ज़़िंदगी पहले इतनी सिमटी न थी

ज़िंदगी पहले कभी इतनी
सिमटी न थी।
जिंदगी पहले कभी इतनी
डरी डरी न थी।
जिंदगी पहले इतनी
अकेेेली भी न थी।
अब कोई किसी के घर
आता जाता नही,
अब किसी को कोई
बुलाता नहीं……
एक फोन में सारे रिश्ते
समाहित हो गयेे।
स्पर्श के सुख से
सभी वंचित गये हो
बहुत दिनों बाद
कोई मिले तो
गले लगा सकते नहीं
दुख में रोने को
कोई काँधा
नहीं मिलता है अब
ख़ुशी के ज़माने तो
अब आते ही नही।
ये कौन सा मंजर है
मेरे भगवन!
जहाँ से
दुख दर्द जाते ही नहीं
कहते हैं वक़्त ही तो है
गुज़र जायेगा…
इस वक़्त के गुज़रने के
आसार कहीं नज़र आते नहीं!

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