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    भगवान चित्रगुप्त महाराज को जोकर बताने पर भड़क रहा है कायस्थ समुदाय

    लिमटी खरे

    नमस्ते इंडिया नामक एक ब्रांड के द्वारा अपने विज्ञापन में कायस्थ समुदाय के भगवान चित्रगुप्त को जोकर की संज्ञा दिए जाने पर सर्वोच्च न्यायालय के एक अधिवक्ता के द्वारा नमस्ते इंडिया घी के निर्माता गुरूग्राम के एनआईएफ प्राईवेट लिमिटेड, रोहित सरफेक्टेंट्स प्राईवेट लिमिटेड, मुंबई के फुल सर्किल कम्यूनिकेशन्स, यू ट्यूब ग्रेविएंसेस सेल सहित सूचना प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा है। दरअसल, कंपनी के एक विज्ञापन में भगवान चित्रगुप्त को जोकर के नाम से संबोधित किए जाने पर कायस्थ समुदाय में रोष और असंतोष व्याप्त है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार के द्वारा उक्त नोटिस कंपनी सहित अन्य लोगों को जारी किया गया है। उन्होंने कहा है कि वे धर्म से हिंदू हैं और वे कायस्थ समुदाय से हैं। उन्होंने बताया कि उनके मन में उनके मन में हिन्दू देवी देवताओं के प्रति बहुत सम्मान और आस्था है वे भारत के संविधान के अनुरूप सभी धर्मों का बहुत सम्मान करते हैं एवं सभी से धर्म एवं धार्मिक भावनाओं में विश्वासों का सम्मान करने की अपेक्षा भी रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा हिंदु धर्म के भगवानों से प्रार्थना करते हुए उनके द्वारा लिखित अनेक भजन भी प्रकाशित किए हैं।

    उन्होंने बताया कि उनके द्वारा नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड जो कि भारतीय कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत एक कंपनी है जिसका दूध उत्पाद नमस्ते इंडिया के नाम से है के अलावा रोहित सर्फेक्टेंट्स प्राईवेट लिमिटेड जो नमस्ते इंडिया कंपनी के दूध के उत्पादन की मार्केटिंग कर रही है, फुल सर्कल कम्यूनिकेशन्स जो एक विज्ञापन एजेंसी है और नमस्ते इंडिया के दुग्ध उत्पादों का विज्ञापन कर रही है के अलावा यू ट्यूब जो एक इंटरनेट प्लेटफार्म है जिसमें नमस्ते इंडिया कंपनी का दुग्ध विज्ञापन जारी किया गया है सहित भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय को राष्ट्रीय टेलीविजन पर आपत्तिजनक सामग्री दिखाने के लिए नोटिस जारी किया है।

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के नमस्ते इंडिया देशी घी के एक विज्ञापन का उल्लेख करते हुए बताया कि इस विज्ञापन में कंपनी के द्वारा यमराज जो मृत्यु के देवता हैं, के किरदार को चित्रित किया गया है, हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यमराज ही मनुष्य के देह त्यागने के बाद उनकीक आत्मा को वापस यमलोक में ले जाते हैं, और भगवान चित्रगुप्त के निर्णयों के अनुसार ही मनुष्य के कर्मों के आधार पर आत्मा के भाग्य का फैसला किया जाता है।

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने कहा कि इस विज्ञापन में मिष्ठान, पकवान आदि को प्रस्तुत करने पर जो भी दृष्टांत का उपयोग किया गया है वह बहुत ही आपत्तिजनक माना जा सकता है क्योंकि इसमें इस कंपनी के देशी घी के पकवानों के स्वाद से प्रसन्न होकर यमराज के द्वारा एक महिला को अपने साथ नहीं ले जाया जाता है। इस तरह किसी भी धार्मिक मान्यताओं का माखौल उड़ाने का अधिकारी इस कंपनी को कैसे मिल गया!

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने आगे कहा कि इस आपत्तिजनक विज्ञापन में भगवान चित्रगुप्त के किरदार को भी न केवल चित्रित किया गया है वरन उनका नाम भी लिया गया है। देखा जाए तो भगवान चित्रगुप्त इस ब्रम्हाण्ड पर एक देवता हैं और उन्हीं से कायस्थ समुदाय का उदय हुआ है। भगवान चित्रगुप्त न्याय के देवता हैं एवं वे भगवान ब्रम्हा के शरीर से निकले हुए हैं, भगवान ब्रम्हा के द्वारा न्याय करने एवं मनुष्य को उनके कर्म के आधार पर उनकी आत्मा के भाग्य का फैसला करने के लिए भगवान चित्रगुप्त को निर्देशित किया गया है।

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने कहा कि यहां यह उल्लेख करना उचित है कि उनके सहित सभी हिंदू अपने पूज्य भगवान का बहुत सम्मान करते हैं, जो सर्वशक्तिमान, अचूक, पवित्र और मनुष्यों के सभी दोषों से ऊपर हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड सर्वशक्तिमान ईश्वर की दया पर है और सर्वशक्तिमान ईश्वर की इच्छा के बिना एक रत्ती भर भी कार्य संभव नहीं है। ईश्वर की कभी भी तुलना नहीं की जा सकती है और न ही मनुष्य के बराबर होना, लालच सहित दोषों को आकर्षित करना और कोई भी शब्द जो ईश्वर के चरित्र को नीचा और बदनाम कर सकता है, उसे दुनिया में किसी के द्वारा उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने आगे कहा कि नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के द्वारा यह विज्ञापन दिखाया जा रहा है जो हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को नीचा दिखाने और उनका अपमान करने का प्रयास माना जा सकता है। इस विज्ञापन में शायद यह साबित करने का प्रयास किया गया है कि सर्वशक्तिमान ईश्वर में मनुष्य जैसे दोष हैं और नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के उत्पादों के प्रलोभन का शिकार वे हो रहे हैं। इस विज्ञापन से तो यही लग रहा है कि भगवान को भी रिश्वत दी जा सकती है और आयु लंबी की जा सकती है, क्योंकि एक वृद्धा के द्वारा मृत्यु के देवता यमराज के साथ यही करते हुए दिखाया जा रहा है। इस विज्ञापन से यह भी प्रतीत हो रहा है कि नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के उत्पादों को पाने और चखने के लिए ईश्वरीय कार्य भी छोड़े जा सकते हैं, न्याय करने से चूक सकते हैं!

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने आगे कहा कि नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के उत्पाद के विज्ञापन में भगवान चित्रगुप्त को जोकर की संज्ञा दी जा रही है, उन्हें जोकर कहकर संबोधित किया जा रहा है, क्या यह उचित है! सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने आगे कहा कि नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा लाभ कमाने के लिए शरारत भरा काम कर रहे हैं और आपको यह अख्तियार किसने दिया कि आप एक सर्वशक्तिमान ईश्वर को चित्रित करने की धृष्टता कर सकें यहां तक कि भगवान को जोकर कहकर संबोधित किया जाए!

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने आगे कहा कि नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कंपनी चूंकि अमूल और मदर इंडिया जैसी नामी गिरामी कंपनीज के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं है इसलिए इस कंपनी और इस तरह की कंपनीज के द्वारा हिन्दूओं की सहिष्णुता का अनुचित लाभ उठाकर भगवान को अपमानित करने का कुत्सित प्रयास भी करते हैं। नमस्ते इंडिया प्राईवेट लिमिटेड अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लोगों की भावनाओं से खिलावाड़ करने की चाल चलने का कुत्सित प्रयास कर रही है।

    सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता सुमित कुमार ने कहा कि भारत सरकार के जिम्मेदार विभागों को चाहिए कि इस तरह से धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक मंच से हटाने की कार्यवाही करना चाहिए और भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए भी ठोक कदम उठाए जाने चाहिए।

    लिमटी खरे
    लिमटी खरेhttps://limtykhare.blogspot.com
    हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

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