नलकूप एवं जलस्रोत संबंधी वास्तु सिद्धांत

1. दक्षिण में कूप या गड्ढ़ा स्त्रियों की अकाल मौत का कारण होता है। इस कूप को तुरंत भरवा देना चाहिए एवं कूप का निर्माण ईशान कोण में किया जाना चाहिए या इससे गहरा कूप ईशान कोण में बनवा लेना चाहिए और दक्षिण दिशा में स्थित कूप के जल का प्रयोग बंद कर देना चाहिए। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो इस कूप पर ढक्कन लगवाकर इसके जल को एक पाइप लाइन द्वारा ईशान कोण से भूखण्ड के बाहर ले जाकर फिर से ईशान कोण से पाइप लाइन द्वारा भूखण्ड एवं मकान में लाकर प्रयोग करना चाहिए। इस कूप के ढक्कन पर भारी सामान रखा जाना चाहिए। इस पर जनरेटर को भी स्थापित किया जा सकता है।
2. कूप या हैंडपम्प के लिए पूर्व या उत्तरी ईशान कोण सर्वोत्तम स्थान है। उत्तरी ईशान या पूर्व ईशान में कुआं या गड्ढ़ा हो तो सुख, सम्पन्नता, वंश वृ्द्धि व प्रसिद्धि प्राप्ति होती है।
3. दक्षिण नैऋत्य कोण में कूप या गड्ढ़ा हो तो स्त्री रोगग्रस्त रहती है, चरित्रहीन एवं कर्जदार होती है। इस कूप को तुरंत भरवा देना चाहिए एवं कूप का निर्माण ईशान कोण में किया जाना चाहिए।
4. मकान की चारदीवारी के ईशान कोण में पम्पसेट हो तो उस पर बनने वाली छत की आकृति झोंपड़ी जैसे होनी चाहिए एवं यह निर्माण पूर्व व उत्तर की दीवारों से सटा हुआ नहीं होना चाहिए।
5. पूर्वी आग्नेय कोण में कूप या गड्ढ़ा रोगों, अग्निभय एवं चोरी का संकेतक है। इस कूप पर ढक्कन लगवाकर इसके जल को एक पाइप लाइन के द्वारा ईशान कोण से भूखण्ड के बाहर ले जाकर फिर से ईशान कोण से पाइप लाइन द्वारा भूखण्ड एवं मकान में लाकर प्रयोग करना चाहिए।
6. कूप के तल में चौकोर या वृत्ताकार वलय बिठाने पर भी कुएं की जगत (मुंडेर) का निर्माण गोलाकृति में ही होना चाहिए।
7. पश्चिम में कूप या गड्ढ़ा पुरुषों के लिए अस्वास्थ्यकारी होता है। इस कूप पर ढक्कन लगवाकर इससे जल को एक पाइप लाइन के द्वारा ईशान कोण से भूखण्ड के बाहर ले जाकर फिर ईशान कोण से पाइप लाइन द्वारा भूखण्ड एवं मकान में लाकर प्रयोग करना चाहिए।
8. दक्षिण आग्नेय कोण में कूप या गड्ढ़ा हो तो उस घर की स्त्रियां अस्वस्थ रहेगी। बुरे व्यसन एवं भय का शिकार होंगी। ऐसी दशा में उपरोक्तानुसार ही उपाय किया जाना चाहिए।
9. वास्तु सिद्धांत के अनुसार पश्चिम वायव्य़ या उत्तरी वायव्य कोण में कूप या गड्ढ़ा होने से मुकदमेबाजी, चोरी, पागलपन आदि अनेक प्रकार के झंझट उत्पन्न होते हैं। इस कूप को जल्दी भरवा देना चाहिए एवं कूप का निर्माण ईशान कोण में किया जाना चाहिए।
10. कुएं की जगत (मुंडेर) मकान के नैऋत्य कोण की अपेक्षा नीची होनी चाहिए।
11. पश्चिम नैऋत्य कोण में कुआं या गड्ढ़ा हो तो पुरुषों को रोग होता हैं एवं वे चरित्रहीन बन जाते हैं। इस कुएं को तुरंत भरवा देना चाहिए तथा कुएं का निर्माण ईशान कोण में किया जाना चाहिए।
12. मध्य भाग में कुंआ या गड्ढ़ा होने से मकान के स्वामी का विनाश होता है। इस कूप को तुरंत भरवा देना चाहिए एवं कुएं का निर्माण ईशान कोण में किया जाना चाहिए।
13. कूप की जगत उत्तर व पूर्व की दीवारों से सटी हुई नहीं होनी चाहिए।
स्वीमिंग पुल- स्वीमिंग पुल के लिए वही वास्तु सिद्घांत एवं वास्तुदोष निवारण के उपाय उपयोगी है जो कि नलकूप या जलस्रोत के लिए बताए गए हैं।
पानी की टंकी- पानी की टंकी का प्रयोग जल संग्रह के लिए किया जाता है। पानी की टंकी दो प्रकार की होती है- भूमिगत पानी की टंकी एवं ओवरहेड पानी की टंकी। दोनों प्रकार की टंकियों के लिए वास्तु सिद्धांत भिन्न-भिन्न होते हैं।


भूमिगत पानी की टंकी- भूमिगत पानी की टंकी के लिए सामान्यतः वे ही वास्तु सिद्धांत उपयोग होते हैं जोकि नलकूप या जलस्रोत के लिए बताए गए हैं।
ओवरहेड पानी की टंकी- छत पर रखी जाने वाली अर्थात ओवरहेड पानी की टंकी से मकान की ऊंचाई प्रभावित होती है। अतः इसके लिए वास्तु सिद्धांत भूमिगत पानी की टंकी से भिन्न हैं।
ओवरहेड पानी की टंकी संबंधी वास्तु सिद्धांत-Vaastu principles for overhead water tank-• यदि किसी कारणवश विवश होकर ईशान कोण में पानी की टंकी लगानी हो तो वायव्य कोण में इससे अधिक ऊंचा कोई निर्माण करा लेना चाहिए। वायव्य कोण से अधिक ऊंचा आग्नेय कोण में तथा आग्नेय कोण से अधिक ऊंचा नैऋत्य कोण में निर्माण अवश्य कराना चाहिए। ऐसा करने पर ईशान में टैंक के निर्माण का वास्तुदोष दूर हो जाएगा।
• वास्तु सिद्धांत के अनुसार मकान की छत पर रखी जाने वाली ओवरहेड पानी की टंकी दक्षिण-पश्चिम या नैऋत्य कोण में बनानी चाहिए। नैऋत्य कोण को राक्षसों का स्थान माना गया है इसलिए भारी वजन वाली चीजें उसी दिशा में स्थापित करनी चाहिए।
• मकान की छत पर पानी की टंकी ईशान में वर्जित है क्योंकि ईशान किसी भी प्रकार की ऊंचाई या भार को सहन नहीं कर सकता है। ऐसा करने से अनेक कठिनाइयां उत्पन्न होती है।
• यदि नलकूप एवं पानी की टंकी वास्तु अनुसार उचित स्थान पर न हों तो पूर्व ईशान कोण या उत्तरी ईशान कोण में एक छोटी भूमिगत टंकी बनवाकर पूरे मकान में वहां से पानी का प्रयोग करने से इस वास्तुदोष का निवारण हो जाता है।


ड्रेनेज- मकान से पानी की निकासी को ड्रेनेज कहा जाता है। मकान में परनाला (ड्रेनेज पाइप) उचित स्थान में बनाना बहुत महत्वपूर्ण कार्य होता है क्योंकि प्रयोग किए गए पानी का ठहराव घर में सीलन उत्पन्न करता है और रोग का कारण बनता है। इसलिए घर बनाते समय ड्रेनेज लाइन बहुत ही व्यवस्थित तरीके से सही दिशा में बनानी चाहिए। यदि नगर निगम की पहले से ड्रेनेज लाइन है तो उसे सही ढाल से जोड़ना उचित होता है अन्यथा ड्रेनेज लाइन बनाने पर विचार किया जाना चाहिए परंतु पाइप लाइन उचित मार्ग की दिशा पर ही आधारित होगीः-

1. उत्तरोन्मुख मकान में ड्रेनेज उत्तर में उत्तर-पूर्व की ओर बनाएं।

2. पश्चिम दिशा की ओर वाले मकान में पश्चिम की ओर उत्तर-पश्चिम दिशा में ड्रेनेज बनवाएं।

3. पूर्व दिशा की ओर वाले मकान में ड्रेनेज पाइप उत्तर पूर्व में पूर्व दिशा में सही माना जाता है।

4. दक्षिण दिशा की ओर मुख वाले दक्षिण पूर्व में दक्षिण की ओर ड्रेनेज बनाएं।

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