्वारा परिभाषित संस्कृति और सभ्यता के दायरे में रहते हैं और उसके आधार पर दैनंदिन आचरण करते हैं।अधिकांश मुसलमानों की सबसे बड़ी किताब भारत का संविधान है और उस संविधान में जो हक उनके लिए तय किए गए हैं उनका वे उपयोग करते हैं। हमारा संविधान किसी भी समुदाय को कट्टरपंथी होने की अनुमति नहीं देता। भारत का संविधान मानने के कारण सभी भारतवासियों को उदारतावादी मूल्यों, संस्कारों और आदतों का विकास करना पड़ता है।

समाज में हिन्दू का संसार गीता या मनुस्मृति से संचालित नहीं होता बल्कि भारत के संविधान से संचालित होता है। उसी तरह मुसलमानों के जीवन के निर्धारक तत्व के रूप में भारत के संविधान की निर्णायक भूमिका। भारत में किसी भी विचारधारा की सरकार आए या जाए उससे भारत की प्रकृति तय नहीं होती, भारत की प्रकृति तो संविधान तय करता है। यह धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक देश है और इसके सभी बाशिंदे धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक हैं। संविधान में धार्मिक पहचान गौण है, नागरिक की पहचान प्रमुख है। इस नजरिए से मुसलमान नागरिक पहले हैं, धार्मिक बाद में। आरएसएस देश का ऐसा एकमात्र बड़ा संगठन है जिसकी स्वाधीनता संग्राम में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं रही , यह अकेला ऐसा संगठन है जिसके किसी बड़े नेता को साम्प्रदायिक-आतंकी-पृथकतावादी हमले का शिकार नहीं होना पड़ा। उलटे इसकी विचारधारा के भारत की धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक संस्कृति और सभ्यता विमर्श पर गहरे नकारात्मक असर देखे गए हैं। इसके विपरीत भारत के मुसलमानों ने अनेक विपरीत परिस्थितियों में रहकर भी भारत के स्वाधीनता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अनेक मुसलिम नेताओं ने कम्युनिस्ट आंदोलन और क्रांतिकारी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। ब्रिटिश शासन के खिलाफ मुसलमानों की देशभक्तिपूर्ण भूमिका को हमें हमेशा याद रखना चाहिए। मसलन्, रौलट एक्ट विरोधी आंदोलन और जलियांवालाबाग कांड में 70 से अधिक देशभक्त मुसलमान शहीद हुए। इनकी शहादत को हम कैसे भूल सकते हैं। आरएसएस के प्रचार अभियान में मुसलमानों को जब भी निशाना बनाया जाता है तो उनकी देशभक्ति और कुर्बानी की बातें नहीं बतायी जाती हैं। हमारे अनेक सुधीजन फेसबुक पर उनके प्रचार के रोज शिकार हो रहे हैं। ऐसे लोगों को हम यही कहना चाहेंगे कि मुसलमानों के खिलाफ फेसबुक पर लिखने से पहले थोड़ा लाइब्रेरी जाकर इतिहास का ज्ञान भी प्राप्त कर लें तो शायद मुसलमानों के प्रति फैलायी जा रही नफरत से इस देश को बचा सकेंगे।

आरएसएस के लोगों से सवाल किया जाना चाहिए कि उनको देश के लिए कुर्बानी देने से किसने रोका था ? स्वाधीनता संग्राम में उनके कितने सदस्य शहीद हुए ? इसकी तुलना में यह भी देखें कितने मुसलमान नेता-कार्यकर्ता शहीद हुए ? देश प्रेम का मतलब हिन्दू-हिन्दू करना नहीं है । हिन्दू इस देश में रहते हैं तो उनकी रक्षा और विकास के लिए अंग्रेजों से मुक्ति और उसके लिए कुर्बानी की भावना आरएसएस के लोगों में क्यों नहीं थी ? जबकि अन्य उदार-क्रांतिकारी लोग जो हिन्दू परिवारों से आते थे, बढ़-चढ़कर कुर्बानियां दे रहे थे, शहीद हो रहे थे। संघ उस दौर में क्या कर रहा था ? यही कहना चाहते हैं संघ कम से कम कुर्बानी नहीं दे रहा था। दूसरी ओर सन् 1930-32 के नागरिक अवज्ञा आंदोलन में कम से कम 43 मुसलमान नेता-कार्यकर्ता विभिन्न इलाकों में संघर्ष के दौरान पुलिस की गोलियों से घायल हुए और बाद में शहीद हुए। सवाल यह है संघ इस दौर में कहां सोया हुआ था ?

कायदे से भारत के शहीद और क्रांतिकारी मुसलमानों की भूमिका को व्यापक रुप में उभारा गया होता तो आज नौबत ही न आती कि आरएसएस अपने मुस्लिम विरोधी मकसद में सफल हो जाता। मुसलमानों के प्रति वैमनस्य और भेदभावपूर्ण रवैय्ये को बल इसलिए भी मिला कि आजादी के बाद सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने मुसलमानों की जमकर उपेक्षा की। इस उपेक्षा को सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में साफ देख सकते हैं। संघ के प्रचार का कांग्रेस पर दबाव रहा है और कांग्रेस ने कभी मुसलमानों को लेकर दो-टूक रवैय्या नहीं अपनाया। इसका ही यह परिणाम है कि मुसलमान हाशिए पर हैं। संघ ने मुस्लिम तुष्टीकरण का झूठा हल्ला मचाकर कांग्रेस को मुसलमानों के हितों की उपेक्षा करने के लिए मजबूर किया और कांग्रेस ने संघ को जबाव देने के चक्कर में नरम हिन्दुत्व की दिशा ग्रहण की और इसका सबसे ज्यादा खामियाजा मुसलमानों को उठाना पड़ा।

29 Responses to “भारतीय मुसलमानों के पक्ष में”

  1. आनंद

    पूरी दुनिया में इस्‍लामी आतंक की आंख खोलने वाली सच्‍चाई – एक समाजशास्‍त्रीय विश्‍लेषण!

    समाजशास्‍त्री डॉ. पीटर हैमंड ने दुनिया भर में मुसलमानों की प्रवृत्ति पर गहरे शोध के बाद एक पुस्‍तक लिखी है- ‘स्‍लेवरी, टेररिज्‍म एंड इस्‍लाम- द हिस्‍टोरिकल रूट्स एंड कंटेम्‍परी थ्रेट’। मैं एक इतिहास,समाजशास्त्र और मनोविज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ इसके बाद 15 बर्षों से IT के क्षेत्र में कार्यरत रहा हूं इस IT revolution पलते और बढ़ते और इसके द्वारा होते परिवर्तन देखते आया हूँ इसलिए कह सकता हूं कि सेक्‍यूलर नामक प्रजाति अपना पूर्वग्रह छोड़कर और मुसलमान अपनी धार्मिक भावनाओं को छोड़कर दुनिया भर के आंकड़ों पर गौर करें, देखें कि आखिर ऐसा क्‍या है कि उनकी जनसंख्‍या बढ़ते ही वह मारकाट, हिंसा और दूसरे धर्म के मानने वालों के नरसंहार पर उतर आते हैं। इस पुस्‍तक के शोध का निषकर्ष है:
    * जब तक मुसलमानों की जनसंख्‍या किसी देश-प्रदेश में 2 फीसदी रहती है, वह शांतिप्रिय, कानूनपसंद अल्‍पसंख्‍यक बनकर रहते हैं, जैसे अमेरिका जहां मुसलमानों की जनसंख्‍या (0.6) फीसदी है।
    * जब मुसलमानों की जनसंख्‍या 2 से 5 फीसदी होती है तक वह अपना धर्म प्रचार शुरू कर देते हैं जैसे डेनमार्क जर्मनी आदि
    * जब मुसलमानों की जनसंख्‍या 5 फीसदी से ऊपर जाती है वह अन्‍य धार्मिक समूहों, सरकार व बाजार पर ‘छोटी छोटी बात जैसे- हलाल’ मांस दुकानों में रखने आदि का दबाव बनाने लगते हैं। जैसे फ्रांस, फिलीपीन्‍स, स्‍वीडन, स्विटजरलैंड आदि
    * ज्‍यों ही मुसलमानों की जनंसख्‍या 5 से 8 फीसदी तक पहुंचती है वह अपने लिए अलग शरियत कानून की मांग करने लगते हैं। बात बात पर उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होने लगती हैं। दरअसल उनका अंतिम लक्ष्‍य यही है कि पूरा संसार शरियत कानून पर ही चले और इसी लक्ष्‍य के लिए पूरा मुस्लिम जगह प्रयासरत है।
    * जब मुसलमानों की जनसंख्‍या 10 फीसदी से अधिक हो जाती है तो वह धार्मिक आजादी आदि के नाम पर तोडफोड, दंगा फसाद, शुरू कर देते हैं। जैसे डेनमार्क, इजराइल, गुयाना आदि
    * ज्‍यों ही मुसलामनों की जनसंख्‍या 20 फीसदी के पार पहुंचती है, जेहाद शुरू हो जाता है। दूसरे धर्मों के मानने वालों की हत्‍याएं शुरू हो जाती है। समान नागरिक कानून का विरोध किया जाता है, अपने लिए अलग सुविधाओं की मांग की जाने लगती है। इस्‍लामी आतंकवाद व अलगाववाद आदि की घटनाएं तेजी से होने लगती है। जैसे भारत, इथोपिया आदि
    * ज्‍यों ही मुसलमान किसी देश, प्रदेश या क्षेत्र में 40 फीसदी के पास पहुंचते हैं दूसरे धर्म के मानने वालों का नरसंहार शुरू कर देते है। सामूहिक हत्‍याएं होने लगती हैं जैसे लेबानान, बोस्निया आदि
    * जब मुसलमान कहीं भी 60 फीसदी से अधिक होते हैं ‘जातीय सफाया’ शुरू हो जाता है। दूसरे धर्मावलंबियों का पूरी तरह से सफाया या उसका इस्‍लाम में धर्मांतरण ही ‘आखिल इस्‍लामी’ लक्ष्‍य है। जाजिया कर लगाना, दूसरे धर्मों के पूजा स्‍थल का पूरी तरह से नाश करना आदि होने लगता है। जैसे भारत के कश्‍मीर से कश्‍मीरी पंडितों का सफाया।
    * मुसलमानों के 80 फीसदी पर पहुंचते ही कोई देश सेक्‍युलर नहीं रह सकता। उसे इस्‍लामी बना दिया जाता है। 56 इस्‍लामी देशों में से एक भी मुल्‍क ऐसा नहीं है जिसका राजधर्म इस्‍लाम न हो। ऐसे राज्‍य में सत्‍ता और शासन प्रयोजित जातीय व धार्मिक सफाई अभियान शुरू हो जाता है। पैसे पाकिस्‍तान व बंग्‍लादेश से हिंदुओं का पूरी तरह से सफाया हो गया। मिस्र, गाजापटटी, ईरान, जोर्डन, मोरक्‍को, संयुक्‍त अरब अमिरात में आज खोजे से भी अन्‍य धर्मावलंबी नहीं मिलते।
    भारत के सेक्‍युलर प्रजाति यह झूठ फैलाती आयी है कि भारत में इस्‍लाम तलवार नहीं सूफी आंदोलन के जोर पर फैला। वर्तमान में देखिए, सूफी आंदोलन तो कहीं नहीं दिखेगा, लेकिन तलवार का जोर आज भी हिज्‍बुल, आईएसआईएस, तालीबान, लश्‍कर के रूप में और पाकिस्‍तान, बंग्‍लादेश एवं अन्‍य मुस्लिम देशों के शासकों के रूप में हर तरफ दिखता है। इस्‍लाम वास्‍तव में कोई धर्म नहीं, एक राजनैतिक व सामाजिक विचारधारा है, जिसका आखिरी लक्ष्‍य पूरी दुनिया को शरियत कानून के अंतर्गत लाकर ‘अखिल इस्‍लामी विश्‍व की स्‍थापना करना है।

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  2. आनंद

    आज की मेरी पोस्ट सिर्फ उन
    मुसलमानों के लिए है जो ये कहते हैं
    की हर मुसलमान बुरा नहीं होता—–
    लगभग रोज ही मुझे मेरी ही पोस्ट
    पर कई मुस्लिम्स कहते हैं कि हर
    मुसलमान बुरा नहीं होता …………… …… लेकिन जब मैं अपने नजरिये से
    देखता हूँ तो मुझे हर मुसलमान
    बुरा ही लगता है …… उसकी वजह ये
    ही है कि जब भी मैं कश्मीर ..
    आसाम .. केरल .. और मुस्लिम
    बाहुल्य क्षेत्र के बारे में पढता हूँ और सुनता हूँ तो यही महसूस करता हूँ
    कि वहां तो अच्छे और बुरे
    मुसलमान दोनों ही रहते होंगे न ?
    हिन्दू और मुसलमान अच्छे
    पड़ोसी भी होंगे न ?
    एक दूसरे के संग त्यौहार भी मनाते होने न ? कभी ईद
    की सिवईयां पड़ोसी के घर
    गयी होंगी कभी होली की गुजिया भी इधर
    आयी होंगी ………………… फिर
    अचानक ऐसा क्या गुनाह कर
    दिया हिन्दुओं ने कि उनके साथ मारकाट होने लगी ………………..
    फिर अचानक क्या हुआ
    कि सभी मुसलमानों को अपने
    हिन्दू पड़ोसी बुरे लगने
    लगे ? ………… क्यूँ तिरंगा जलाने पर
    ये बुरे मुसलमान के मुंह पर तमाचे नहीं मारते ? क्यूँ हिन्दू लड़की के
    साथ बलात्कार होते वक़्त
    उनकी इज्जत नहीं बचाते ?
    और सबसे बड़ी बात जो मुझे
    खटकती है कि जिस समय बुरे
    मुसलमान हिन्दुओं को मार रहे थे उस समय अच्छे मुसलमानों ने
    रोका क्यूँ नहीं ? एक भी इमाम ..
    उलेमा ने बुरे मुसलमानों के लिए
    कोई फ़तवा जारी क्यूँ
    नहीं किया ????………………..
    किसी भी अच्छी मस्जिद से ये आवाज़ क्यूँ नहीं आयी कि एक
    भी हिन्दू मरना नहीं चाहिए
    वो तुम्हारे भाई हैं …. अगर उन्हें मारने
    का गुनाह किया तो अल्लाह तुम्हें
    दोजख की आग में
    जला देगा ? …………………… क्यूँ अच्छे मुसलमानों ने बुरे
    मुसलमानों का हुक्का पानी बंद
    नहीं किया ?………………………….
    क्यूँ पूरे हिन्दुस्तान के अच्छे
    मुसलमानों ने सड़क पर उतर के
    विरोध दर्ज नहीं किया ?………….. …………. और कश्मीरी हिन्दुओं
    की जमीन .. मकान… दुकान हड़पने
    के लिए सभी मुसलमान एक क्यूँ
    हो गये ???????????
    आज तक ……. आज तक …..
    अभी तक …… इस पल तक किसी भी मुस्लिम संगठन ने बुरे
    मुसलमानों के खिलाफ आवाज़ क्यूँ
    नहीं उठाई ?
    क्या मान लिया जाए
    कि हिन्दुस्तान में अच्छे मुसलमान
    आटे में नमक के बराबर रह गये हैं ??????????
    आज अगर हिन्दुस्तान में अच्छे
    मुसलमानों को इज्जत और मान
    सम्मान की नजर से
    नहीं देखा जा रहा तो इसकी वजह
    उनकी ख़ामोशी ही है ………….. याद रखिये बुरा करना भी गुनाह है
    और बुरा देख कर खामोश रहना उससे
    भी बड़ा गुनाह है …………… अगर आप
    सच में अच्छे मुसलमान हैं तो आवाज़
    उठाइये उन बुरे मुसलमानों के
    लिए ….. जिनकी वजह से आपका वजूद भी दांव पर लग
    गया …………….
    एक बात याद रखियेगा ……… अपने
    ही देश में चाकू छुरे की नोंक पर मान
    सम्मान
    नहीं मिलता बल्कि ……………. हिकारत .. नफरत ….. बददुआ
    ही मिलती है ……

    हमारे देश कि ये हालत केवल और
    केवल नेहरू जैसे सेकुलर भिखारियों कि वजह से हुई है, जिन्होंने
    केवल अपना परिवार बनाया मगर
    देश बनाना भूल गए।

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  3. आनंद

    जरा विचार करो:
    1*मुसलमानों का कोई एक धार्मिक ट्रस्ट का नाम बताइये जो “मानव”मात्र की सेवा करता हो ?

    २*मुसलमानों का कोई एक धर्मार्थ अस्पताल का नाम बताइये जहां सबका इलाज होता हो?

    3*मुसलमानों का कोई अनाथालय बताइये, जहां सबके बच्चे समान भाव से पाले जाते हों?

    4*मुसलमानों द्वारा संचालित कोई एक विद्यालय बताइये जहां सबको शिक्षा प्राप्त हो रही हो?

    5*मुसलमानों का कोई वृद्धाश्रम बताओ जहां सबको रहने का अधिकार हो?

    6*मुसलमानों का कोई अन्न क्षेत्र बताइये जहां सबको भरपेट भोजन मिलता हो

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  4. ABHISHEK

    हिन्दुओ का दृढ संकल्प है हम मर जायेगे ,मिट जायेगे,तबाह हो जायेगे , बर्बाद हो जायेगे पर इतिहास से कुछ नहीं सीखेगे ! आदरणीय चतुर्वेदी जी – जो इतिहास से नहीं सीखता वो नष्ट हो जाता है ! आप जिन्हें शहीद बता रहे है क्या उन्होंने आपके लिए शहादत दी ! नहीं ,क्योकि अगर वे आपके लिए शहीद होते तो आज पकिस्तान नहीं होता ! पता है विभाजन का परिणाम क्या हुआ तीस लाख लोगो की निर्मम हत्या हुयी ! विभाजन का कारण जानते है धर्म का आधार ! जिसकी विचारधारा,सभ्यता ,संस्कृति आदि हमसे अलग है हम उनके साथ नहीं हर सकते ! इसको आधार मानकर धर्म के आधार पर मुसलमनो ने अविभाज्य भारत का विभाजन कर दिया ! और एक विशेष बात जिन क्षेत्रो में मुसलमान बहुलग थे ! उन्ही क्षेत्रो में पाकिस्तान बना ! एक बात जिसे मैं पूरी प्रमाणिकता के साथ कह रहा हूँ ! लगभग सभी मुसलमान मजहब परस्त होते है ! देश परस्ती उन्हें सीखना ही नहीं आता ! क्योकि इस्लाम मजहब प्रेम सीखता है राष्ट्र प्रेम नहीं ! उदहारण आपके सामने है ! इराक का क्या हाल हो रहा है

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  5. Parag Pisokar

    जगदीश्‍वर चतुर्वेदी जी जैसे “वामपंथी विचारक” से आप उम्मीद भी क्या कर सकते हैं, इनके लेखों पर टिका करना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है।

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  6. Sachin Tyagi

    इस लेख में ज्यादातर बातें बकवास है और जिन बातोँ को गलत बताया गया है वे ज्यादातर सही हैं …… वामपंथियों के कुप्रचार अभियान में , जब आरएसएस को निशाना बनाया जाता है तो उनके देशभक्ति व देशसेवा के कामों को छुपाया जाता है ………… वर्तमान में 100 से ज्यादा संगठन , संघ परिवार से जुड़े हैं जिनके ज़रिये सवा लाख से ज्यादा सेवा कार्य ,देश भर में चल रहे हैं ………. कश्मीर की बाढ़ में संघ के कितने स्वयंसेवक सहायता कर रहे हैं और केंद्र की भाजपा सरकार ने कश्मीर को कितनी सहायता राशि ( 2100 करोड़ रु . —- उत्तराखंड को दी गई राशि से 21 गुना ज्यादा ) दी है — ये किसी से छिपा नहीं , जबकि फिलहाल कश्मीर की ज्यादातर आबादी मुस्लिम है जिसने हिन्दुओ या कश्मीरी पंडितों को मार-काटकर ख़त्म कर दिया या डरा-धमकाकर वहां से भगा दिया ……. और यही सिलसिला आज भी असम व केरल में भी जारी है …….. केरल व प.बंगाल के घटनाक्रम से पता चलता है कि वामपंथी , किस तरह अपने विरोधियों को डराते-धमकाते व रास्ते से हटाते हैं ……. अभी केरल के कुन्नूर जिले में , CPM के गुंडों ने संघ के एक कार्यकर्ता की ह्त्या कर दी …. और वहां ऐसा होता रहता है ………………………………. 1925 में ,संघ की स्थापना से लेकर देश आजाद होने तक ,संघ की प्रतिज्ञा में स्वतंत्रता-प्राप्ति का प्रण शामिल रहा है ….. 1930-3 तक, संघ नागपुर व उसके आस-पास तक ही सीमित था और फिर भी क्रांतिकारी गतिविधियों में संलग्न था . १९४० तक संघ का कार्य देशभर में फैला ……..संघ की दिक्कत क्या है कि वो अपने कामों के प्रचार पर ध्यान नही देता …… वरना कोई वामपंथी / मुस्लिम-कट्टरपंथी / सेक्युलरपंथी ; संघविरोधी या हिंदुविरोधी या देशविरोधी प्रचार न कर पाए …………. शुरू में मुसलमान, मुस्लिम लीग व जिन्ना ,अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग सीरियसली नहीं कर रहे थे . इस मांग को हवा दी वामपंथियों ने , अपनी राजनीति जमाने के लिए , जोकि देश के बंटवारे के बाद भी ,जमी नहीं ………. वामपंथियों का धंधा ही यही है — मुसलमानों को उकसाना और हिन्दुओं व राष्ट्रवादियों को दबाना…..और अपना फायदा बनाना ……. वामपंथी इस देश में ज्यादा सफल नही रहे वरना कारस्तानी तो इन सबने खूब की हैं ,और अब भी कर रहे हैं ………………. संघ द्वारा मुस्लिम तुष्टीकरण के खिलाफ आवाज़ उठाना , दुष्प्रचार या झूठा हल्ला नहीं ……. कांग्रेस ने मुसलमानों को votebank की तरह इस्तेमाल किया और मुसलमानों ने कांग्रेस को अपने तुष्टीकरण ( अनाधिकार फायदा पाने ) के लिए — दोनों ने ही एक दूसरे से अपना फायदा बनाया … और बाकी सबको बेवकूफ ………… मुस्लिम कट्टरपंथी , वामपंथी और सेक्युलरवादी — इन सबका , एक ही गठजोड़ है जो हिन्दुओं , हिंदुत्व व संघ जैसे संघठन को खत्म करने पर तुला रहता है — दुश्मनों की तरह …………………..!!!

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    • JaggaramJat

      सिधासट व सही जवाब दिया है इस छ्द्म सेकूलरवादी को,

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  7. डॉ. मधुसूदन

    डॉ. मधुसूदन

    प्रो. चतुर्वेदी जी { या अन्य विद्वान)–
    क्या आप निम्न प्रश्नों का प्रामाणिक उत्तर दे सकते हैं?
    पहले डेटा (वास्तविकता) प्रस्तुति।
    डेटा :
    जैसे स्थूलतः अनेक हिंदू नामधारी विद्वान, श्री. रमेश सिंह जी, सुश्री बीनू जी भटनागर, और प्रोफ़ेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी जी, इस हिन्दू-बहुल सेक्यूलर भारत में, बडी उदारता पूर्वक मुसलमानों के पक्ष में लिखा करते हैं। ऐसे लेखन का विरोध नहीं। अवश्य, आप, मूल्यवान दृष्टिकोण प्रस्तुत करते रहें। जिस से हमारी विचारशुद्धि होती है। निंदक नीयरे रखना ही चाहिए।

    पर मेरे मस्तिष्क में निम्न प्रश्न है, जिनका तर्क सम्मत, समाधान किसी सेक्युलर या अन्य चिंतक द्वारा आज तक मैं ने पढा नहीं।
    प्रश्न(१):
    ऐसे कितने विशिष्ट भारतीय या कश्मिरी मुसलमान हैं, जो कश्मिर से निष्कासित हिन्दुओं के पक्ष में लिखने के लिए लेखनी उठाते हैं?
    प्रश्न (२)
    यदि ऐसे भारतीय मुसलमान विशेष नहीं; तो क्यों नहीं?
    सामूहिक प्रश्न (३)आप तीनों विद्वानों से
    (क) श्रीमान चतुर्वेदी जी से,
    (ख) श्री. रमेश सिंह जी से, एवं
    (ग)सुश्री बहन, बीनू भटनागर जी से, तीनों से, मेरा खुला प्रश्न यही है।
    (घ) अन्य कोई जानकार विद्वान भी इस पर प्रकाश फेंक सकता है।
    ॥वादे वादे जायते सत्यबोधः॥
    कुछ डेटा सहित उत्तर दीजिएगा।
    धन्यवाद
    मधुसूदन

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    • इक़बाल हिंदुस्तानी

      Iqbal hindustani

      बंगलादेशी मुस्लिम आ सकते हैं तो पाकिस्तानी हिंदू क्यों नहीं!
      इक़बाल हिंदुस्तानी August 25, 2012 राजनीति 1 Comment
      इक़बाल हिंदुस्तानी

      हम अपनी नालायक़ी का क़सूरवार कब तक दूसरों को ठहरायेंगे?

      मैंने कुछ दिन पहले फेसबुक पर एक पोस्ट में पाकिस्तान के हिंदुओं के साथ भी अन्याय और पक्षपात बंद करने की अपील की थी। इस पोस्ट पर जहां कई लोगों के सकारात्मक कमैंट आये और कुछ ने लाइक किया वहीं एक साहब ने मुझे फोन पर भविष्य में ऐसी पोस्ट ना लिखने की सख़्त लहजे में हिदायत दी जो धमकी अधिक लग रही थी। जब मैंने उनसे पूछा कि आदमी तो आदमी होता है उसे हिंदू मुसलमान के ख़ानों में क्यों बांट रहे हो तो वे अपशब्दों पर उतर आये। उनका दावा था कि हम जैसे सेकुलर लोगों की वजह से ही आज मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है और मैं हिंदुओं पर जुल्म का मामला उठाकर ‘‘असली मुद्दे” से ध्यान हटा रहा हूं। मैंने इन बहादुर साहब का नम्बर जानना चाहा तो पता लगा ये डरपोक जनाब किसी पीसीओ से धमका रहे थे।

      बहरहाल मैं इनकी यह गलतफहमी दूर करने को दोबारा लिख रहा हूं कि मैं अपने उसूलों पर खरा हूं लिहाज़ा देखना चाहत हूं कि फिर से ऐसा लिखने पर यह क्या बिगाड़ सकते हैं? मेरा सवाल है कि अगर बंगलादेश से असम में बड़ी तादाद में अवैध रूप से आने वालों को शरण दी जा सकती है तो पाक से भारत आने वाले वहां के अल्पसंख्यकों को यहां पनाह क्यों नहीं दी जा सकती? मानवता के दो पैमाने कैसे बनाये जा सकते हैं? अगर आदमी से प्यार करना अपराध है तो मैं यह अपराध बार बार करता रहूंगा चाहे इसका नतीजा कितना ही ख़तरनाक और भयानक ही क्यों ना हो।
      नोट-सर मैं आपका बहुत सम्मान करता हूँ। पूरी विनम्रता के साथ यहाँ आपके उस सवाल का जवाब देने की कोशिश कर रहा हूँ जो आपने सारे मुस्लिम समाज से पूछा है।
      ये पंक्तियाँ उस लेख की हैं जो प्रवक्ता पर 25 अगस्त 2012 को प्रकाशित हुआ है। गैर मुस्लिमो के साथ पक्षपात अत्याचार और अन्याय के खिलाफ मेरे और लेख भी आपको प्रवक्ता पर ही नहीं मेरे अपने अखबार पब्लिक ऑब्जर्वर में भी मिल जायेंगे।

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      • मुकेश चन्‍द्र मिश्र

        Mukesh Mishra

        क्षमा करें मै दूसरे को दिये जवाब मे बीच मे कूद रहा हूँ:
        आपके ज़्यादातर पुराने लेख मैंने पढे हैं जिसमे आप मुझे सच्चे सेकुलर नजर आते थे इसलिए मै आपका प्रशंसक हो गया था किन्तु पिछले कई महीनो या कहे 1-2 साल के अंदर आप के विचारो मे भी सायद सांप्रदायिकता घुस गयी या फिर वो किसी मौलाना की धमकी की वजह से बदल गयी है। उम्मीद है आप पहले वाले इकबाल साहब की तरफ दुबारा लौटेंगे

        Reply
        • इक़बाल हिंदुस्तानी

          Iqbal hindustani

          अगर मौलानाओं से डरता तो उनके कट्टर पन्थ के खिलाफ कलम न चलाता और अगर मुस्लिमों का हर बात पर अंध विरोध करना ही सच्चा सेकुलर होना है तो मैं ऐसा सेकुलर न हूँ और न ही कभी बनूंगा चाहे आप इस वजह से मुझे कुछ भी कहें।
          जिस पर ज़ुल्म और अन्याय होगा उसके खिलाफ निष्पक्ष होकर लिखता रहूँगा चाहे वो कोई भी इंसान हो।

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      • JaggaramJat

        सेकूलर कहलाने वालो को हिन्दु पसन्द नही है क्योकि वे भारतवर्ष के राष्ट्रवाद में विश्वास करते है जब कि सेकूलर एन केन प्रकारेण सत्ता पर काबिज रहने में, बांग्लादेश का हो या पाकिस्तान का, मुसलमान इन सेकूलरो की नजर मे उनका एक वोट है जो उन्हे सत्ता की सिढिया चढने मे मदद करता है जातिवाद मे बटा हिन्दु उनके लिये बेहकूब है जो सेकूलरता के चक्कर मे आकर इन्हे वोट करता है।

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    • आर. सिंह

      आर. सिंह

      मैं न किसी की तरफदारी करता हूँ नकिसी के लिए बोलता हूँ.एक आम या ख़ास सनातनी या एक आम या ख़ास मुसलमान क्या कर रहा है और क्या कह रहा है,उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं.मैं जो कुछ मेरी दृष्टि में ठीक लगता है ,मैं वही कहता हूँ और अन्य मित्रों और विचारकों से मेरा अनुरोध है के केवल उसी सम्बन्ध में प्रश्न करें याउसका प्रतिकार करें. ऐसे इस विषय पर आज मोदी जी का सी.एन एन के साथ साक्षात्कार भी बहुत महत्त्व रखता है.

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  8. इंसान

    राष्ट्रवादी विचार: पाठकों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व अधीन पहली बार भारत में सम्पूर्ण राष्ट्रवादी केन्द्रीय शासन के स्थापित होते राष्ट्र-विरोधी शक्तियों के प्रति सतर्क रहें| हाल में हुए निर्वाचनों में बुरी तरह विफल राष्ट्र-विरोधी तत्व फिर से सत्ता में आने के क्रूर उद्देश्य से उनके कुशासन से लाभान्वित मीडिया व सफेदपोश लोगों द्वारा अप्रासंगिक अथवा राष्ट्र-विरोधी लेखों में संशयी विचारों को प्रस्तुत कर सरलमति भारतीयों को पथभ्रष्ट कर रहे हैं| प्रस्तुत लेख में व्यर्थ ही वाद विवाद खड़ा कर लेखक भारतीयों में आशंका व अविश्वास पैदा करते दीखता है।

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  9. शिवेंद्र मोहन सिंह

    मुसलमानों ने आजादी के आंदोलन में भाग लिया फिर अपना हिस्सा लेकर अलग हो गए, हिन्दुओं ने तो उन्हें अलग नहीं किया ना ? कुर्बानी की कीमत उनलोगों ने वसूल ली। फिर उनका हिस्सा क्यों? अगर मुसलमान यहाँ दबे कुचले हैं, उनकी उपेक्षा हो रही है तो सो काल्ड अपने प्रिय देश में चले जाएं, रोका किसने है उन्हें ? अगर उन्हें सताया जा रहा है तो आजादी से अब तक १ या दो प्रतिशत से १४ से १८ प्रतिशत के कैसे हो गए ? इस देश का प्रधान मंत्री कहता है इस देश के संसाधनो पर पहला हक़ मुसलमानों का है, इसका क्या मतलब है ? ये दबाए हुए हैं या प्रिविलेज्ड हैं ? जुम्मा जुम्मा ४ दशक हुए बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति देख लो और भारत में अपने प्रियजनों की स्थिति देख लो।

    गायबोल्स के मानस पुत्र अब जमाने लद गए आप लोगों के, धूर्तता से पूरे हिंदुस्तान के इतिहास को उलट पुलट करके रख दिया। वैचारिक संस्थानों पर कब्ज़ा करके पूरे भारत को मूर्ख बनाने के दिन अब लद चुके हैं। पूरी दुनिया में चारों ओरसे लतिया दिए गए और अब भारत में भी लुप्त प्रजाति में शामिल होने की कगार पर खड़ी है आपकी कम्युनिस्ट प्रजाति। अब भी सम्भलो नहीं तो आने वाली पीढ़ियां इतिहास के पन्नों में पढ़ेंगी की भारत में एक कम्युनिस्ट पार्टी हुआ करती थी।

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    • इक़बाल हिंदुस्तानी

      Iqbal hindustani

      शिवेन्द्र जी पहले इतिहास की जानकारी कीजिये फिर लिखिए।
      आपको पता होना चाहिए जब देश का बंटवारा हुआ तो हिन्दुस्तान में रुकने वाले मुस्लिम ने उस समय की राष्ट्रभक्त मानी जाने वाली कांग्रेस के पक्ष में वोट दिया था। इस तरह हिंदुस्तान का जो वर्तमान नक्शा है उसमे यहाँ के मुस्लिमो का हिस्सा भी शामिल है। वो आपके रहमो करम पर यहाँ नहीं है और न ही वो ही हिन्दुस्तान छोडकर भागने वाला है। यहीं रहेगा संघर्ष करेगा अपना हर अधिकार लेगा। ये रेल का डब्बा नहीं है कि किसी को डरा धमकाकर उसकी सीट छीनन्लो या धक्का देकर नीचे फेंक दो।
      आपको ये भी ठीक पता नही है कि देश जब आज़ाद हुआ तो बंटवारे के बाद हिंदुस्तान में कितने % मुस्लिम थे। हाँ एक बात ठीक है कि उनकी आबादी थोडा तेज़ी से बढ़ी लेकिन उसका कारण इस्लाम नहीं उनकी गरीबी और जहालत है। यही वजह है कि दलितों की आबादी मुस्लिमो से भी तेज़ी से बढ़ी है। भारत सरकार के आंकड़े देखलो।
      ये बात ठीक है कि पकिस्तान और बंगलादेश में हिन्दुओं के साथ पक्षपात और ज़ुल्म हुआ जिस से उनकी आबादी वहाँ घटी है लेकिन इसकी सज़ा भारत के मुस्लिम को नहीं दी जा सकती।
      तुष्टिकरण भी संघ परिवार का दुष्प्रचार है नहीं तो आज मुस्लिमो की ये हालत नहीं होती जो सच्चर कमेटी ने बताई है।

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      • मुकेश चन्‍द्र मिश्र

        मुकेश चन्‍द्र मिश्र

        पाकिस्तान चाहने वाले और मुस्लिम लीग के समर्थक ज़्यादातर मुस्लिम यहीं रह गए पाकिस्तान जाने वालों मे ज़्यादातर पंजाबी मुस्लिम ही थे, और मुस्लिम या तथाकथित सिकुलर अजब गज़ब तर्क देते हैं अपने पक्ष के लिए खुद बर्मा, इजरायल आदि देशों मे हुये मुस्लिम उत्पीड़न पर भारत मे आग लगाते हैं यहाँ हिन्दुवों पर हमले करते हैं लेकिन अगर पाकिस्तान बांग्लादेश के हिन्दुवों के उत्पीड़न पर कोई कुछ लिख दे तो उसपर कहेंगे की इसे यहाँ के मुस्लिम से मत जोड़ो, ठीक है नहीं जोड़ते क्योंकि वो दूसरा देश है लेकिन कश्मीर तो भारत मे ही है क्या वहाँ हिन्दुवो पर हुये हमलो का उदाहरण भी न दें ?

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      • JaggaramJat

        मुसलमान की गरिबी के लिये भारतीय व्यवस्था हिन्दु संगठन कत्तई जिम्मेदार नही है हिन्दुओ मे भी अनेक समुदाय है जो यहा के मुसलमानो से भी कई गुणा गरीब है मुसलिम्स की गरिबी के लिये उनकी बेलगाम बढती जनसंख्या है वे धर्मान्धता के चलते जनसंख्या बढाते है फिर जेहादी बन करे मार काट मचाते है जादातर मुस्लिम देशो की यही गति है अगर मुस्लिम भारतीयता को नजर अन्दाज कर इस प्रकार अरबी अफगानी इरानी कल्चर मे जियेंगे तो एसे ही मारकाट मे उलझे रहेंगे पहले दुसरो से लडेंगे। जितने के बाद अपनो को भी शिया शुन्नी ओर शरिया के नाम पर मारंगे। क्या यही है इस्लाम ओर उसका जेहाद

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  10. आर. सिंह

    आर. सिंह

    जगदीश्वर चतुर्वेदी जी,बुरा न मानिए तो मैं कहना चाहता हूँ कि आपके आलेख के बीच आया हुआ यह एक वाक्य ” अनेक मुसलिम नेताओं ने कम्युनिस्ट आंदोलन और क्रांतिकारी आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी” इस संतुलित ,सारगर्भित आलेख को आलोचना का शिकार बना देता है,पर आपकी कम्युनिष्ट विचार धारा ने यहाँ भी आपका पीछा नहीं छोड़ा, मुस्लिम जनता और उसके नेताओं स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी इससे बहुत अधिक रहा है.वे वे लोग असहयोग आंदोलन के हमेशा अंग रहे हैं.
    ‘.मैं मानता हूँ कि साम्यवादियों का योगदान स्वतंत्रता की लड़ाई में रहा है,जबकि आर.एस.एस का योगदान नगण्य है. पर उस योगदान की कलई उस दिन खुल गयी थी,जब रूस ने द्वितीय विश्व युद्ध में अंग्रेजों का साथ देना स्वीकार कर लिया था.साकम्यवादियों ने तुरत पाला बदल लिया था.१९४५ का एक वाकया तो यह है कि एक जुलुस मेंशाकमिल लोगों को जुलुस के आधे रास्ते से लौटा लिया गया था.
    खैर आज उसको याद करने की उतनी उतनी आवश्यकता नहीं है.आज तो भारत की सारभौमिता के साम्नमे ,उसके संविधान के सामने चुनौति आ गयी है. पता नहीं यह क्यों हो रहा है?कौन वह शक्ति इसके पीछे का,म कर रही है,जो देश को विघतित करना चाह रही है? क्यों लोगों का ध्यान मूल समस्याओं से हटाया जा रहा है?कहीं यह सोची समझी चाल तो नहीं है?क्योंकि मेरे विचारानुसार इस सरकार की नीतियां और उसमे बैठे भ्रष्ट लोग अपने बड़ बोलापन के बावजूद इसका निदान पाने में असमर्थ लग रहे हैं.

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  11. इक़बाल हिंदुस्तानी

    Iqbal hindustani

    ये बात ठीक है कि कोई भी देश उसकी मेजोरिटी के चाहे बिना सेकुलर और लोकतांत्रिक नहीं रह सकता लेकिन ये भी उतना ही सच है कि आज कोई भी देश धर्म और सेना के नाम पर सदा नहीं चल सकता।
    हैरत की बात ये है कि हम सेकुलर होते हुए हिन्दू राष्ट्र की उस बहस में उलझे हैं जिस से गैर हिन्दू तो दूर सारे हिन्दू ही सहमत नहीं हैं। वजह साफ़ है कि आज के दौर में ये किसी कीमत पर हो नहीं सकता क्योंकि आज़ादी की लड़ाई से लेकर जीवन के हर क्षेत्र में हिन्दू मुस्लिम और दुसरे समुदाय साथ रहे हैं। ऐसे में कोई भी दूसरे दर्जे का नागरिक बनना किसी हाल में भी स्वीकार नहीं करेगा और अगर हिन्दू राष्ट्र जबरदस्ती बनाया जाएगा तो यह देश में गृह युद्ध का कारण भी बन सकता है।

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    • JaggaramJat

      जब तक इस्लाम जेहाद की परिभाषा नही बदलेगा तब तक कोई भी गैर मुस्लिम इन पर पुर्ण विश्वास नही करेगा। क्योकि इस्लाम जेहाद के लिये हर वो तरिका अपनाने की इजाजत देता है जो मानवता के भी विरुद्ध है। इसी के चलते दुनिया मे ना जाने कितने ही मारकाट मचाने वाले चरमपंथी गिरोह(संगठन) बने हुये है। भारतवर्ष भी उमका टारगेट रहा है। ऐसे मे यहां के सेकूलरो की सेकूलरता भी शक के दायरे मे आ जाती है क्योकि वे मुसलिमो को केवल सत्त्ता प्राप्ति के लिये वोट बेंक की तरह यूज करते है तो जेहादी सोच वाले मुसलमान इसका फायदा उठा कर देश मे आतंक मचाने से बाज नही आते।

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  12. Nida Nabeel

    I agree with Yogi Sir. How many Hindus or Muslims know about constitution? How many Indians read constitution? India is secular and democratic because of Hindu majority. Can writer tell us why Pakistan and Bangla Desh are not secular while both were a part of erstwhile India? India could have opted for Hindu nation but it decided to be secular. Why no muslim country is secular and democratic?

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    • बीनू भटनागर

      1947 मे देश का बंटवारे की मांग मुसलमानो की तरफ़ से आई थी, कि वो इस्लामिक देश अलग बनाना चाहते हैं।भारत के नेताओं ने हिन्दू राष्ट्र की मांग नहीं की थी, ये सही था या ग़लत इस पर मै कुछ नहीं कहूँगी,पर ये सच है, उस समय यदि हमारे नेता चाहते तो हिन्दू राष्ट्र बना सकते थे।हमारे संविधान को कितनो ने पढ़ा है पता नहीं, पर यह बात जानते सब हैं कि भारत धर्मनिर्पेक्ष राष्ट्र है।।स्वतन्त्रता के बाद से ही हमारे देश मे अल्प संख्यकों को पूरे नागरिक अधिकार दिे गये है।यदि ऐसा नहीं करते तो भारत से अधिकतर मुसलमान प. पाकिस्तान पू पाकिस्तान( अब बांग्लादेश ) चले जाते।अब हम उन्हे कैसे कह सकते हैं कि हम हिन्दू राष्ट्र है, आप जाइये, या आपको सभी नागरिक अब आपको सभी नागरिक अधिकार नहीं मिल सकते।
      जहाँ तक इस्लामिक राष्ट्र की बात है पाकिस्तान और बांग्लादेश शुरू से ही इस्लामिक राष्ट्र हैं, उनका जन्म ही इस उद्देश्य से हुआ था।कुछ अल्पसंख्यक जो वहां रह गये वो ये जानते थे कि उन्हे समान नागरिक अधिकार नहीं मिल सकते इस्लामिक देश मे।
      60 दशक तक कौंग्रेस नेताओं ने मुस्लिम तुष्टीकरण किया, भले ही उनका भला न हुआ हो पर हिन्दुओं मे विद्रोह जगा। यह विद्रोह अक्रामक रूप नहीं लेना चाहिये। हिन्दू मुसलमान इस देश के नागरिक हैं, मिलजुल कर शांति से रहें।

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      • JaggaramJat

        सही कह रहे है आप, जन्म के समय से उत्पन इफेक़्ट का फल इन्डिया आज तक भुगत रहा है अगर 1947 मे ही इसका स्पष्ट फेसला होता कि हिन्दुस्तान मे मुस्लिम नही रहेंगे ओर पाकिस्तान मे गैर मुस्लिम नही रहएंगे तो आज यह समस्या नही होती लेकिन जन्म दाताओ ने ही गलती कर दी तो अब आगामी पीढी को इस इंडिया मे ना जाने कितने पाकिस्तान बनते हुये देखने पडेंगे।

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  13. बीनू भटनागर

    बस अब और नहीं, ये देश न हिन्दूराष्ट्र है न इस्लामिक देश हम हिन्दुस्तानी हैं, भारतीय है इण्डियन है उसके बाद और कुछ, यही सच है, हितकारी है…. इतिहास दोहरानी की और कीचड़ उछालने की ज़रूरत नहीं है… धृणा न फैलायें।

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    • JaggaramJat

      श्रीनगर के लाल चोक पर तिरंगा नही फहर सकता, वहां जन्मा हिन्दु पंडित वहां नही रह सकता, सोचो तो नफरत की शुरुआत कहा से हुई है मिटानी भी वही से पडेगी अन्यथा आपकी फोकटी बात को अब कोई नही मानेगा।

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  14. Yogi Dixit

    लेखक सिर्फ इतना बता दें तो बड़ी कृपा होगी. संविधान तो अभी सिर्फ 60-70 साल पहले बना है. उससे पहले हिन्दू और मुस्लिम किस से संचालित होते थे? शाहबानो केस में संविधान में संशोधन क्यों हुआ था? इन वामपंथियों ने आज़ादी से पहले भी भ्रामक बातें कीं जिस का परिणाम पाकिस्तान के रूप में सामने आया. आज़ादी के बाद में भी ये वाही भामक विचार करते हैं. जिस दिन हिन्दू अल्पमत हो जाएगा, न ये संविधान रहेगा, न ही ये वामपंथी लेखक, विचारों की आज़ादी का मज़ा ले सकेंगे. वामपंथी नेपाल में हिन्दू राज्य समाप्त करने में इसलिए सफल हुए क्योंकि नेपाल एक हिन्दू राष्ट्र था, ज़रा पकिस्तान या किसी अन्य मुस्लिम देश में से इस्लामी शब्द हटाकर देख लें, इनको इनकी औकात का पता चल जाएगा.

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    • ek hindu

      sahi jawab yogi ji . lekhak ne ekdum biased lekh likha . koun sa muslim desh secular hai. koun se muslim desh me minority clean sweep nahi hoti. bharat ke jis hisse me muslim bad jate hai vahi narak ho jati hai jindagi . 52 desh muslims ke kisme democracy hai theek se. khule aam ovaisi ne bola aur jab hindu neta ovaisi ka virodh karte hai to hindu kattar lagne lage. muslim area se gujarna aise lagta hai jaise duniya me isase buri gandi neech jagah nahi. hinduo ka ek desh hai use bhi secular kyu banaye jaye. muslim kab se samvidhan ka palan karne lage. muslim sirf matlabi bhatki hui aur janwaro ki tarah jeene wale log hai. allah ishwr sab ek doosre se pyar karna sikhate hai . roj muslim katle aam karte hai lagbhag har desh me aur fir bhi lekhak ko pata nahi kis chheej ka nasha chadha hai. manavta ke dushman hai jyadatar muslim . apni ek pal ki khushi gurur time pass entertainment inhe sahi lagta hai aur us par har bure kam ko islam ki ot me khud ko cover rakhna . he bhagwan is murakh islamic koum ko seedhe raste par la. ye pahle to sabko khatam karenge fir khud ko ek doosre ko.

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      • Sachin Tyagi

        ” सही जवाब योगी जी .लेखक ने एकदम बायस्ड लेख लिखा है . कौन सा मुस्लिम देश सेक्युलर है . कौन से मुस्लिम देश में माइनॉरिटी क्लीन स्वीप नहीं होती . भारत के जिस हिस्से में मुस्लिम बढ़ जाते हैं वहीं नरक हो जाती है जिन्दगी . 52 देश मुस्लिम्स के किसमे डेमोक्रेसी है ठीक से . खुलेआम ओवासी ने बोला और जब हिन्दू नेता ओवासी का विरोध करते हैं तो हिन्दू नेता कट्टर लगने लगे . मुस्लिम एरिया से गुजरना ऐसा लगता है जैसे दुनिया में इससे बुरी नीच गंदी जगह नही . हिन्दुओ का एक देश है उसे भी सेक्युलर क्यू बनाया जाये . मुस्लिम कब से संविधान का पालन करने लगे . मुस्लिम सिर्फ मतलबी भटकी हुई और जानवरों की तरह जीने वाली कोम है .अल्लाह ईश्वर सब एक दुसरे से प्यार करना सिखाते हैं . रोज़ मुस्लिम कत्लेआम करते है लगभग हर देश में और फिर भी लेखक को पता नही किस चीज़ का नशा चढ़ा है .मानवता के दुश्मन है ज्यादातर मुस्लिम .अपनी एक पल की ख़ुशी , गुरुर , timepaas एंटरटेनमेंट इन्हें सही लगता है और उस पर हर बुरे काम को इस्लाम की ओट में खुद को कवर रखना . हे भगवान , इस मूरख इस्लामिक कोम को सीधे रास्ते पर ला .ये पहले तो सबको खत्म करेंगे , फिर खुद को , एक दूसरें को . ” ……………………………………………………………………….श्रीमान एक हिन्दू , आपके विचार बहुत अच्छे व सही हैं . इन्हें विकसित व प्रचारित करिए और हिंदी देवनागरी में लिखने का प्रयास करें — हमको पढने व समझने में आसानी होगी …….!!

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