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    मजबूर

    कोई भी इंसान
    जब मजबूर होता है
    खुद से वह
    बहुत दूर होता है

    जानकर भी राज़ सारे
    दिखता है अनजान
    बनकर रह जाता है
    हालातों का ग़ुलाम

    ऐसा भी होता है
    चाहता है जब सारा ज़माना
    अपनों के लिए
    तब इंसान होता है बेगाना

    कोई भी इंसान
    जब हो जाता है लाचार
    समझ से परे
    होता है उसका व्यवहार

    आलोक कौशिक
    शिक्षा- स्नातकोत्तर (अंग्रेजी साहित्य) पेशा- पत्रकारिता एवं स्वतंत्र लेखन सम्पर्क सं.- 8292043472

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