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    यह हौसलों की उड़ान है

    यह हौसलों की उड़ान है। भूटान – थैम्पू से अमेरिका ;वाशिंगटन डीसी तक! नगर निगम से केन्द्रीय मंत्रालय तक! देश और विदेश में, समाज और भारतवासियों के सभी वर्गों और समुदायों के मध्य! उनके कार्यप्रणाली, उठाये जाने वाले कदमों की बहुत चर्चाएं हैं। यह चर्चाऐं आशाओं की, उम्मीदों की चर्चाऐं हैं।

    जब भाजपा, एन डीए ने नरेन्द्र मोदी की अगुवायी में बड़े जनादेश लेकर सरकार का गठन किया था। यह जनादेश बड़े परिवर्तन के लिऐ था। यह जनादेश जनता के मन में ले रही बदलाव के लम्बे समय से चलने वाले हलचल का परिणाम था।

    प्रधानमंत्री अपने पद ग्रहण करते ही लगातार विदेश दौरे पर हैं। और उनकी विदेशी दौरे ने सुर्खी बटोरी है। हमने और अन्यों ने इस दौरे को उनकी कार्यशैली को भारत के लिऐ उनके प्रयासों को उनके समयक ही नहीं उनके विरोधियों ने भी खूब सराहा है। उन्होंने नई शुरूआत के साथ एक नऐ अंदाज में अपने पड़ोसियों, पुराने सहयोगियों से सम्बन्धें को एक नया आयाम और नई दिशा देने का सफल प्रयास किया है। उनकी विदेश यात्रा एक के बाद एक सफल होती चली गई और जापान के बाद अमेरिका की उनकी यात्रा, साथ में संयुक्त राष्ट्र में उनका हिन्दी में सम्बोधन, अमेरिका में अनेको कार्यक्रम, अप्रवासियों के मध्य उनके प्रति उत्साह, पूंजीपतियों के साथ उनका कार्यक्रम मंत्रामुग्ध् कर देने वाला रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने विदेशी दौरे के मध्य कभी एक अच्छे और मंजे राजनेता, कभी अच्छे व्यापारी, कभी सभ्य राजनेता, कभी कुटनीतिज्ञ, कभी राजदूत सभी भूमिकाओं में दिखे। स्वयं से प्रतिनिधियों को अपने देश, अपनी परम्परा, खानपान पर अलग से प्रकाश डालते दिखे! उनका पहनावा, उनका अंदाज, अपने आप को प्रस्तुत करने और लोगों से रूबरू होने का उनका अन्दाज बेहद सराहनीय और आकर्षित कर देने वाला होता है। वह जिन-जिन विषयों पर बात करते हैं उस पर वह और उनकी सरकार कदम उठाती दिखाई देती है।

    अभी अभी मंगल अभियान भारत ने सम्पन्न किया है। इस मिशन की चर्चाऐं वैज्ञानिकों को जिस प्रकार से प्रधानमंत्री, सरकार और जनता की ओर से सराहा गया वह अलग अंदाज में था। प्रधानमंत्री की ओर से 2 अक्टूबर की सफाई अभियान की शुरुआत को सरकार और गैर सरकारी स्तर पर बड़े ही गंभीरता से लिया गया है। एक ओर मंत्री और बड़े-बड़े अधिकारी झाडू लिऐ दिखाई देने लगे हैं। सरकार महकमे में कर्मचारी नाक भौ चढ़ा कर ही सही साफ सफाई में लगे हैं। देश भर में सफाई के इस अभियान को प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा से प्रभावित समझना चाहिऐ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा छोटे-छोटे लोगों के लिऐ बड़े-बड़े कदम उठाऐ जा रहे हैं। उन्होंने जिस प्रकार से भारतवासियों को व्यवस्था के जंजला से बाहर निकालने की जो पहल की है वह सराहनीय कदम है। आम लोगों के लिऐ साफ-सफाई अभियान, शौचालय बनाने की पहल, आम जन के लिऐ बैंक खाते, जो बड़ा कठिन और असंभव था! सरल और सहज बना दिया। यह प्रधानमंत्री की नई और आमजनों के हित में सोच का प्रथम प्रयास है।

    यह हौसलों की उड़ान है कि चीन, जापान, पाकिस्तान, श्रीलंका, बंगलादेश, भूटान, नेपाल जैसे पड़ोसी के साथ अमेरिका जैसे देशों से प्रधानमंत्री आँख में आँख डालकर बात कर रहे हैं। देश के अन्दर बड़े-बड़े कदम उठाऐ जा रहे हैं। बड़े-बड़े असरदार मंत्रियों को भी प्रधानमंत्री को अपने अपने कार्य का हिसाब देना पड़ रहा है। यह हौसलों की उड़ान है कि गरीब और निर्धन बैंक तक जाने लगे हैं। व्यसस्था लेन देन में सतर्क हो गई है। सरकारी कर्मचारी समय पर दफतर आने लगे हैं। सरकारी आफस साफ-साफ लगने लगा है। यह हौसलों की उड़ान है कि प्रधानमंत्री और उनका कार्यालय आम जन के सम्पर्क में है। यह हौसलों की उड़ान है कि सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देने लगी है। नक्सलवादियों पर सख्ती दिखाई पड़ने लगी है। सेना का मनोबल बढ़ाने वाला गृहमंत्री उनके साथ बाइक चला रहा है। लगातार मंत्री देश और विदेश में काम कर रहे हैं। सरकारी तंत्र सतर्क और तत्पर दिखाई देने लगी है। यह हौसलों की उड़ान ही तो है! इतनी साहस और हिम्मत अभी तक किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं दिखाई है।

    फखरे आलम

    फखरे आलम
    फखरे आलमhttps://www.pravakta.com/author/fakhrealam
    स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

    2 COMMENTS

    1. प्रवक्ता.कॉम पर उड़ान भरते समकालीन विषयों पर फकरे आलम जी द्वारा प्रस्तुत मोदी जी के गगनचुम्बी हौंसलों की रूपरेखा आने वाले कल का प्रतीक है। उन्हें मेरा साधुवाद।

    2. यहाँ मॅडीसन स्क्वेअर गार्डन में मोदी जी के हर वाक्य पर तालियों की गडगडाहट हुयी।
      मोदी मोदी मोदी।
      भारत माता की जय।
      और वंदेमातरम का घोष होता रहा।

      नवरात्रि का उपवास भी उनकी शक्ति क्षीण नहीं कर पाया था।
      न भूतो न भविष्यति।
      ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ।
      और आगे भी कोई और ऐसा अनुभव कराएगा, संभव नहीं लगता।

      किसी भी परदेशी नेता ने इतनी भारी संख्या में इतने उत्साह के साथ, आज तक मॅडीसन स्क्वेअर गार्डन ऐसा खचा खच भरा न था।

      ४० तो सेनेटर, कांग्रेसमन, मेयर, इत्यादि उनको सुनने आए थे।
      हमारे नगर से ३८० किलोमिटर न्युयोर्क तक दो बसें सारे प्रवासी भारतीयों को भरकर सबेरे साढे पाँच बजे निकली थी।
      सारे उत्साह उभर रहे थे।
      वार्तालाप करते करते, और अंत्याक्षरी खेलते खेलते सारे गार्डन पहुंचे।
      लोग तीन, साढे तीन बजे भोरमें उठकर बस पकडने आए थे।
      ऐसा उत्साह किसी और नेता क्या अभिनेता के लिए भी देखा न था।
      बहुत लोग टिकट ना मिलने पर गार्डन तो आए थे।
      बाहर खडे होकर परदेपर देख रहे थे।
      टाईम्स स्क्वेअर में भी सुना, कि, बडे परदेपर सारा कार्यक्रम दिखाया गया।
      लगता है, भारत का भाग्य बदलने वाला है।
      नॉस्टरडॅमस ने सच कहा लगता है।

      एक साल पहले तक भारत के विषय में अनेक मित्रों को जो दारुण निराशा थी; आज उसमें परिवर्तन आ रहा है, आशा में बदल रही है।

      बहुत सारे भारत प्रेमी भारत से बाहर बसते हैं, पर भारत उन्हीं के हृदय अवश्य बसता है। यही अनुभव मॅडीसन स्क्वेअर गार्डन में आ रहा था।
      “आप हमें भारत से बाहर भले समझे, पर भारत हमारे अंदर ही है।” उसे कोई निकाल नहीं सकता।
      लेखक ने सही सही आलेख लिखा है।
      धन्यवाद स्वीकार करें।

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