अपने प्यार का कुछ भरम तो रहने दो

अपने प्यार का, कुछ भरम तो रहने दो |
अपने अहसानों का कुछ बोझ तो रहने दो ||

भले ही प्यार न करो,सितम्ब तो रहने दो |
अभी तो शुरुआत थी,अब उसको रहने दो ||

छीनो न सभी चीजे,कुछ मेरे पास रहने दो |
उन्हें मेरे मरने जीने का   सहारा रहने दो ||

नफरत करने की भी कुछ एक हद होती है |
उस हद को न पार करो,कुछ भरम रहने दो ||

आँखों में तुम्हे बसाया था,उसे आंखो में रहने दो |
आँसू जब आये उनको बस आँखों में ही रहने दो ||

रस्तोगी को पता लग गया,उसका धरम क्या है |
लिखना तो मेरा धर्म है उस करम को रहने दो ||

आर के रस्तोगी 
गुरुग्राम 9971006425

Leave a Reply

%d bloggers like this: