कुर्सी की राजनीति में उलझी पत्रकारिता का हुआ चीरहरण


कौरवों की राजसभा में द्रौपदी को उसकी इच्छा के विरूद्घ लाया गया था जबकि वह रजस्वला थी और उसे परपुरूष द्वारा हाथ लगाना ही अपने आप में महापाप था, लेकिन भरी सभा मे उसे केश पकडक़र लाया गया और उसके चीरहरण की कोशिश की गयी। ऐसा ही होशंगाबाद जिला मुख्यायलय की पत्रकारिता के साथ हो रहा है? विधायिका का चौथा स्तम्भ कहलाने वाला यही पत्रकार यहॉ होशंगाबाद में अपने दायित्व से हटकर कुर्सी की राजनीति में उलझकर रह गया है और पत्रकारिता का स्वयं बुरी तरह चीरहरण करने पर तुला है। प्रतिदिन अखवारों से पाठक घर बैठे जिन घटनाओं, सनसनीखेज खबरों, घोटालों, आयोजनों, कार्यक्रमों सूचनाओं और जानकारी को समाचारों के रूप में ताजातरीन पाता है वह बहुत कम सोच पाता होगा कि इन सच्चाईयों तक कैसे पहुॅचा जा सकता है। देखा जाये तो वास्तविक रूप से अखबार समाज के मुॅह की वह जीभ है, जो बत्तीस दॉतों की क्रूरताओं को चकमा देकर सच को सबके सामने उगागर कर देती है। लेकिन अब यहीं बातें यहॉ पत्रकारिता क्षैत्र में अदूरदर्शिता के कारण कुर्सी की आपसकी खींचतान के कारण विकास, स्वतंत्र एवं निष्पक्षता से कोसों दूर स्वार्थलिप्सा का आहार बन चुकी हैँ। यहॉ अब पत्रकारिता के दायित्व में साफ सुथरा और संतुलित परिपेक्ष्य गायब है और विशुद्घ रूप से यहॉ कलमकार लॅगड़ी,जनहित की दुश्मन, वैशाखियों का दामन थामे दिशाहीन राजनीति का दामन थामे चल रहा है।
जिला मुख्यालय होशंगाबाद मेें वर्ष 1999 के फरवरी माह में जिला प्रेस क्लब का गठन पत्रकारिता जगत के स्थापित और न्यूनतम आदर्शो के क्षितित को पाने वाले पत्रकारों के हितों की सुरक्षा एवं उन्हें संरक्षण देने के लिये किया गया था आज वहीं दो फाड़ हो गया है। इस संगठन के गठन,पंजीयन से लगायत अब तक कोई ऐसी ठोस रणनीति को अंजाम नहीं दिया गया जिससे कहा जा सकता हो कि जिला मुख्यालय के प्रेस जगत, आंचलिक या क्षैत्रीय पत्रकारों के हित में कोई ठोस निर्णय लिया जाकर उन्हें उसका लाभ प्रदान किया गया हो? जिले की तहसीलों में भी प्रेस क्लब है जो निरन्तर अपने सदस्यों को संरक्षण,सुविधा व जिला प्रशासन,शासन की ज्यादतियों के शिकार होने अथवा राजनीति के चंगुल में फॅसाये जाने पर अपने सदस्यों व पत्रकारों को एक सूत्र में बॉधे चलकर फलफूल रहे हैं और उनकी वृहद उपलब्धियॉ जो ऑकड़ों में आती है किन्तु इसके विपरीत होशंगाबाद में एड़ी-चोटी का बल लगाने के बाद प्रेस क्लब को जो प्रशासकीय स्तर पर कार्यालय उपलब्ध कराया गया उसकी देखरेख तक करने में यहॉ अक्षमता दिखी फिर जिले के प्रबुद्घ साहित्यकारों, इतिहास रचने वाले नगर के पत्रकारों, स्वतंत्रतासंग्राम सेनानियों व अन्य विधायों के मूर्तिमानों को स्मरण कर उनकी स्मृति में मील का पत्थर साबित किये जाने वाला कोई भी सराहनीय कार्य इनकी झोली मं नहीं है सिर्फ है तो आपस मेें एक दूसरे की छींटाकशी करने, एक दूसरे को नीचा दिखाने, एक दूसरे के सम्मान को ठेस पहुॅचाने की दक्षता जरूर है जो अब राजनीतिक रूप लेकर कुर्सी की खींचातान में न्यायालय की शरण में पहुॅची है।
पक्षपातों और पूर्वाग्रह की शिकार यहॉ की पत्रकारिता का अस्तित्व संकट में है और प्रेस संगठन में विवादास्पद बनी कुर्सी की खींचतान घातक हो गयी है। पत्रकारिता को चारागाह बनाने वाले छद्म पत्रकारों ने दूषित तत्वों को स्वीकार किया है और अपढ़,अयोग्य, अक्षम,कार्य-व्यवसाय में अवसरों का लाभ उठाने वाले लोगों की इस क्षैत्र में बाढ़ सी आयी है जो अच्छा-बुरा में भेद नहीं कर पाते है जबकि गुणात्मकता से जो इस क्षैत्र के स्तम्भ हैं उन्हें भुलाया जा चुका है अथवा उनके विरूद्घ षडय़ंत्रों के जाल बुने जाकर उन्हें शिकार बनाया गया है। इस जहरीली गलत परम्परा से पत्रकारिता शैया पर तीरों से भिदें भीष्म के समान कराह रही है। प्रेस संगठन का विवाद न्यायालय पहुॅचना अच्छे संकेत नहीं कहे जा सकते हैï? वास्तविक रूप से संगठन के पद का यह द्वन्द राजनीति व प्रशासनिक महकमें में अपनी तूती बोलने, भ्रष्टचार के उजागर हुये प्रकरणों में निपटारा कर कुबेर बनने की दौड़ का हिस्सा माना जा रहा है पर किसी को भी पत्रकारिता के चीरहरण की चिंता नहीं है । तभी एक ही नाम से दो पृथक संगठनों में भ्रम,विवाद की स्थिति निर्मित की जाना इन प्रेस क्लब के संगठनकर्ताओं के गिरते प्रभाव व संगठन प्रमुख द्वारा सबकी अनसुनी करने का भी एक हिस्सा है जिसकी आवश्यकता नहीं थी। यहॉ प्रेस क्लब के वास्तविक संगठन को अपने उद्देश्यों के तहत पत्रकारों के हित संरक्षण में जुटकर एक मिसाल कायम करना थी ताकि पत्रकारों को एक बैनरतले किया जाकर संगठन को एक नई वृहद ऊॅचाईया प्रदान कर अपनी शक्ति को प्रकट करना था। विभिन्न असली-नकली प्रेस संगठनों में नाजायज घुस आये कथित पत्रकारों पर भी अंकुश लगाये जाने की आवश्यकता थी जो आधी-अधूरी रह गयी हैँ।म्हें अंतहीन घेरे में रखने वाला कौन है।

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