लेखक परिचय

ब्रजेश कुमार झा

ब्रजेश कुमार झा

गंगा के तट से यमुना के किनारे आना हुआ, यानी भागलपुर से दिल्ली। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज से पढ़ाई-वढ़ाई हुई। कैंपस के माहौल में ही दिन बीता। अब खबरनवीशी की दुनिया ही अपनी दुनिया है।

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ravindra-nath-tagoreबीसवीं सदी के प्रारंभ में नोबल पुरस्कार से सम्मानित विश्व विख्यात बांग्ला भाषी कवि रवींद्रनाथ ठाकुर का लिखा एक खत बांग्लादेश के बज्र देहाद में मिला है। ठाकुर के निधन के ठीक 66 वर्षों बाद मिला यह पत्र उनसे जुड़ी एक अमूल्य निशानी है।

पूरे छह पन्नों का यह पत्र बांग्लादेश के नवगांव जिले के पातीसार गांव से प्राप्त हुआ है। सिराजगंज जिले में रवींद्रनाथ कच्चरीबारी संग्रहालय की कर्ताधर्ता ने इस बाबत जानकारी दी है। जानकारी के मुताबिक पत्र में पश्चिम बंगाल के बोलापुर के किसी व्यक्ति का पता दर्ज है। पत्र में खास बात यह है कि इसमें ठाकुर की जन्मतिथि छह मई, 1861 बताई गई है। एक स्थानीय समाचार पत्र डेली स्टारके मुताबिक पत्र पर भद्र 28, बंगाली वर्ष 1317 की तारीख दर्ज है।बांग्लादेश पुरातत्व विभाग का मानना है कि ठाकुर द्वारा लिखे गए किसी पत्र की पांडुलिपि देश के किसी भी संग्रहालय में नहीं है।

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