मोदी : समन्वय की विराट चेष्टा

योगेश मिश्रशोधार्थी, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र

आखिर क्यों हम नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं? आइये आज हम मोदी सरकार के उन विचारों, उन प्रयासों, उन निर्णयों से अवगत कराते हैं, जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि 2019 में भी नरेंद्र मोदी से बेहतर विकल्प विपक्ष के पास उपलब्ध नही।

आज का युग बेहतर की मांग करता है, इसलिए देश के नेतृत्व को भी बेहतरीन व्यक्तित्व की जरूरत है। नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व समन्वय की विराट चेष्टा का परिचायक है। यह उनके विचारों तथा निर्णयों से साबित होता है। 26 मई 2014 को प्रभाव में आयी मोदी सरकार ने कई ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिसके चलते विश्व पटल पर भारत की छवि में सुधार अंकित किया गया। विश्व में भारत का वर्चस्व बढ़ाने में मौजूदा मोदी सरकार ने कोई कोर कसर न छोड़ी, जिनका परिणाम यह कि भारत विश्व की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में सामने आया। यह सरकार के बेहतरीन प्रयासों का परिणाम था। साथ ही अन्य कई ऐसे कदम उठाये गए, जिसका भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण योग साबित हुआ। सरकार द्वारा नोटबन्दी का फैसला कई मायने में महत्वपूर्ण कहा जा सकता है। यद्यपि यह अलग प्रश्न है कि अपेक्षित सफलता नही हासिल की जा सकी। बदले में आम लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन यह भी याद रखना चाहिए कि किसी मिशन को हाशिल करने में कुछ कुर्बानियां तो देनी ही पड़ती हैं। कालेधन को सफेद करने में हम भारतीयों को थोड़ा सा कष्ट उठाना पड़ा तो कोई खास बात नही, बल्कि मौजूदा सरकार की निर्णय क्षमता को सराहना चाहिए। सरकार ने बिना किसी भय के यह कदम उठाया। उसने इस बात का ध्यान नहीं दिया की आगामी चुनाव पर इसका क्या असर होगा। यदि गौर करे तो शायद ही कोई मिले, जिसके पुराने नोट बदले न जा सके हो। अतएव नोटबन्दी का चुनाव पर कोई नकारात्मक परिणाम नही दिखेगा, अपितु यह सरकार के आत्मविश्वास का परिचायक साबित होगा।

सन 2014 में पूर्णबहुमत के  साथ बनी मोदी सरकार में हर वर्ग, हर धर्म के मतदाताओं ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इस बात को सरकार ने पूरी अहमियत दी। जैसा कि बीजेपी पर सदैव हिंदुत्ववादी पार्टी या सवर्णों की सरकार होने का आरोप लगाया जाता रहा है, लेकिन अपने पूर्णबहुमत के बावजूद मोदी सरकार का प्रत्येक निर्णय संतुलन के तराजू पर खरा उतरा। निराशा उन लोगों के हाथ लगी जो उसको एकांगी दृष्टिकोण की पार्टी के रूप में देख रहे थे। मेरा आशय राममंदिर निर्माण की ओर है। जिन लोगों ने मोदी सरकार को मंदिर निर्माण की सरकार के रूप में देखा था, वे जरूर निराश हुए होंगे या जो लोग वर्ग विशेष की पार्टी के रूप में देखने की चेष्टा रखते थे, वे भी मौजूदा सरकार को असफल कहेंगे। लेकिन यदि हम व्यक्तिगत, वर्गगत या फिर धर्मगत स्वार्थों से ऊपर उठकर देखे तो पायेंगे कि अपना देश विविध भाषाओं, विविध धर्मों एवं विविध संस्कृतियों तथा विविध जातियों को आश्रय देता है। अतएव कोई सरकार यदि अपने को वर्ग विशेष के हित तक सीमित रखती है तो वह उसकी सफलता नही कही जा सकती है।

मोदी सरकार ने अपने प्रत्येक निर्णय में इस बात का ख्याल रखा कि हमारा देश विविधताओं का देश है। इसीलिए उनका नारा था- सबका साथ, सबका विकास। जहां तक प्रश्न राममंदिर का है तो इस मसले में सरकार ने कोई संकीर्णता नही दिखाई। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को मानने की बात कही। यह सरकार की दूरदर्शिता को दर्शाता है। यदि सरकार मन्दिर का पक्ष लेती तो मुस्लिम समुदाय की भावनायें आहत होती और यदि मस्जिद का पक्ष लेती तो हिंदू आक्रोशित होते। इसलिए सरकार ने इसमें दखलंदाजी नही करके दोनो ही धर्मो का समान रूप से आदर किया, जो सरकार की आदर्शवादिता को दर्शाता है।

आज का मतदाता इस बात को बखूबी समझने लगा है कि ऐसा व्यक्तित्व जो आत्मनिर्णय लेने में समर्थ है वही योग्य साबित हो सकता है, जो केवल पूर्वनियोजित रूपरेखा पर कार्य करता है, वह थोड़ा भी विचलित हुआ तो उसकी कार्य क्षमता शून्य हो जाएगी। हम बात करते हैं ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की। आज आप किसी भी शहर या रेलवे स्टेशन, पार्क या पब्लिक प्लेस को देखे तो इसका प्रभाव दिखेगा, जिसकी शुरुआत मोदी सरकार ने की थी। अतएव इसका श्रेय भी मौजूदा सरकार को जाता है। आमजन इस बात को समझता है। हाल ही में ‘दिव्य कुम्भ भव्य कुम्भ’ प्रयागराज उत्तर प्रदेश 2019 की बात करे तो एक विशाल जनसमूह के बावजूद स्वच्छता में किसी प्रकार की कमी नही नजर आयी। सफाई कर्मियों के इस कार्य से प्रभावित होकर बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके पद पखारे। विपक्षियों द्वारा इसे वोट के लिए किया गया नाटक बताया, लेकिन यदि हम इसे थोड़ी देर के लिए नाटक भी मान ले तो यह नाटक दुनिया का किसी प्रधानमंत्री के द्वारा खेला गया सर्वश्रेष्ठ नाटक होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा सफाई कर्मियों का गंगाजल से पद पखारना उनके हृदय की विशालता को दर्शाता है। केवट (सेवक) के द्वारा भगवान राम (राजा) का चरण पखारना तो प्रचलित था, लेकिन मोदी जी इस प्रतिमान को पलटकर राजा द्वारा सेवक के चरण को पखारा।

इस कार्य को कोई अवार्ड मिले या न मिले लेकिन भारतीय जनमानस में प्रधानमंत्री मोदी के इस काम ने कितनी गहरी पैठ बनाई होगी इसका अंदाजा लगाना चाहिए। बहुत सम्भव है कि ऐसे श्रेष्ठ व्यक्तिव को भारतीय जनमानस पुनः प्रधानमंत्री के पद पर स्थापित करने का हर सम्भव प्रयास करेगा।

राष्ट्रियता के प्रश्नों पर भी मोदी सरकार का रुख काबिले तारीफ है। पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा भारतीयों पर हमला कोई नई बात नही है, लेकिन यथावसर मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक करके ईंट का जबाव पत्थर से दिया। यह सरकार की दृढ़ निश्चय का परिणाम है। आज का मतदाता राष्ट्रियता के साथ समझौता नहीं कर सकता। पुलवामा हमले में शहीद जवानों के जिम्मेदार पाकिस्तानी आतंकी संगठन पर सर्जिकल स्ट्राइक करके सरकार ने आम जनमानस के आक्रोश को शांति प्रदान की। साथ ही अभिनंदन की सकुशल वापसी का श्रेय भी मोदी सरकार को जाता है। इसलिए भी मोदी दुबारा प्रधानमंत्री पद के योग्य कहे जा सकते हैं।

ये सभी घटनायें नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व को परिभाषित करने के लिए पर्याप्त है, जबकि विपक्ष के पास न तो कोई ऐसा व्यक्तित्व है, न ही कोई ठोस विचारधारा जो प्रतिस्पर्धा कर सके। सबसे बड़ी बात जो मोदी सरकार को बेहतर सरकार के रूप में स्थपित करती है वह है उसकी समन्वय की क्षमता। सरकार की सभी योजनाओं ने हर वर्ग, धर्म तथा संस्कृति के लोगो को समान रूप से लाभ पहुंचाया। वह सभी के हितों का सम्मान करने वाली साबित हुई। यही कारण है कि मोदी सरकार का देश के हर कोने में समान वर्चस्व दिखाई पड़ा।

जहाँ तक मेरा मानना है कि 2019 में प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक सम्भावनाये नरेंद्र मोदी के पास हैं।

साभार : https://www.academics4namo.com 


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