लेखक परिचय

जयराम 'विप्लव'

जयराम 'विप्लव'

स्वतंत्र उड़ने की चाह, परिवर्तन जीवन का सार, आत्मविश्वास से जीत.... पत्रकारिता पेशा नहीं धर्म है जिनका. यहाँ आने का मकसद केवल सच को कहना, सच चाहे कितना कड़वा क्यूँ न हो ? फिलवक्त, अध्ययन, लेखन और आन्दोलन का कार्य कर रहे हैं ......... http://www.janokti.com/

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hjkख़ुद से दूर रहना चाहता हूँ ,
अपने हीं अक्स से घबराता हूँ ,
प्यार किसी से करता हूँ ,
क्या प्यार उसी से करता हूँ ?
अपने अन्दर के विद्रूप से डरता हूँ ।
जीवन की उलझी राहों में ,
ख़ुद के सवालों से घिरता हूँ ,
अपनी सोच , अपने आदर्शों के
पालन से जी चुराता हूँ ,
अपने अन्दर के विद्रूप से डरता हूँ । ।

One Response to “जीवन की उलझी राहों में ………”

  1. दीपक चौरसिया ‘मशाल’

    Dipak Chaurasiya 'Mashal'

    विप्लव् जी,
    माफी चाहता हू्ँ,
    यहाँ भाव बिखरॆ हुऎ सॆ लगतॆ हैं, ज़रा सॊच कॆ दॆखियॆ कि क्या सच मॆ प्यार मॆ ऐसी फीलिंग जन्म लॆ सकती है? यॆ ऎक भटकी हुई सी साधारन रचना प्रतीत हॊती है, आप इससॆ काफी अच्छा लिख सकतॆ हैं.
    दीपक ‘मशाल’

    Reply

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