लेखक परिचय

सुरभी

सुरभी

आप अभी रांची, झारखण्ड में छात्रा है, कविताएं लिखना आपका शौक, दुनिया बदलने कि ख्वाइश रखती हैं…

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भारत बनाम ईंडिया……..

सहमा सकुचा सिमटा सा
उपेक्षित,निरुत्साह, भारत है डरा हुआ
ईंडिया है स्वाभिमानी,स्वछंद स्वतंत्र
उदंडता,उत्साह उमंग से भरा हुआbharatma

सहमा हुआ है डरा हुआ है
पर अडिग है अस्तित्व को बचाने के लिये
विडंबना है कि हर ईंडियन आतुर है
भारत को बेचकर खाने के लिये……

दुनिया को बदल दे भारत में
वो ज़ज्बा वो उमंग है
पर क्या करे ये अपने ही लोगों से तंग है
आधुनिकता का चोला पहनने को
भारत भी डोल रहा है
क्युंकि आज हर भारतीय खोल रहा है

दादी नानी को वॄधाश्रम में देखा
और घर मे हर बच्चा कुत्ता पाल रहा है
हँसी आती है हर उस ईंडियन पर
जो बीना नींव के ही मकान ढाल रहा है

अमेरीका में एक बडा सा बँगला हो
आज भारतीयों का यही सपना है
भूल गये सब वो संस्कृती वो सभ्यता
वो लहलहाता खेत मिट्टी की खुशबू
जो हमारा और हमारे देश का अपना है

आज भी भारत का हर आँगन
और हर आँगन पर खडा खाली चारपाई
चीख चीख कर पुछ रहा
घर के हर दिवार से
कहाँ गये सब बच्चे,
क्युँ नहीं दादी-नानी आईं?

काश की बेजान पडा ये दिवार बोलता
सुनसान पडे आँगन का राज़ खोलता
कहता चीख कर कि बेवकुफ़ों
कुछ साल बाद ये आँगन भी आयेंगें याद
ये आँगन भी आयेंगें याद……..

2 Responses to “भारत बनाम ईंडिया……..”

  1. श्‍यामल सुमन

    shyamalsuman

    इन्डिया और भारत का अन्तर मिट जाये तो बात बने
    दूरी कम करने की अपनी कोशिश करता रहता हूँ

    Reply

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