यह अपनापन ही तो है !

-सुनील एक्सरे-

beach evening

दुनिया में अच्छी घटना बुरी घटना हर पल घटती रहती है ,लेकिन बुरी घटना में ग्रस्त व्यक्ति जब हमारे परिचय का होता है तब हमें दुख होता है किसी क्षेत्र विशेष में जब हमारा कोई अपना सफलता प्राप्त करता है तो हम खुशी से उछल पड़ते हैं। जब किसी अपने की मौत हो जाती है तो अत्यंत दुख की बात है और जब अपने की मौत हो जाती है तो अत्यंत दुख की बात है और जब अपने परिचय में किसी नवजात का जन्म होता है या कोई वैवाहिक कार्यक्रम होता है तो अपार हर्ष की बात है ऐसा निमंत्रण पत्र में छपवाया जाता है।

संसार का प्रत्येक मनुष्य अपने और पराये के बीच अंतर को स्वीकार करता है चाहे वह दूध पीता बच्चा हो या मृत्युशैया में पड़ा बूढ़ा। किसी वजह से मां को रोती हुई देखकर दूध पीता बच्चा भी रो पड़ता है तथा हॅसती हुई देखकर वह भी हंस पड़ता है। मृत्युशैया में पड़ा हुआ बूढ़ा अपनी औलाद का जरा -सा नुकसान भी बर्दाश्त नहीं कर सकता और घर में खुशी आये तो चारपाई में ही पड़े-पड़े हंसकर तथा खुशी के आंसू बहाकर अपनी भावना को व्यक्त करता है। मनुष्य तो बुद्विजीवी एवं सामाजिक प्राणी कहलाता है अपने और पराये की भावना तो अन्य जीव जन्तुओं में भी होती है चिडियों के बच्चों को नुकसान पहुंचाये तो वे व्याकुल होकर उसका मुकाबला करती हुई जान से भी खेल जाती हैं । हमारे घर के किसी पालतू पशु जैसे भेड़-बकरी आदि का हलाल किया जाता है तो हम आहत हो जाते हैं, कुछ देर के लिए भुल जाते हैं कि ये पशु तो हलाल के हेतु ही है ? दुख और खुशी का अनुभव हमें हमारी भावना के कारण ही होता है, हमारे दिल में जिसके लिए अपनापन की भावना जाग जाये उसके दुख – सुख को हम अपना दुख – सुख समझ लेते हैं । दुनिया में कुत्ते और बिल्ली की दुश्मनी को हर कोई जानता है कि वे एक साथ कहीं रह नहीं सकते परन्तु मैंने एक गांव में एक कुतिया को अपने पिल्लों के साथ-साथ बिल्ली के बच्चे को भी दूध पीलाते देखा है ।

यह अपनापन ही तो है ! पालतू पशु के पैरों के बीच जब हमारा बच्चा आ जाता है तो पशु तब तक खड़ा रहता है, जब तक बच्चा सुरक्षित न निकल जाये। गुजरात राज्य के जामनगर जिले में एक 50 वर्षीय किसान है जिसका नाम नारानभाई करंजिया है, उसे जब पता चल जाये कि कहीं कोई मोर पक्षी घायल है तो वह 200 किलोमीटर तक अपनी मोटरसाइकिल से जाकर उसका इलाज करता है और घर ले आता है। पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य जब एक दिन देर रात को घर लौट रहे थे तो शादी के जोड़े में दुल्हा – दुल्हन सड़क पर घायल पड़े थे, साथी बाराती कुछ नहीं कर पा रहे थे। अभिजीत भट्टाचार्य ने अपनी कार में उन्हें ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया। बसंत कालबाग नाम के एक 79 वर्षीय आदमी ने दो वेबसाइड देखा, ग्लोबलाइडिज बैंक डाॅट आॅर्ग और एक्टस आॅफ काइंडनेस डाॅट आॅर्ग तो उन्होंने एक मैसेज तैयार किया यदि मनुष्य एक -दूसरे के प्रति दया की भावना रखे तो यह संसार अतिसुन्दर हो जायेगा और उन्होंने एक संगठन तैयार कर लिया- असीमित दयालुता ।

किसी भी प्राणी के प्रति जब दया आ जाती है तो जातीयता समाप्त हो जाती है अपने पराये के बीच की खाई समाप्त हो जाती है। किसी कवि ने ठीक ही कहा है

परहित सरिस धर्म नहीं भाई

परपीड़ा सम नहीं अधमाई

अर्थात दूसरों की भलाई के जैसा कोई धर्म नहीं और दूसरों को कष्ट पहुंचाने जैसा कोई पाप नहीं।

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