मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र जी की जय

आज मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द्र जी का जन्म दिवस है। पूरे भारत में यह मनाया जा रहा है। पौराणिक अपनी तरह से उपवास रखकर तथा अपनी विधि से पूजा करके इस दिवस को मना रहे हैं। आर्यसमाज के अनुयायी मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बाल्मीकी रामायण वर्णित चरित्र को स्मरण कर, उसका पाठ कर, उन के जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों पर विद्वानों के प्रवचन सुनकर तथा अपने घर पर यज्ञ अग्निहोत्र आदि करके इस पर्व को मनाते हैं।

श्री राम ने धर्म व मर्यादाओं का अपने उज्जवल जीवन चरित में जो उदाहरण प्रस्तुत किया है वह हमारा व सारी मानवजाति का आदर्श है। संसार के सभी लोगों व विधर्मियों को भी उनको महापुरुष स्वीकार करना चाहिये व उनके आदर्शों पर चलना चाहिये। उनके आदर्शों को अपनाकर व उन्हें अपने जीवन में आचरण में लाकर ही हम अपना जीवन सफल कर सकते हैं।

श्री राम चन्द्र जी वेदों के विद्वान व अनुयायी थे। वह आर्य थे। माता सीता उन्हें आर्यपुत्र कहकर सम्बोधित करती थी। वह आर्य सन्तान व आर्य मनीषी थे। उनका जीवन वेदमय एवं देश हित के कार्यों से भरा हुआ है। उन्होंने जीवन में कभी किसी के प्रति अन्याय व अत्याचार नहीं किया और न ही अत्याचारों को सहन किया।

सीमित साधनों व शक्ति के होने पर भी वह लंकापति रावण के अन्याय के विरुद्ध लड़े। इसके लिये उन्हें वन में सेना एकत्रित करनी पड़ी। उन्हें प्रशिक्षण दिया और समुद्र पर पुल बना कर वह अपने बन्धुओं एवं सेना के साथ लंका पहुंचे थे। रावण को धर्म का पालन करने का परामर्श दिया था और उसे न मानने पर उससे युद्ध किया और विजयी हुए। सीता माता को रावण की कैद से छुड़ाया था। राम की विजय अधर्म पर धर्म की विजय थी।

श्री राम चन्द्र जी ने रावण के धर्मात्मा भाई विभीषण को लंका का राजा बनाया था। यह उनका एक बहुत बड़ा त्याग व महान कार्य था जिसमें एक महत्वपूर्ण राजनैतिक सन्देश छुपा है। सभी राजा वेदभक्त व वेदानुकूल धार्मिक होने चाहियें। पिता की आज्ञा पालन करने के लिये उन्होंने जिस त्याग का परिचय दिया वह विश्व के इतिहास में अन्यतम है। राम का हम सबको प्रातः स्मरण करना चाहिये। बाल्मीकी रामायण का नित्य पाठ किया जाना चाहिये और ऐसा करते हुए रामचन्द्र जी के गुणों को अपने भीतर प्रविष्ट करना चाहिये। इसी से हमारा, हमारे समाज का तथा देश का कल्याण होगा।

               आजकल दूरदर्शन टीवी पर रामभक्त श्री रामानन्द सागर जी के रामायण टीवी सीरियल का प्रसारण हो रहा है। यद्यपि यह पौराणिक सीरियल है परन्तु इसमें बाल्मीकी रामायण के भी पर्याप्त अंश है। बहुत से दृश्य व संवाद बहुत अच्छी तरह से दिखायें जा रहे हैं। इन्हें देख हमें अपनी प्राचीन धर्म व संस्कृति पर गौरव होता है। आज देश का जो वातावरण है उसमें हम इतने भर से ही हम सन्तुष्ट हैं। स्व. श्री रामानन्द सागर जी ने यह काम भी अच्छा किया है।

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