More
    Homeराजनीतिनई ऊर्जा से सराबोर भारत और बांग्लादेश

    नई ऊर्जा से सराबोर भारत और बांग्लादेश

    अरविंद जयतिलक

    बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा दोनों देशों के ऐतिहासिक व सभ्यतागत संबंधों को मिठास से भर दिया है। दोनों देशों के बीच 5 अहम समझौते पर सहमति बनी है जो संपर्क, उर्जा, व्यापार, स्वास्थ्य और विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट, रिजिली अन्स एंड मिटिगेशन, बांग्लादेश नेशनल कैडेट कोर और नेशनल कैडेर कोर के अलावा बांग्लादेश के राजशाही फील्ड और उसके आसपास के क्षेत्र में खेल गतिविधियों को विकसित करने से जुड़े ये समझौते दोनों देशों के विकास के पहिए को गति देंगे। इसके अलावा मिताली एक्सप्रेस नाम की पैसेंजर टेªन जो कि ढाका से न्यू जलपाईगुड़ी के बीच चलेगी, से दोनों देशों के लोगों के सामाजिक-सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा कोरोना महामारी से निपटने के लिए भारत द्वारा टीका उपलब्ध कराए जाने पर आभार व्यक्त करना और भारत को सच्चा मित्र बताना रेखांकित करता है कि दोनों देश साझी विरासत की जीवंतता बनाए रखने के लिए कितने संवेदनशील हैं। गौर करें विगत कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए हैं जिससे दोनों देशों के कारोबारी और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई मिली है। पूर्व में हुए समझौते के तहत जहां भारत बांग्लादेश के लिए अपना विशाल बाजार खोलकर उसे आर्थिक लाभ पहुंचा रहा है वहीं बांग्लादेश भी भारत की रणनीतिक चिंताओं से खुद को जोड़ते हुए हरसंभव मदद की कसौटी पर खरा उतर रहा है। इस बार भी दोनों देशों ने साझा चिंताओं के संदर्भ में आतंकवाद और घुसपैठ से निपटने के अपने पुराने संकल्प को जाहिर किया। गत वर्ष पहले ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एनआरसी, रोहिंग्या समस्या और तीस्ता जल बंटवारे जैसे ज्वलंत मसले पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया और सहमति से हल निकालने की प्रतिबद्धता जतायी। एनआरसी के मसले पर भारत ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया कानून सम्मत और अदालत के निर्देश के तहत हो रही है लिहाजा यह भारत का आंतरिक मामला है। दोनों देशों के बीच संबंध कितने मधर हैं इसी से समझा जा सकता है कि दोनों ने सार्क के बजाए बिमटेस्क को मजबूती देने की रणनीतिक प्रतिबद्धता जताकर दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की भूमिका सीमित करने के लिए कृतसंकल्प हंै। रणनीति के तहत भारत ने ढाका को तटीय निगरानी तंत्र मुहैया कराने के समझौते को आयाम देकर बंगाल की खाड़ी से लेकर अपने समूचे पूर्वी तट की निगरानी का रोडमैप तैयार किया है। इससे चीन पर भी नजर रखने में मदद मिल रही है। तीस्ता जल बंटवारे पर बांग्लादेश की चिंता को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुनः भरोसा दिया है उनकी सरकार इस मसले पर सभी संबंधित पक्षों से मिलकर हल निकालने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अच्छी बात है कि दोनों देशों के सार्थक पहल से दोनों देशों के बीच आवाजाही तेज हुई है और सांस्कृतिक-भाषायी संबंद्धता को मजबूती मिली है। नागरिकों के बीच अंतःक्रियाएं बढ़ी हैं और उच्च स्तरीय विनिमय के अलावा जनता से जनता का संबंध और संवाद प्रगाढ़ हुआ है। शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी सहयोग के अलावा व्यापार-कारोबार में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है। ध्यान देना होगा कि दक्षिण एशिया क्षेत्र में बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी देश है। बांग्लादेश में भारतीय निवेश व्यापक स्तर पर होता है। ये क्षेत्र हैं-टेक्सटाइल्स, निर्माण उद्योग, रसायन, पेंट, फार्मास्यूटिकल, अस्पताल, यात्रा, बैग, आइटी, आयुर्वेदिक उत्पाद, गरी का तेल, आॅटोमोबाएल तथा सफेद सीमेंट इत्यादि। भारत की कई कंपनियां बांग्लादेश में काम कर रही हैं। जनवरी 2005 में भारत-म्यांमार और बांग्लादेश के बीच यांगून में एक त्रिपक्षीय बैठक हुई जिसमें बांग्लादेश से होकर पाइपलाइन द्वारा तटीय गैस को भारत ले जाने पर विचार विमर्श हुआ था जिसे अब अमलीजामा पहना दिया गया है। भारत बांग्लादेश संबंध इस बात का जीवंत उदाहरण है कि भारत अपने पड़ोसियों को हरसंभव यहां तक कि अपनी कीमत पर भी मदद करना चाहता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कारोबारी गतिविधियां बढ़ी हैं। अच्छे संबंधों के कारण दोनों देशों के बीच आर्थिक कारोबार में वृद्धि हुई है। बांग्लादेश को भारत से होने वाले निर्यात में भी लगातार बढोत्तरी हो रही है। आज बांग्लादेश भारत की सबसे गतिशील मंडियों में से एक मंडी बन चुका है। भारत ने बंगलादेश के हित के लिए कई सेक्टरों की वस्तुओं के आयात पर टैरिफ रियायतें दी है। दोनों देशों के बीच शीतयुद्धोत्तर युग में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पनपते सहयोगों का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। अब दोनों देशों को चाहिए कि वे इस सकारात्मक माहौल का लाभ उठाकर द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं विश्वशांति के वृहत दायरे में अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करते हुए अतिशीध्र सभी विवादित मुद्दों को सुलझा लें। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। बांग्लादेश प्रायः यह शिकायत करता रहता है कि बांग्लादेशी सामान जब भारतीय बाजारों में पहुंचता है तो उन्हें गैर-प्रशुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत द्वारा प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बांग्लादेश ने कोई रुचि नहीं दिखायी है। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह भी कि बांग्लादेश लगातार भारतीय वस्तुओं को पारगमन की सुविधा देने से इंकार करता रहा है जिससे उसे राजस्व की हानि होती है। बांग्लादेश की राजस्व हानि का एक महत्वपूर्ण कारण तस्करी की समस्या भी है। दोनों देशों को मिलकर इस समस्या का हल ढुंढ़ना होगा। बांग्लादेश अपनी जरुरत की चीजों-खाद्य, तेल मसाले, इत्यादि की आपूर्ति भारत के लोगों को गैर जरुरी या आराम के साधनों-जापानी कैमरा, टेपरिकार्डर इत्यादि की तस्करी द्वारा करता है। सच तो यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार के बजाए तस्करी खूब फल-फूल रही है जिससे दोनों देशों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारत को भी बांग्लादेश से शिकायत है कि उसकी भूमि तेजी से इस्लामी कट्टरपंथियों का अड्डा बन रहा है। वहां पर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से संबंधित अनेक गुट सुरक्षित अभ्यारण्य पाते हैं। इसके अतिरिक्त पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने बांग्लादेश को भारत विरोधी कार्यवाहियों को अंजाम देने के लिए अपना अड्डा बनाया है। भारत की दूसरी चिंता यह है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। हिंदुओं की तादाद लगातार घट रही है। उनके अधिकार सीमित हो रहे हैं। कट्टरपंथी ताकतें उन्हें जबरन इस्लाम स्वीकारने को विवश कर रही हंै। पिछले कुछ वर्षों में हिंदुओं के पूजास्थलों पर हमले बढ़े हैं। उचित होगा कि शेख हसीना सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और कट्टरपंथी ताकतों पर लगाम लगाए। बेहतर होगा कि बांग्लादेश आतंकी संगठनों पर भी कड़ाई से प्रहार करे ताकि भारतीय उपमहाद्वीप में शांति की स्थापना हो सके। बांग्लादेश को आतंकवाद के मसले पर भारत के प्रति इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए कि पाकिस्तान से अलग होकर 1971 में वजूद में आया और उसके निर्माण की प्रक्रिया में भारत की विशेष भूमिका रही है। दो राय नहीं कि ताकतवर व समृद्ध होने के नाते भारत की जिम्मेदारी भी है कि वह अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश की आर्थिक तरक्की और सुरक्षा का ध्यान रखे। अच्छी बात यह है कि भारत इस भूमिका का सार्थक निर्वहन कर रहा है। गत वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की जनता की खुशहाली एवं समृद्धि के लिए पांच अरब डाॅलर की वित्तीय मदद दिया जो रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि भारत अपनी सार्थक भूमिका का भलीभांति निर्वहन कर रहा है। भारत के इस आर्थिक मदद से बांग्लादेश की ढांचागत परियोजनाओं को मजबूती मिली है और विकास की रफ्तार तेज हुई है। लेकिन कुछ ऐसे विवादित मसले भी हैं जिन पर अभी तक दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पायी है। उनमें सबसे ज्यादा विवाद नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर है। दोनों देशों के बीच 54 साझी नदियां है किंतु सबसे अधिक विवाद तीस्ता जल बंटवारे को लेकर है। अच्छी बात है कि इस मसले पर दोनों देश संवेदनशील हैं। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को ताजगी और नई उर्जा से सराबोर कर दिया है।   

    अरविंद जयतिलक
    अरविंद जयतिलकhttps://www.pravakta.com/author/arvindjaiteelak
    लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में समसामयिक मुद्दों पर इनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,260 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read