अंततः आईएसआईएस के स्वयंभू खलीफा के साम्राज्य का पतन |

लगातार आठ महीने तक युद्ध की आग झेलने के बाद शायद इराकी सैनिकों ने गुरुवार को राहत की सांस ली होगी, जब आईएसआईएस के साम्राज्य की राजधानी मानी जाने वाली मोसुल मस्जिद को नेस्तनाबूत करने के बाद उस पर कब्जा कर लिया गया | इसके साथ ही ईराकी प्रधान मंत्री ने स्वयंभू खलीफा के साम्राज्य पतन की घोषणा की ।
इराकी अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मोसुल की लंबी लड़ाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी क्योंकि इस्लामी राज्य के बाक़ी बचे मुट्ठी भर लड़ाके पुराने शहर के छोटे से इलाके में घिर गए हैं ।
लगभग 850 वर्ष पुरानी इस ग्रैंड अल-नुरी मस्जिद से ही तीन वर्ष पूर्व 4 जुलाई 2014 को इस्लामी राज्य के नेता अबू बकर अल बगदादी ने स्वयं को खलीफा घोषित किया था – अतः इस विजय का बड़ा प्रतीकात्मक महत्व है।
प्रधान मंत्री हैदर अल-अब्दी ने एक बयान में कहा कि अल-नुरी मस्जिद और अल-हद्बा मीनार पर ईराक का कब्जा, झूठे इस्लामी स्टेट के खात्मे की निशानी है ।

मोसुल के पतन से आईएस खलीफा के आधिपत्य का लगभग आधा इराकी भाग उसके कब्जे से मुक्त हो गया है | हालांकि अभी भी शहर के पश्चिमी और दक्षिणी इलाकों के हजारों लोग इस समूह के नियंत्रण में हैं ।
सीरिया में उसका गढ़, रक्का, भी गिरने के करीब है।
सीरिया के मानवाधिकार निगरानी समूह के अनुसार अमेरिका समर्थित कुर्दिश-नेतृत्व वाले गठबंधन की सेनाओं ने गुरुवार को आतंकवादियों के आखिरी रास्ते को बंद करने के बाद उन्हें पूरी तरह से घेर लिया था ।
इस झटके ने इस्लामी राज्य के कब्जेवाले 60 प्रतिशत क्षेत्र को कम कर उसकी 80 प्रतिशत कमाई कम कर दी है ।
एक इराकी सैन्य प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल याहया रसूल ने पत्रकारों को बताया कि “उनका फर्जी राज्य गिर गया है”।
हालांकि विश्लेषकों के अनुसार अभी भी इराक, सीरिया और बेल्जियम के बडे क्षेत्र पर उनका कब्ज़ा बना हुआ है।
स्मरणीय है कि इस्लामी राज्य सेनानियों ने एक सप्ताह पूर्व एक मध्ययुगीन मस्जिद और इसकी प्रसिद्ध झुकी हुई मीनार को विस्फोट से उड़ा दिया था क्योंकि यू.एस. समर्थित इराकी बलों ने इसकी दिशा में बढ़ना शुरू किया था। उनका काला झंडा जून 2014 से अल-हद्बा (द हंचबैक) मीनार पर फहरा रहा था।
इराक़ी आतंकवाद विरोधी कार्यकर्ता एरिक डी कास्त्रो, ग्रैंड अल-नुरी मस्जिद के खंडहर में
पुराने शहर के शेष हिस्सों पर कब्जा कर लड़ाई को उसके अंतिम परिणाम पर पहुँचाने के निर्देश प्रधान मंत्री हैदर अल-अब्दी ने दिए हैं ।
दोनों पक्षों ने इस लड़ाई की बहुत भारी कीमत चुकाई है | सैन्य हताहतों के अलावा, हजारों नागरिकों के मारे जाने का अनुमान है ।
इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं | सहायता समूहों के मुताबिक उत्तरी शहर के लगभग नौ लाख लोग यातो शिविरों में शरण लिए हुए हैं, अथवा अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के यहाँ रह रहे हैं ।
शहर में फंसे लोग भूख और अभाव से ग्रस्त हैं, तो कई लोग आईएस उत्पीड़न के कारण या तो मारे गए हैं, या घायल हैं | युद्ध ने कई इमारतों को बर्बाद कर दिया है ।
माना जाता है कि स्वयंभू खलीफा अबू बकर अल बगदादी युद्ध की बागडोर अपने स्थानीय कमांडरों को सोंप कर ईराक और सीरिया की सीमा पर कहीं जा छुपा है |

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