लेखक परिचय

डॉ.कुमार विश्वास

डॉ.कुमार विश्वास

कवि एवं वर्तमान में दिल्ली विधान सभा के पार्षद

Posted On by &filed under कविता, साहित्‍य.


“इस साल न हो पुर-नम आँखें, इस साल न वो खामोशी हो
इस साल न दिल को दहलाने वाली बेबस-बेहोशी हो
इस साल मुहब्बत की दुनिया में, दिल-दिमाग की आँखें हों
इस साल हमारे हाथों में आकाश चूमती पाँखें हों
ये साल अगर इतनी मुहलत दिलवा जाए तो अच्छा है
ये साल अगर हमसे हम को, मिलवा जाए तो अच्छा है
चाहे दिल की बंजर धरती सागर भर आँसू पी जाए
ये साल मगर कुछ फूल नए खिलवा जाए तो अच्छा है
ये साल हमारी कि़स्मत में कुछ नए सितारे टाँकेगा
ये साल हमारी हिम्मत को कुछ नई नज़र से आँकेगा
इस साल अगर हम अम्बर से दुःख की बदली को हटा सके
तो मुमकिन है कि इसी साल हम सब में सूरज झाँकेगा”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *