नये हिंदुस्थान की संकल्पना

आदिम कवि ने बड़ी बखानी भूमि यही सुजला सुफला,

हालत उस की आज देखकर व्यथित चित्त बनता शोला।

देख सपने वही सुजलता, वही सुफलता लाने के,

भागीरथी को प्रसन्न कर ले कष्टकुसुम अर्पित कर के,

स्फुर्तिदीप फिर घर घर में मन मन में आज जलाये हम।

हमारे आदिकवी ने हमारे हिंदुस्थान की भूमि को वर्णन सुजल-सुफल कहा है। सच में हमारी ये भूमि कैसी थी? जहाँ डाल-डाल पर पात पात पर सोने की चिड़ियाँ करती थी बसेरा “वो” भारत देश है मेरा| जहाँ चाणक्य जैसे महान अर्थज्ञ, कूटनीतिज्ञ है “वो” भारतदेश है मेरा| जहाँ नालंदा, तक्षशिला जैसे सबसे बड़े ज्ञानपीठ है “वो” भारत देश है मेरा| निसर्ग से लेकर हर किसी निर्जीव वस्तु का भी आदर करने वाला मेरा भारत देश है| 

गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषी से विभूषित मेरा देश है| जहाँ नज़र जाए वहां हरियाली दिखती है ऐसा मेरा देश था| ऐसे हरे-भरे और ज्ञानसंपन्न राष्ट्र में शांति से जीवन क्रमण हो रहा था| लेकिन सामर्थ्यशाली लोहे पे जैसे जंग चढ़ता है वैसे हमारे देश का हुआ| सामर्थ्यशाली मानसिकता, राष्ट्रभक्ति इन सब पे धूल जम गयी और लगातार परकीय आक्रमण हम पर होते रहे| धीरे धीरे हम करीब ९०० साल तक परकीय सत्ताओं के गुलाम बन गए| हमारा स्वत्व खो बैठे| पूरा देश जैसे सो रहा था| अंधश्रद्धा बढ़ गयी थी| सब लोग अपने अपने जीवन में व्यस्त थे| हम निस्तेज हो रहे थे| पर इस परिस्थिति को बदलने में कुछ वक्त लगा| कई ऐसे महापुरुषो ने हमें हमारे स्वत्व की, स्वाभिमान की याद दिलाई| कई ऐसे भारतमाता के सपूतों ने अपने माँ के लिए जान भी दे दी| और शुरू हुआ स्वतंत्रता संग्राम| आद्य क्रांतिकारक वासुदेव बलवंत फड़के से लेकर पुरे हिंदुस्थान के सब जगहों से कई वीर उठकर आए और अपनी अपनी क्षमता से उन्होंने अपने मातृभूमि के लिए कष्ट उठाए| किसी ने ब्रिटिशों को घबराया तो, किसी ने मार गिराया| किसी ने कहा की, स्वतंत्रता के लिए अपना खून नहीं बहाया तो मिले हुए स्वातंत्र्य की कीमत हमें नहीं रहेगी| तो किसी ने कहा की, अहिंसा से स्वातंत्र्यप्राप्ती होगी| किसी ने ब्रिटिशों के घर में घुसकर उन्हें सबक सिखाया, किसी ने राजबंदी होकर भी वहां कारागृह में राष्ट्रहित का काम किया| 

हिंदुस्थान की स्वतंत्रता के लिए जिन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया उनकी सूची बहुत बड़ी हो सकती है| पर इन सब लोगों का बलिदान व्यर्थ नहीं था| कुछ गलतियों की की वजह से हिंदुस्थान का बटवारा हुआ| लेकिन १९४७ में हमें स्वातंत्र्य मिला| पर जो मिला वो इतनी आसानी से नहीं मिला था ये हम भूले तो नहीं? ये सवाल आज हर एक हिंदुस्थानी ने अपने मन से करने की जरुरत है| इन ७० सालों में कुछ गलतियाँ हुई है| कई गलातियों से हमारे राष्ट्र को नुकसान पहुंचा है| पर ये वक्त अब उस गलतियों को दोहराने का नहीं रहा| उन गलतियों से सीखकर हमारे राष्ट्र के लिए कुछ कर दिखाने का वक्त अब आया है| फिर भी इन ७० सालों में कुछ अच्छे काम भी हुए है| और वो काम हम भूल नहीं सकते|

बहुत कोशिशों के बाद हमें स्वराज्य तो मिला पर क्या हम उसे सुराज्य बना पायें है? हम वो मिला हुआ स्वराज्य संभाल पायें है? आज ७० साल के बाद भी हमारा हिंदुस्थान विकसित नहीं पर विकासशील राष्ट्र कहा जाता है|आज ७० साल के बाद भी हमारा पूरा हिंदुस्थान साक्षर नहीं हो पाया है| पर सब जगह आशा की एक किरण तो होती ही है| वैसे ही ये पिछले ५ साल, मेरे जैसे इस युवा पीढ़ी के लिए मानो आशा के किरण है| जो सरकार सिर्फ़ राष्ट्रहित के लिए काम करती हो उस सरकार को हमारा सलाम| और इसी सरकार के काम देखकर मेरे संकल्पना में जो हिंदुस्थान है वो कई सालों में अब खड़ा हो सकेगा ये विश्वास मेरे मन में है|

आते युग के ध्वजधारी है, नए क्षितिज के तारे हम

खाकर कसम रुधिर की अपने, रूप देश का बदले हम

इस तरह हम युवापीढ़ी को अब उठकर नए हिंदुस्थान के लिए जी जान लगाकर काम करना चाहिए| अपने घर में रहते हुए हम ये मेरा घर है इस भावना से रहते है वैसे ही देश के प्रति भी मेरा देश है यही भावना अब सब के मन में जागृत होनी चाहिए| हमारा ये महान राष्ट्र कैसा था, कैसा है और कैसा होना चाहिए इस पर मैंने थोड़ा विचार और अभ्यास किया है वो मै अभी आपके सामने प्रस्तुत करती हूं| युवा पिढ़ी के कर्तृत्व, नयी संकल्पनाओंको मानानिय नरेंद्र मोदीजी का आधार लेकर पुरे विश्व में हमारी मातृभूमि का नाम रोशन करना है| अब हमारे संकल्पना में जो हिंदुस्थान है वो सभी क्षेत्रोंमे समर्थ होना चाहिए| आर्थिक, सामाजिक, राजकीय, सांस्कृतिक, सुरक्षितता, सामाजिक, शैक्षिक, अध्यात्मिक ऐसे सभी क्षेत्रोमे मेरा हिंदुस्थान पुरे विश्व में सबसे आगे होना चाहिए| सबसे पहले हम ग्रामीण क्षेत्र के बारे में सोचते है| हमारा देश खेतिप्रधान है ये हमें अभिमान से कहना है तो खेती की और साथ ही ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति वैसी अभिमान महसूस होने जैसी होनी चाहिए|

जब हम कहते है, हमारा हिंदुस्थान खेतीप्रधान देश है, हमारी सबसे ज्यादा जनसँख्या ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, तो वहां हमारा ध्यान होना चाहिए| ग्रामीण क्षेत्र का पुनरुत्थान होकर हमारे छोटे-छोटे गाँव स्वयंपूर्ण होने चाहिये ये स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी का कहना बिलकुल सही है| राष्ट्रीय संपत्ती का सुयोग्य भाग किसानों और श्रमिकोंको मिलना चाहिए| किसानोंको शास्त्रीय विधि की खेती के बारे में सरकार द्वारा शिक्षित किया जाना चाहिए| मेरे संकल्पना के हिंदुस्थान में खेती के लिए लगनेवाले उच्चतम बीज, खाद, हथियार, दवाइयां और चिकित्सा में होनेवाला भ्रष्टाचार बंद होगा| ये सब चीजे किसानों को बहुत सरलता से मिलेगी| ताकि, इन सबका सुयोग्य उपयोजन कर के खेती का उत्पादन बढ़ सके| कृत्रिम खाद के उपयोजन से आनेवाली नयी पीढ़ी के आरोग्य का संहार रुकेगा और आरोग्यदायी, ताकतवर पीढ़ी मेरे देश में होगी| इसके लिए किसानों को मुफ्त और योग्य मार्गदर्शन मिलेगा तथा खेती शिक्षा का दर्जा गुणवत्तापूर्ण होगा| खेती उत्पादन संभालने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज ने जो व्यवस्था की थी, उसका अभ्यास करके वैसी व्यवस्था होगी| धान्य उत्पादन होने से, बाजार में बिकने तक जो शृंखला है उसका पूरा व्यवहार पारदर्शी होगा| ताकि उसका सही दाम किसानों को मिले, उनका और साथ साथ देश का भी भला होगा| समय समय पर मौसम की सही जानकारी किसानों को मिलेगी| मौसम की वजह से होनेवाला नुकसान देखकर उचित अदायगी किसानों को मिलेगी| इसके कारण किसान खेती छोड़कर नहीं जायेंगे| सालभर देश के सभी राज्यों मे पानी होगा और पानी के साथ लोग भी उतने ही आदर से बर्ताव करेंगे| पानी राष्ट्रीय संपत्ति है, ये मानकर लोग पानी का उपयोजन करेंगे| साल के १२ महीने पानी उपलब्ध होने के लिए मा. राजेन्द्र सिंहजी ने जोहड़ की योजना बनाई है वो योजना पुरे देश में होगी| इसीके साथ नदी-जोड़ प्रकल्प की जो संकल्पना मा. सुरेश प्रभुजी ने बताई है वो पुरे देश में कार्यान्वित होगी| खेती के साथ जो व्यापार किये जाते है उनकी सुयोग्य व्यवस्था होगी| ग्रामीण क्षेत्र इतना अच्छा होगा की उसके ऊपर निर्भर होनेवाला नागरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र का संभाल करेगा| इन सबके साथ मेरे संकल्पना के हिन्दुस्थान में किसानों के घर स्वयंपूर्ण होंगे| गोबर गैस, जैविक इंधन, सौर उर्जा का उपयोग ज्यादा से ज्यादा लोग करेंगे| कचरे का नि:सारण आधुनिक पद्धति से होगा| कचरे से खाद का निर्माण होगा, और खेती की उत्पादकता बढ़ेगी| इसीके साथ पर्यावरण का रक्षण और अध्ययन मेरे देश में होगा| जगह जगह पेड़-पौधे लगाये होंगे| पानी का नियोजन अच्छी तरह से किया जायेगा ताकि देश के किसी भी कोने में देखो तो हरियाली दिखेगी| नदियां सालभर बहती रहेगी और स्वच्छ होगी| नदी का सम्मान किया जायेगा| और तभी हम अभिमान से हमारे हिंदुस्थान के बारे में कह सकते है – सुजलां सुफलाम् मलयजशीतलाम्, सस्यशामलाम् मातरम्।

नए भारत में हम आर्थिकदृष्टि से भी समर्थ होने चाहिए| इसके लिए स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी कहते है, यंत्रयुग का स्वीकार करते हुए, हस्त-व्यवसायोंको योग्य स्थान और उनकी सराहना की जानी चाहिए| मेरे संकल्पना के हिंदुस्थान में राष्ट्रीय उत्पादन विस्तृत प्रमाण में यांत्रिक साधनों से किया जायेगा| राष्ट्र की संपत्ती, आरोग्य और सामर्थ्य किसानो और श्रमिकों पर आधारित है| इसलिए ये दो वर्ग और उनका निवास-स्थान जहाँ होता है वो गाँव स्वयंपूर्ण होने चाहिए| सिर्फ़ जीवनावश्यक चीजे नहीं बल्कि मूलभूत सुख-सुविधाओंका उन्हें लाभ मिलेगा| विदेशी प्रतियोगिताओंसे राष्ट्रीय व्यवसायोंका संरक्षण हमारी सरकार करेगी| राष्ट्र के आर्थिक सामर्थ्य को हानि पहुँचानेवाली गतिविधियाँ पंचायत की तरफ से सुलझेगी और अगर गंभीर रूप से हो तो तोड़ दी जाएगी| विदेशी सहायता को मुक्तद्वार देने के बाद स्वदेशी का महामंत्र भूल जाता है, और स्वयंपूर्णता की और बढ़ना विस्मृति में जाता है| इसलिए राष्ट्रहित यही अर्थनीति का प्रमुख अंग होना चाहिए| इन ४ सालोंमे GST, Start Up India जैसी बहुत योजनाओं के द्वारा आर्थिक क्षेत्र का उत्थान हुआ है| मेरे संकल्पना के हिंदुस्थान में सब व्यवहार पारदर्शी होंगे| 

इन सब हरियाली, विकास, ज्ञानपीठ, महान परंपरा, राष्ट्रीय संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए मेरे देश का सैन्य दल उतना ही सावधान होगा| मेरे राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था विश्व में सबसे उच्चतम होगी| मेरे हिंदुस्थान की तरफ कोई आँख उठाकर भी नहीं देख पायेगा| कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के साथ उन सैनिकोंको भी यथायोग्य सुविधाएँ मिलेगी| सैनिकोंके विविध उपकरण, हथियार उन्हें उच्च दर्जा के और समय पर मिलेंगे| उन सब उपकरणोंके व्यवहार में भ्रष्टाचार नहीं होगा| सीमा पर तैनात सैनिकों के परिवार का ख़याल रखने के लिए अलग व्यवस्था होगी| डिजिटल माध्यम द्वारा अत्याधुनिक शस्त्रोंसे सजा हुआ हमारा संरक्षण दल शत्रुओंके सीने में डर पैदा करेगा| विश्व में सबसे अच्छा सैन्यदल हमारा होगा| सभी दिशाओं से अगर हम सक्षम है, समर्थ है तभी हम पुरे विश्व को अहिंसा का पाठ पढ़ा सकते है| हम अहिंसा सिखा रहे है, अहिंसा का पालन कर रहे है इसका मतलब हम दुर्बल नहीं है| हम प्रबल, समर्थ राष्ट्र है और फिर भी अहिंसा का पालन कर रहे है, इसका मतलब पहला वार हम नहीं करेंगे पर अगर किसीने हमें पुकारा, हमारी ताकद की परीक्षा लेने के लिए सोचा तो पुरे विश्व में हमारी सबसे गुणवत्तापूर्ण और समर्थ सेना शांत नहीं रहेगी| 

मेरे संकल्पना के हिंदुस्थान में कानून अंधा नहीं होगा| चौकीदार सावधान रहेगा और चोर बाहर घुमने के बावजूद कारागृह में होंगे| गुनाहगारोंको सजा दी जाएगी और सजा ऐसी होगी की दुबारा कोई भी गुनाह करने से कतराएगा| 

ऐसी महानता होनेवाले राष्ट्र का सभी विश्व में सम्मान होगा| उस सम्मान की अभी हमारे आदरणीय प्रधानमंत्रीजी की वजह से शुरुवात हुई है| और माननीय प्रधानमंत्रीजी का साथ देने के लिये हम पूरी तरह से तैयार है| उनके कुछ काम आने का मौका मिले तो हमारे लिये बड़े भाग्य की बात होगी| इसके अलावा भी हम हमारे स्तर पर हमारे देश के लिये काम करने की कोशिश कर रहे है| मेरे संकल्पना के हिंदुस्थान के बारे में मै जो सोच रही हूं, वही विचारधारा बताने वाला एक पद्य मुझे याद आ रहा है| वो पद्य अभी के परिस्थिति के लिए और हमें हमारे नये हिंदुस्थान के लिये जो कुछ करना है वो सभी पूर्ण रूप से इस पद्य में उधृत किया है|

हम करे राष्ट्र आराधन, तन से मन से धन से |

तन मन धन से जीवनसे, हम करे राष्ट्र आराधन ||

अंतर से मुख से कृति से, निश्चल हो निर्मल मति से |

श्रद्धा से मस्तक नत से, हम करे राष्ट्र का अभिवादन ||

अपने हंसते शैशव से, अपने खिलते यौवन से |
प्रौढ़ता पूर्ण जीवन से, हम करें राष्ट्र का अर्चन ||

अपने अतीत को पढ़कर, अपना इतिहास उलट कर |
अपना भवितव्य समझकर, हम करें राष्ट्र का चिन्तन ||

है याद हमें युग-युग की, जलती अनेक घटनायें |
जो माँ के सेवा पथ पर, आयी बनकर विपदायें ||

हमने अभिषेक किया था, जननी का अरिशोणित से |
हमने श्रृंगार किया था, माता का अरिमुण्डों से ||

हमने ही उसे दिया था, सांस्कृतिक उच्च सिंहासन |
माँ जिस पर बैठी सुख से, करती थी जग का शासन ||

अब काल चक्र की गति से वह टूट गया सिंहासन |
अपना तन-मन-धन देकर, हम करें पुनः संस्थापन ||

इसी दिशा में अगर हम कार्य करते रहे तो मेरे मन में जो हिंदुस्थान है, वो बनेगा और फिर एक बार विश्वगुरु के पद पर जरुर विराजेगा|

साभार : https://www.academics4namo.com

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