अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का  इस्लामी फरमान

पिछले सप्ताह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) जमीरउद्दीन शाह ने यूनिवर्सिटी के सभी छात्र-छात्रों को परंपरागत लिबास (अर्थात् मुस्लिम लिबास) पहने का तालिबानी फरमान जारी किया है। छात्र जुमे (शुक्रवार) और यूनिवर्सिटी कार्यक्रमों में शेरवानी (मुस्लिम लिबास) पहनने तथा छात्राओं को बुर्का तथा सलवार शूट (विशुद्ध इस्लामी लिबास) पहनने के लिए कहा गया है। कुलपति के आदेश के अनुसार कोई भी विद्यार्थी उनसे बिना इस्लामी लिबास पहने नहीं मिल सकता। श्री जमीरउद्दीन जो भारतीय सेना में ऊंचे पद पर रहे है उनका इस प्रकार का इस्लामी फरमान कहां तक सही है! क्या इस तरह के आदेश से उनकी कट्टर धर्मान्धता की झलक नहीं मिलती है? वे क्या मुस्लिम समाज को मध्य युग में ले जाकर जिहादी बनायेगें जिसके कारण शरीर से 21वीं सदी में रहने वाले युवा प्रायः हृदय व मन से मध्ययुग में जीयेंगे?
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जिसने 1947 में पाकिस्तान बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी लगता है आज फिर से भारत में धार्मिक आधार पर एक ओर पाकिस्तान बनवाना चाहती है। कुलपति के अनुसार यूनिवर्सिटी में छात्रों के एक छोटे से गुट के द्वारा छात्रावासों में विभिन्न अपराधों में लिप्त हथियारबंद तत्वों को शरण दी जाती है जो विश्वविद्यालय में आम छात्रों को डराते और धमकाते हैं तथा अन्य छात्रों को भी गैर कानूनी कार्यों में सहयोग करते है। इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी में बाइकर्स गिरोह भी है जो अपराध करके फरार हो जाता है। जमीरउद्दीन शाह ने इन अपराधियों को यूनिवर्सिटी से बाहर निकालने की सोची तो है परन्तु इस्लाम को किस प्रकार फैलाया जाये इस पर अधिक ध्यान लगा रहे है।
अपने आप को धर्मनिरपेक्ष कहने वाला मीडिया तथा देश के तथाकथित धर्मनिरपेक्ष राजनेता मुलायम सिंह, नीतिश कुमार आदि सब कहां चले गये क्या उन्हें इस प्रकार के इस्लामी फरमान में कोई साम्प्रदायिकता नहीं दिख रही! अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सिर्फ मुस्लिम छात्र ही नहीं पढ़ते है या फिर अन्य धर्म के छात्रों का जमीरउद्दीन शाह धर्मान्तरण कर मुसलमान बनाना चाहते है या फिर उन्हें परंपरागत लिबास न पहनने पर यूनिवर्सिटी छोड़ने के लिए कहेंगे? हिन्दुओं द्वारा सरकार को विभिन्न टैक्सों के रुप में दी गई भारी धनराशि से चलने वाला यह मुस्लिम  विश्वविद्यालय देश की धर्मनिरपेक्षता को बचाये रखने में कभी कोई सहयोग करेगा! शायद नहीं।

विनोद कुमार सर्वोदय

1 thought on “इस्लामी फरमान

  1. ये तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नहीं तालिबान का फरमान हैं,वो तो वन्देमातरम नहीं गायेंगे क्योंकि हमारा ।
    देश सैक्युलर हैं, तो वहाँ अन्य धर्मो को मानने वाले उनकी पोशाक क्यो पहनेगे? ये कैसा सैक्युलरिज़्म है!

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