मेहनत और भीख में फर्क नहीं समझते राहुल गांधी

प्रो. कुलदीप चन्द अग्निहोत्री 

राहुल गांधी आजकल उत्तर प्रदेश की मार पर हैं। कई दशकों से उत्तर प्रदेश के विशाल क्षेत्रों में मुलायम सिंह, कल्याण सिंह और मायावती इत्यादि घूम रहे हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी को शायद इस बात का इल्म हो या ना हो कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता है। वैसे तो दिल्ली पर कब्जे के और भी रास्ते हैं, और उन्हीं में से एक रास्ते से होकर सोनिया कांग्रेस ने दिल्ली की गद्दी संभाली हुई है। परंतु सोनिया गांधी जानती है कि इस प्रकार की रास्तों में फूल कम और कांटे ज्यादा हैं। कभी जाते-जाते एक कांटा ममता बनर्जी चुभो देती हैं। मायावती कांटा चुभोती कम हैं लेकिन उसे दिखाती ही इस तरीके से है कि उसका दर्द चुभने से भी ज्यादा होता है। इसे सोनिया कांगे’स का दुर्भाग्य कहिए या सौभाग्य कि उसके दरबार में जो दरबारी इकट्ठे हुए हैं उनकी परंपरा खुद शिकार मारकर खाने की नहीं है बल्कि दूसरे के मारे हुए शिकार पर रात्रि भोज उड़ाने की रही है। ऐसा नहीं कि इन दरबारियों में खुद शिकार मारने की इच्छा नहीं है। परंतु दुर्भाग्य से उनमें ऐसा करने की योग्यता नहीं है। परंतु जब एक बार रात्रि भोज की आदत पड़ जाए तो कम्‍बख्‍त छूटती भी तो नहीं। इसलिए शायद सभी दरबारियों ने मिलकर सोनिया गांधी की अनुमति से छोटे शावक राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के मैदान में शिकार के लिए उतारा है।

सभी जानते हैं कि जब राजवंश के लोग शिकार पर निकलते हैं तो दरबारी इस बात की पूरी व्यवस्था कर लेते हैं कि राजकुमार के पास कोई पर न मार सके। शिकार को भी हांका लगाकर निकाला और घेरा जाता है, राजकुमार को केवल गोली चलानी होती है। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के फूलपुर में भी ऐसी ही शिकार की सोनिया कांग्रेस शैली का प्रदर्शन हुआ। राहुल गांधी को ज्ञापन देने के लिए कुछ युवा काले झंडे लेकर खड़े थे। बस उनका यह गुनाह उनके लिए काल बन गया। वे शिकार करने निकले राजकुमार के सामने खड़े होने की गुस्ताखी कर रहे थे। पुराना जमाना होता तो उनका गुनाह गोली मारने के काबिल था। लेकिन दरबारियों के दुर्भाग्य से न पुराना ताम-झाम रहा और न ही सलीका। उपर से बुध्दु-बक्से की दिन-रात निगरानी। इसलिए काले झंडे लिए हुए युवाओं को गोली तो नहीं मारी जा सकती थी लेकिन दंड देना जरूरी था। वैसे तो कानून के अनुसार दंड देने का अधिकार कोर्ट-कचहरी को है। परंतु कानून तो आम लोगों के लिए होता है। राजवंश कानून से उपर होता है। अपराधी को पकड़ने का अधिकार भी पुलिस को है। परंतु दरबारी जानते हैं कि पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। पुरानी कथाएं तो हैं ही। राजा ने किसी व्यक्ति का सर कलम कर देने का आदेश दिया और सैनिक उसे जंगल में छोड़ आए। कहीं न कहीं मानवता तब भी बची हुई थी और आज के युग में भी इस बात का कोई भरोसा नहीं कि ऐसी मानवता को ढोने वाले लोग खत्म ही हो गए हों। इसलिए उस युवक को पीटने और मार-मारकर बेदम कर देने की जिम्मेदारी सोनिया कांग्रेस की तरफ से भारत सरकार में मंत्री सुख भोग रहे कुछ दरबारियों ने ही संभाल ली।

गुस्ताखों को दंड देकर युवराज राहुल गांधी का यह काफिला आगे बढ़ा और मंच रूपी मचान पर आसन जमाया। वहां से राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश के युवाओं को बुरी तरह लताड़ा और फटकार लगाई। दूध के टूटे दांतो का प्रदर्शन करते हुए युवराज दहाड़े कि उत्तर प्रदेश का युवा कब तक महाराष्ट्र और पंजाब में जाकर भीख मांगता रहेगा? वे बार-बार दहाड़ रहे थे और प्रश्न का उत्तर चाह रहे थे। लगता था वे उत्तर प्रदेश के युवा को शर्मसार कर रहे थे कि वह बाहर के प्रदेशों में जाकर भीख मांग रहा है। शायद युवराज पर अभी-अभी पिट चुके उस युवा कि हिमाकत का भी असर रहा हो। युवराज की इस दहाड़ पर हांका लगाकर शिकार घेरने वाले शिकारी तालियां बजा रहे थे और दांत निपोर रहे थे। लेकिन आगे बैठा उत्तर प’देश का युवा वर्ग सन्नाटे में था। उसकी ओर से कोई उत्तर नहीं आ रहा था। युवराज ने समझा और दरबारियों ने अच्छी तरह समझा दिया कि उत्तर प्रदेश में सफलता पूर्वक शिकार कर लिया गया है। सबूत की कोई जरूरत थी ही नहीं। युवा के पास जबाब नहीं था और जो जवाब देना चाहता था उसे पीट-पीटकर दरबारियों ने पहले ही अधमरा कर दिया था। हो सकता है कि उस पिट रहे युवक की तस्वीरों को युवराज ने शिकार की ट्राफी के तौर पर अपने ड्राइंग रूम में लटका लिया हो।

लेकिन युवराज शायद उत्तर प्रदेश की भाषा को अच्छी प्रकार से नहीं जानते। वे उत्तर प्रदेश के स्वभाव और प्रकृति से भी नावाकिफ हैं। उत्तर प्रदेश का युवा महाराष्ट्र और पंजाब में जाकर भीख नहीं मांगता बल्कि परिश्रम करता है। वह वहां जो कमाता है वह भीख नहीं होती बल्कि उसकी खून-पसीने की गाढ़ी कमाई होती है। मेहनत की इस रोटी में सुगंध होती है और आनंद होता है। सोनिया गांधी और राहूल गांधी शायद दोनों ही गुरू नानकदेव के जीवन की उस घटना को नहीं जानते जब उन्होंने एक धन्ना सेठ के घर हलवा-पूरी खाने से इनकार कर दिया और एक गरीब मजदूर के घर की सूखी रोटी भी आनंद से खाई थी। अंतर बताने के लिए गुरू नानकदेव ने धन्ना सेठ की हलवा पूरी एक हाथ में लेकर और गरीब मजदूर की सूखी रोटी दूसरे हाथ में लेकर जब निचोड़ी तो हलवा पूरी से खून की धारा बह निकली और गरीब मजदूर की रोटी से दूध की धारा। राहुल गांधी शायद नहीं जानते कि उत्तर प्रदेश के जिन स्वाभिमानी युवकों पर वे भिखारी होने का लांछन लगा रहे हैं उनकी खून-पसीने की कमाई की रोटी से दूध की धारा निकलती है। यह परिश्रम हीं जीवन का संच्चा आनंद है। लेकिन राहुल गांधी के लिए यह समझना और इसको भीतर से अनुभव करना आसान नहीं है क्योंकि जिनकी संगत में वे उत्तर प्रदेश का शिकार करने निकले हैं उनमें उन्हीं लोगों की शमूलियत है जिनके घर गुरू नानकदेव जी ने अन्न ग’हण करने से इनकार कर दिया था। शायद बहुत ज्यादा समय नहीं बिता है जब राहुल गांधी के ही एक दूसरे मित्र केरल के शशि थरूर सगर्व यह घोषणा कर रहे थे कि जहाज में साधारण क्लास सफर करने वाले तो पशु के समान होते हैं। जिस जुंडली को जहाज की साधारण क्लास में बैठा आदमी भी पशु दिखाई देता है उनके लिए महाराष्ट्र और पंजाब में खेत में हल चला रहा, टेक्सी चला रहा, दूध बेच रहा और रिक्शा चला रहा उत्तर प्रदेश का युवा तो भिखारी ही दिखाई देगा। राहुल गांधी यह नहीं जानते कि परिश्रम करने वाला भिखारी नहीं होता, न ही वह लाचार होता है और न ही अपराधी। असली अपराधी तो वह है जो बिना रिक्शा चलाए, बिना खेत में हल जोते सोनिया कांग्रेस के मंत्रिमंडल में बैठकर लाखों और अरबों रुपये के घोटाले कर रहे हैं और इन्हीं रिक्शा चलाने वालों और खेत में हल चलाने वालों के परिश्रम पर ऐश कर रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश के मंचों पर मचान सजा रहे हैं। राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में शिकार तो नहीं सके अलबत्ता उन्होंने उनके गुस्से और स्वाभिमान को अवश्य जगा दिया है, जिनका वे दिल्ली से शिकार करने गए थे। वैसे चलते-चलते युवराज से एक प्रश्न पूछा जा सकता है कि इधर भारत में इटली से जो लोग आ रहे हैं वे भिखारी बन कर आ रहे हैं या फिर कुछ और। मसलन इटली से आने वाले क्वात्रोचि और उनके मित्र। इसका उत्तर न युवराज के पास होगा और न ही उनके दरबारियों के पास।

9 thoughts on “मेहनत और भीख में फर्क नहीं समझते राहुल गांधी

  1. भारत की सबसे बड़ी लूट कर रही इस आधुनिक लार्ड क्लाईव जुन्दाली ( लेडी क्लाईव ) को एक ही करारा जवाब दिया जा सकता है. जिस सत्ता के दम पर ये देश को शरेआम लूट रहे हैं वह सत्ता इनसे छीन ली जाय. वरना करोड़ों को भूखे मरने पर ये मजबूर कर देंगे. प्रमाण के लिए पिछले केवन डेढ़ साल के हालत को देख लो. यूँही चला तो चुनाव आने तक तो कई करोड़ भूख से बिलबिला रहे होंगे. बस हर चुनाव में इन्हें धुल चटाते रहना होगा. वरना अगले पांच साल में तो ये भारत के अस्तित्व को मिटा डालेंगे.

  2. राहुल के पिता ने ही एंडरसन से भीख मांगकर भोपाल गैस काण्ड के इस मुजरीम को सुरक्षित देश के बाहर किया था. आज भी भोपाल के पीडितो को इन्साफ नहीं मिला है.

    राहुल की माँ सोनिया ने भारत की जनता के अरबो डालर स्विस बैंको में दबा रखे हैं. और उसकी सरकार ये कालाधन वापस लाने के लिए आना-कानी कर रही है.

    राहुल की दादी इंदिरा ने ग्वालियर और आमेर से ट्रको में भरकर सोना लूटा था.

    राहुल के परनाना नेहरू ने देश की सत्ता मिलते ही जीप घोटाला किया था.

    राहुल का जीजा राबर्ट वडेरा ने भी कई कारनामे करके देश को चुना लगाया है.

    राहुल के मामा क्वाचोत्री ने बोफोर्स में अरबो कमाए और भारत की जनता को चुना लगाने वाले उसके मामा को माँ सोनिया ने सीबीआई पे दबाव डालकर छुड़वा दिया.

    जबकि आम उत्तरभारतीय और बिहारी जहां भी जाता है मेहनत से कमाता है.

    सोचने की बात है कि राहुल का खानदान भिखारी है या मेहनतकश उत्तरभारतीय और बिहारी प्रजा ??

  3. म्हणत और भीख में फर्क तब समझ आयेगा जब कांग्रेस एलेक्तोइन में भीख का कटोरा लेकर उ.प. में दर दर जाएगी और कोइ उसको वोटों की भीख भी नहीं देगा. संपादक पब्लिक ऑब्ज़र्वर नजीबाबाद

  4. बहुत खूब …..चाचा कत्रोची मेहमान ही नहीं घर के भेदी भी थे इसी लिए ..बचाए भी गए और खिसकाए भी ..वे भीख मांगने नहीं माल लूटने आए थे ..लूटने- लुटाने का खेल बदस्तूर जारी है. ..उतिष्ठकौन्तेय

  5. सारे गाँधी परिवार का चुनाव क्षेत्र UP ही रहा है … पिछले ६० सालो में १० प्रधानमंत्री UP से ही रहे है जिसमे से ६ या ७ कांग्रेस के थे , ६० सालो में से ४० साल UP , बिहार के मंत्री ही रेल मंत्री रहे है , UP से ही देश की दो बड़ी नदिया बहती है , सबसे ज्यादा प्राकतिक अयस्क इन्ही राज्यों से है … सबसे ज्यादा IAS IPS और IIT वाले इन्ही राज्यों से है फिर भी यहाँ के लोग बहार जाने को मजबूर है ?????

  6. मेहनत व भीख का अंतर उस को समझ आ सकता है जिसने जिंदगी में कभी मेहनत की हो. जिस को हर चीज बिना कुछ करे प्लेट में रखकर मिली हो उसे मेहनत का एहसास क्या होगा? देश की राजनीती में अपना स्थान बनाने का काम भी जिसको किसी त्याग तपस्या या मेहनत के कारन नहीं बल्कि एक परिवार विशेष में पैदा होने के कारन मिला हो उसे क्या पता की देश की आम जनता पर उनकी सर्कार की जनविरोधी शोषक नीतियों के कारन क्या क्या कठिनाईयां टूट रही हैं. आम आदमी के नाम का सहारा लेकर दुनिया भर के झूठे वादे करके लोगों को धोखा देकर सत्ता में आने वाले नेता किस प्रकार आम जनता का हक मारकर विदेशी बेंकों में खरबों डालर जमा करके ऐयाशियाँ करते हैं ये उस क्लास का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्हें लम्बी चौड़ी बकवास करके लोगों को बरगलाना ही है फिर चाहे इसके लिए ऐसी भाषा का ही प्रयोग क्यों न किया जाये जो लोगों का व्यापक रूप से अपमान करने वाली है.ऐसे लोग किस आधार पर देश की बागडोर सँभालने का ख्वाब संजो रहे हैं?अच्छा हुआ की पहली ही रेली में राहुल बाबा ने अपने उदगार प्रगट करके लोगों का भ्रम दूर कर दिया और अपना अनाड़ीपन जाहिर कर दिया. भगवन देश को इन जैसे बिगड़े हुए शेह्जादों से बचाए.

  7. दोस्तों ….इतिहास में गहराई से खोजने पर पता चलता है कि बहुत दीर्घकाल तक निष्कंटक रूप से सुख-समृध्दिपूर्ण जीवन का उपभोग करते-करते हम लोग क्रमशः आलसी,ईष्यालु तथा स्वार्थी बन गये। हमारी एकता नष्ट हो गई। छोटे-छोटे राज्यों में देश को बाँटकर, आपसी कलह में मग्न हो गए। जहां आपस में संघर्ष होने लगते हैं, वह समाज टिक नहीं पाता।

    इसलिए अपने विद्वान् पूर्वजों ने चेतावनी दी है कि जिस प्रकार जंगल में हवा के प्रकोप से एक ही वृक्ष की शाखाएँ आपस में रगड़ कर अग्नि पैदा करती हैं और उसमें वह वृक्ष और उसके साथ सम्पूर्ण बन भस्मसात् हो जाता है, उसी प्रकार समाज भी आपसी द्वेषाग्नि, कलहाग्नि से नष्ट हो जाता है। जहाँ आपसी कलह है, वहाँ शक्ति का क्षय अवश्यंभावी है।
    हम आपस में टकराकर एक दुसरे के जीवन और घर जला दे रहे ..इसका फायदा सरकारी भ्रष्टाचारी…और गैर सरकारी एन.जी.ओ .भ्रष्टाचारी उठाकर ऐस कर रहे है क्या हमारे देश में १०००० इमानदार नहीं है …..

  8. सत्य वचन अग्निहोत्री जी. राहुल गाँधी राग दरबारी सुनने में सब कुछ भूल गए.

  9. इस वेव्कुफ़ को काग्रेस प्रधान मंत्री बनाना चाहती है यह तो उसकी लुटिया डुबो देगा लेखक ने ठीक टिपण्णी की है
    बिपिन

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