लेखक परिचय

डॉ. मधुसूदन

डॉ. मधुसूदन

मधुसूदनजी तकनीकी (Engineering) में एम.एस. तथा पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त् की है, भारतीय अमेरिकी शोधकर्ता के रूप में मशहूर है, हिन्दी के प्रखर पुरस्कर्ता: संस्कृत, हिन्दी, मराठी, गुजराती के अभ्यासी, अनेक संस्थाओं से जुडे हुए। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति (अमरिका) आजीवन सदस्य हैं; वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्‍था UNIVERSITY OF MASSACHUSETTS (युनिवर्सीटी ऑफ मॅसाच्युसेटस, निर्माण अभियांत्रिकी), में प्रोफेसर हैं।

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-डॉ. मधुसूदन –
modiji

सबेरे जागकर तनिक बाहर झाँक्यो, तो, क्या सुन रियो हूँ?
जंगल से एक ध्वनि आ रही थीं। समझ नहीं पायो, कि काहेकी ध्वनि है? कुतूहलवश समीप जाकर देख्यो, तो क्या देखता हूँ? एक तालाब के किनारे बहुत सारे मेंढक इकठ्ठा होकर, डराँओ डराँओ के बदले हराओ, “हराओ-हराओ-हराओ” का घोष कर रहे हैं?
एक बूढ़े मेंढक को पूछा, कि, आदरणीय चाचा जी, ये किसको हराने को नारो हैं?
बोले अबे मूरख इतनो भी नहीं जानतो?
ये सारे उस नरेंदरवा को हराओ-हराओ-हराओ कह रहे हैं।
सारे देस में एक ही नारो चल रियो है।
“वन पॉइन्ट एजेण्डा”।
नहीं, एजेण्डा पॉइन्टेड टोवार्ड्स ओन्ली वन मॅन।
एक अकेले को हराने के लिए, सारी उठापटक चली है।

पर ये नरेंदरवा कहाँ है? तो बूढ़े मेंढक चाचा ने तर्जनी से दूर संकेत कर दिखाया एक पेड़ के नीचे नरेंदरवा खड़ा था।
दूर, नरेन्दरवा को पेड़ के नीचे खड़ो कियो है, सर पर सेब भी नहीं रख्यो और सारे तीसमारखाँ तीर मार रिया था।
पर एक भी तीर लग नहीं रियो थो।

एक को नाम दिग्विजय जो कुछ थको-सो दिखाइ देतो थो। एक दूसरो बुढ्ढो सिब्बल कहलातो थो।
एक है, स्वयं घोसित ब्यभिचारी मन्नु सिंघवी, अभी फिरसे नौकरी, नहीं चाकरी में आयो है और नरेंदरवा के पीछे पड्यो है।
और भी कई सारा धनुर्धारी तीर मार रिया था, पर कोई भी तीर लक्ष्य पर लग नहीं रियो थो।

एक झाडुवालों, टोपी-मफलर लपेटकर, खाँसतो खाँसतो, बड़ी-बड़ी चुनौतियाँ बक रियो है। नौटंकी को डायलॉग बोल रियो है। चार-छै टोपीवाला सुण रिया है। सर डुला-डुलाकर तालियाँ भी बजा रिया है।
अब कश्मिर के सारे अब्दुल्ले, पण्डितों को हकाल कर …

मैं ने बीच में ही बात काटकर, पूछा “चाचा ये अकेले नरेंदरवा के ही पीछे क्यों ?”

चाचा पण्डिताऊ मिली-जुली लॅग्वेज में बोले, बेटा इसका गुप्त कारण है।
उसका कारण, इनका डर है, कि, सघळा काळा काम जो इन लोगांने किया है, वो बंद हो जावेगा। कारावास भुगतनो पड़ सकतो है।
देस से बाहर भागनो पड़ सकतो है।
नरेंदरवा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलनो चइए। सारा फ्रण्ट एक ही फ्रण्ट पर लड रिया है; मोदी हराओ, मोदी हराओ, मोदी हराओ।

सारी देसद्रोही पार्टियाँ, चीनवादी, इटलीवादी, अमरु वादी, फोर्ड फाउण्डेशन वादी, सारी पार्टियाँ एकजुट होकर अपणा अस्तित्वकी लड़ाई लड़ रइ है।
इस लिए; ये डराँव डराँव नहीं है, बेटा ये हराओ-हराओ है। और सारा मेंढक अपनी आवाज इस गिरनार के सिंह के सामने डराँव डराँव करके डराने का परयास कर रियो है।

ये नरेंदरवा सबकी छुट्टी करवाके रएगो?

ये नरेंदरवा अवैध कामों में व्यस्त लोगांकी बेकारी बढवा देगो। फिर सारो भारत पछतावेगो।
ये नरेंदरवा से मैं पूछू हूँ, कि ये बेचारा काला धंधावालां (काले धंधेवाले) लोग बेकार हो कर कहाँ जावेगा? इतने सारे लोगां को व्यवसाय डुबायो है, वो, क्या नरेंदरवा को चाचो देगो?
मूरख नहीं जानतो, कि, कितनों की रोटी रोजी को परबंध इस शासन ने कियो है ?

गडे मुरदे उखाड़ने का रेकार्ड।
एक सूत्र है इनका==> कोई अच्छासा गडा मुर्दा उखाड़ो।
किसी को वडनगर भेजकर, उसकी बीवी जशोदाबहन को चाहे जितनी घूस दो।
और, उस से कहलवाओ, कि, कहे “मेरे बाप से दहेज माँगने लगा ये नरेंदरवा, हम ठहरे गरीब, ना दे पाए, तो मुझे वापस मायके भेज दिया। अंदर हो जाएगा। चुनाव का अंत होने तक। फिर बाहर आया, तो, फिर कोई अंतर नहीं पडेगा।
उस जशोदाबेन को मालामाल कर दो। पैसे से कौनसा काम नहीं होता? भारत में हमेशा, तो ऐसे ही होता चला आया है; आज तक का इतिहास यही कहता है।
ये भी हो जाएगा। महाभारत में ही, लिखा है, कि “अर्थस्य पुरुषो दासः” मनुष्य पैसे का दास (गुलाम) होता है।
पर ध्यान रखना, ये चड्डी वालों को उकसाना महा कठिन है।
असंभव ही समझो।
पर बीजेपी को तो, आपस में लड़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री पद की लालसा में सारे लड़ेंगे। प्रधानमंत्री पद के लिए सभी को लड़ाओ। झूट-मूट का प्रवाद फैलाओ, कि अडवाणी को प्रधानमंत्री पद चाहिए था।
अरे अज्ञानी ये हमार मेंढकों की समस्त जाति की, रोटी रोजी का प्रश्न है।

अमरिका को फोर्ड फाउण्डेशन, डालर को पानी की भांति क्यों बहा रह्यो हय?
भारत अब भी तीसरे क्रम पर है। अब नरेंदरवो जीत गयो तो अमरिका को, संसार भर में, सारो बैठो बिठायो ढाँचो बिगड जावेगो। आजकल डॉलर के सामने नरेंदरवा की बढ़त का समाचार ही, रुपए का दाम ऊंचा चढ़ा रिया है। और डॉलर नीचे गिरा रिया है।
अब तुम्हीं बताओ, कि, अमरिका भारत के चुनावी महाभारत में इंटरेस्ट क्यों ले रियो है?

माफिया डरा हुआ है। आतंकवादी आस लगाए बैठा हैं। कालाबाजारी और भ्रष्टाचारी त्राहिमाम पुकार रहे हैं।
भारत में महाकाय अपराधी माफिया का गठबंधन; जो कुछ, नेताओं की जानकारी और अधीक्षकों की निगरानी में चलता-पलता है। अनेक (मल्टाय ट्रिलियन) ट्रिलियन डॉलर लेन-देन वाला, माफ़ियाओं का बड़ा जाल है। यह काले धन से चलनेवाला अवैध व्यापार है। खाद्य पदार्थ, जल, बिजली, प्राकृतिक संसाधन, मुद्रा, स्टाम्प पेपर, अवैध कतलखाने, ऐसे अनेक अवैध कामों में काले लेन-देन से जुड़ा हुआ है। नरेंद्र मोदी ने इनकी टांगे गुजरात में तोड़ दी है। वहां तो, ये बेकार हो चुके हैं।

अमरिका चाहतो है, कि, पाकिस्तान की भांति भारत को शासन भी बिकत ले लियो जाय। अब तक रूपए का दाम गिरा हुआ है। उसे और गिराया जाए। जानो, कि, ७० के दशक में एक डालर= ४.७६ रुपए का भाव था। आज एक डालर=६० से ६२ रुपया चल रहा है। १९४७ में एक डॉलर= एक रुपया था। बहुत प्रगति की भारत ने,

अब तुम्ही बताओ कि अमरिका झाडुवालों को क्यों फण्डींग कर रियो है? ये झाडुवाला भ्रष्टाचार विरोधी नहीं, नरेन्दरवा का विरोधी हैं।

कोई दंगा बंगा करवाओ।
१० जनपथ से बोल रियो हूँ।
यार! इस मोदी के गुजरात में क्या, २००२ के बाद दंगा भी नहीं हुआ? अचरज है।
कोई दंगा बंगा करवाओ।
थोड़ी दंगाखोरी के बिज़नेस में तेजी लाओ।
पर सुना है, कि, वहाँ के बहुतेरे मुसलमान भी नरेंदरवा को साथ दे रहे हैं ?
मुझे तो प्रश्न है, कि, क्या, ये गुजरात के मुसलमान भी बिक चुके हैं? या वे सच्चे मुसलमान भी है, या नहीं?
कोई सुपारी लेनेवाला ढूंढ़ो- नहीं मिलता क्या? पड़ोसी पाकिस्तान कब काम आयेगा ? ऐसे संकट में पड़ोसी पाकिस्तान भी काम न आया तो क्या काम का?
शैतान ने क्या क्या कर रखा है।
अहमदाबाद में २४ घण्टे पानी देता है। क्या लगभग सारे गुजरात में पानी मिलता है?
किंतु इस २४ घण्टोंवाले अहमदाबाद के समाचार पर विश्वास नहीं होता। लगता है, ये जूठा प्रचार किया जा रहा है। कांग्रेसवालों को अहमदाबाद पर झूठ फैलाने के लिए न्यायालय में जाना चाहिए। ये निर्वाचन आयोग क्या कर रहा है?
यहाँ दिल्ली में जब केजरीवालों से ७०० लीटर पानी मिलनेका समाचार था। तो अहमदाबाद में २४ घण्टे पानी? हो ही नहीं सकता!

नर्मदा की नहर के उपर सौर ऊर्जा ग्रहण करने वाली छत, लगा रखी हैं राक्षस ने। एक तो पानी पर छाया करके, सूरज की गरमी से पानी बचाता है; और साथ साथ चालबाज़ सौर ऊर्जा से, बिजली का निर्माण भी कर लेता है। कहाँ से लाता है ऐसी युक्तियाँ, है बड़ा चालाक।
सुनते हैं कि, सूखे कच्छ में भी पानी पहुंचा दिया है। सारी योजनाएँ हमारी ही कांग्रेस की ही थी, पर क्रेडिट नरेंदरवा ले रहा है। यह आइडिया चुराता है।
चूहे अभी ही हमारे जहाज से कूद-कूदकर बाहर भाग रहे हैं। एक ऐसा दिन नहीं जाता, कि, कोई चूहा कूदकर भाग नहीं जाता।

डराँव डराँव नहीं हराओ-हराओ-हराओ… नरेंदरवा हराओ नहीं तो हम मरे!

9 Responses to “डराँव, डराँव नहीं हराओ, हराओ … नरेंदरवा हराओ!”

  1. बी एन गोयल

    B N Goyal

    ​आप के इस प्रकरण से कुछ लोग नाराज़ हैं जैसे दिग्गी बाबू की गर्ल फ्रेंड को आप ने बिल्कुल भूला दिया – ​यह ठीक नहीं है। मणि शंकर जी अपने सूट -बूट में चाय की केट्ली लिए खड़े हैं। मीटिंग चल रही है लेकिन उन्हें कोई अंदर नहीं घुसने दे रहा है। उधर अमेरिका में राजडीप सपत्नी डेरा डाले हैं लेकिन उन्हें प्रेस रिलीज़ नहीं मिल रही है। एक सोची समझी साज़िश के तहत विदेशी ज़मीं पर उन पर हाथ उठा दिया गया। It should be probed in depth.

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    • डॉ. मधुसूदन

      Dr. Madhusudan

      Excuse my roman script….this is not my usual computer.
      Received from Prakash Waghmare—-My friend –I will give any one his contact, if asked with your e mail address….I WAS NOT PRESENT WHERE THIS HAPPENED.
      And this is USA. ……You can ask U S Government to probe.
      Sorry Goyal ji, we can not probe. I hope you understand. —-Dr. Madhusudan.
      The Comment from Goyal ji is unrelated to the Vyangyatmak Topic in this article.
      But as I respect him, I forward the following.
      ==============================================================
      From Prakash Waghmare. ——My reliable friend.

      ===>”FRIENDS : I had direct input related to MSG-Rajdeep episode …… You can write to me, if you want …..

      Pl click below and see how “ZEETV” has taken Rajdeep Sardesai to task for his disgraceful behavior. It also exposes Rajdeep’s rise in Media, pushed by his two Leftist ‘Godfathers’ (a well-known fact in India, in case you are not aware). Rajdeep’s whole career is allegedly congress-agenda driven, which in my opinion, is a despicable thing. In the Video, surprisingly, ZEETV-NEWS also confirms this and some of the other shady details about him …. Whatever happened was unfortunate. BUT the questions that ZEETV has raised about the ‘journalists with a personal agenda’ needs to be addressed by their own brethren. I, therefore, commend ZEETV for their honesty ….. Pl see this
      Video to end. It speaks for itself.
      http://www.youtube.com/watch?v=54xGasucqAc

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  2. Vishwa Mohan Tiwari

    इसे किसी समाचारपत्र में शीघ्र ही प्रकाशित करवाना चाहिये।
    मधुसूदन जी बधाई

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  3. डॉ. प्रतिभा सक्‍सेना

    Pratibha Saksena

    पैनी मार की है आपने !
    दसियों साल से चले आ रहे धंधे पर संकट आ गया एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाएँगे ही.उनकी समझ में और कुछ तो आ नहीं रहा सो कीचड़ लपेटे टर्रा रहे हैं.पता है. हाइबरनेशन में जाना है, सो उछल-कूद मचाये हैं.

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  4. Arun Kumar Upadhyay

    दमजाद श्री-एक चुनाव फिल्म बनी है ’दामादश्री’ जो सोनिया जी के दामाद श्री राबर्ट वाड्रा द्वारा सत्ता का दुरुपयोग कर ३०० करोड़ रुपये की सम्पत्ति पर कब्जा करने के बारे में है। इसके पूर्व ३ शक राजा हो चुके हैं जो वास्तव में वास्तव में दामाद थे और उनका नाम दमजाद श्री था। मध्य एसिया की बिखरी जातियों का संघ शक कहा जाता था (शकस्तुषाराः यवनाश्च-महाभारत, कर्ण पर्व ६४/४६)। एक व्यक्ति या जाति कुश है; उनका संघ होने से शक्तिशाली होते हैं अतः वे शक हैं। इनमें से यवन जाति भारत के पश्चिम (अरब) से ग्रीस में बस गयी जिससे उसका नाम इयोनिया = यूनान (हेरोडोटस) पड़ा। इटली में भी ऐसी ही एक शक जाति बसी थी अतः जुलियस सीजर को भी शकाधिपति कहा गया है। वह पारस राजा मित्रदत्त और विक्रमादित्य की संयुक्त सेना द्वारा सीरिया के सेला में पराजित होकर बन्दी बना था और उज्जैन में कुछ दिन उसे जुलूस में घुमाने के बाद विक्रमादित्य ने उसे छोड़ दिया था-यो रुक्मदेशाधिपतिं शकेश्वरं जित्वा गृहीत्वोज्जयिनीं महाहवे।
    आनीय सम्भ्राम्य मुमोच यत्त्वहो स विक्रमार्कः समसह्यविक्रमः ॥ २२.१७ ॥ (कालिदास-२ का ज्योतिर्विदाभरण) इसे रोमन लेखकों ने सीजर का मिस्र में ६ मास का अज्ञात या लुप्त काल कहा है। इस पराज्य के कारण ब्रूटस ने उसकी हत्या की थी (विल डुरण्ट का पाश्चात्य सभ्यता का इतिहास)।
    शक राजाओं के कई शिलालेख और मुद्रायें मिली हैं। इनके अधीनस्थ राजा क्षत्रप (आज की खाप पंचायत) थे तथा उनके मुख्य को महाक्षत्रप कहते थे। श्री भगवान वेदव्यास इतिहास संशोधन मन्दिर (भीष्म, थाने-मुम्बई-६२) के १८ भाग के भारतीय इतिहास, खण्ड ४ के पृष्ठ २८९-२९२ पर इनकी तालिका के अनुसार प्रथम शक राजा नहपान ५५०-५१० ई.पू. तक राजा था। इसकी पुत्री दक्षमित्रा का विवाह दिनिका के पुत्र उशवदत्त से हुआ आत्ः यह दामाद (दमजाद) वंश हुआ। दिनिका, उशवदत्त, मित्र ने ५१० से ४५७ ई.पू. तक शासन किया जिनको श्रीहर्ष विक्रमादित्य ने ४५७ ई.पू. में पराजित किया। हर्ष के उत्तराधिकारी चष्टन (४३७-४२० ई.पू.) में पराजित हुये। यह नहपान के उत्तराधिकारियों का भृत्य (नौकर) या सेनापति कहा गया है। इसके पिता यशमोतिक थे। चष्टन पुत्र जयदमन (४२०-३९० ई.पू.), रुद्रदमन (३९०-३६० ई.पू.) राजा हुये। इसके बाद प्रथम दमजादश्री, जीवदमन तथा रुद्रसिंह ने (३६०-३१७ ई.पू.) तक राज्य किया। इसके बाद राजा हुआ जिसे कहा गया है। तब रुद्रसेन (३१७-२९३ ई.पू.), उसके पुत्र पृथ्वीसेन और सिंहदमन ने २९३-२९२ ई.पू. राज्य किया। तब दमसेन (दामाद) ने २९३-२७९ ई.पू. तक शासन किया। इसके बाद शकों का उज्जैन में प्रभुत्व समाप्त हो गया और दमसेन के पुत्र दमजादश्री-२ केवल क्षत्रप या अधीनस्थ राजा था। यशोदमन१ २७९-२७५ ई.पू. महाक्षत्रप था। उसके भाई विजयसेन (२७५-२६५) और दमजादश्री-३ (२६५-२६१ ई.पू.) तक शासन किया परवर्त्ती शक राजा थे-रुद्रसेन-३ (२६१-२४१ ई.पू.), विष्णुसिंह (२४१-२२६ ई.पू.), भ्रात्रदमन (२२६-२२० ई.पू.)। ३ क्षत्रप- विष्णुसेन (२२०-२११ ई.पू.), रुद्रसिंह-२ (२११-१९८ ई.पू.), यशदमन (१९८-१८३ ई.पू.)। महाक्षत्रप रुद्रदमन-२ (१८३-१६७ ई.पू.), रुद्रसेन-३ (१६७-१३७ ई.पू.), रुद्रसिंह (१३७-१३१ ई.पू.)

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  5. arish sahani

    Well written with all the facts.
    Hindus after 1000 yrs still slave to their enemy. They have no nation.
    Our enemy is so smart, he has now converted millions of hindus to islam,christian, communists and these converts now hate own culture and bow to enemy and all brain dead, ready to die for enemy and destroy own nation.
    Can hindu beat this war game of Three enemies. Get ready to perish.
    No Hindu ever thinks like this.

    Reply
  6. आर. सिंह

    आर. सिंह

    ई मेढकवन के भी जबाब नहीं है.का दूर के कौड़ी लाये है ई लोग. एंकरा लोग के तो लागत है कि ए भी ज्ञान न है कि ई नरेन्द्रवा भगवान के भेजल है. लागत है कि एह लोग कानवां में ए अमृत वचन न सुनाई पड़ा कि हमारा के ईश्वर ने अपना दूत बनाकर भेजा है. एह लोगन का तो लगत है ई भी सुनाई नहीं पड़ा कि सबका भूल कर ( पार्टी,उम्मीदवार )हमारी शरण में आ जाओ.आखिर बेचारा लोग मेढ़के ठहरा न. अगर एह लोगन का कान में ई अमरित बचन पड़ा होता ,तो का मजाल की इनकी जबान हिलती.ऐसे भी इनका ज्यादा कुछ नहीं बिगड़ा है.माफ़ी मांगे पर वो छप्पन इंची छाती वाला एह लोगन का जरूर माफ़ी दे दिहन. अब ई त एह लोगन बुड़बकई न है कि जेकरा शान में एक से एक बुद्धिमान लोग जायज बेजायज एक से बढ़ कर एक भाँट के तरह विरुदावलकी गाये रहल है ओकरा के बारे में सोच रहल है कि भारत में ओकर विरोध में सब खड़ा हो गइल बाड़े.कवन लोग के देश निकला का डर नाही है. उजबक कहीं के.

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  7. डॉ.अशोक कुमार तिवारी

    सभी सभ्य जन विशेषकर महिलाओं को विचार करना ही पड़ेगा अब हम तटस्थ नहीं रह सकते :– अपनी सच्चाई छुपाने के लिए मोदी ने ही अपनी पत्नी को रिलायंस सेक्यूरिटी में बाबा रामदेव जी के आश्रम में छुपा दिया है —मोदी रिलायंस के हाथों बिक चुके हैं, बाबा रामदेव तो हनीमून की बात तक कर दिए पर महिला समितियों की चुप्पी विशेषकर कांग्रेसी महिला समितियों की चुप्पी बहुत कुछ कहती है क्या – कांग्रेस-बीजेपी. मिलकर देश को लूट रहे हैं – – – तभी तो पाँच सालों में बी.जे.पी. कांग्रेस सरकार के खिलाफ एक भी अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकी है और इसी एकता के कारण अब तो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह भी मोदी की राह पर चल पड़े हैं !!!- – – – मोदी समर्थक राज ठाकरे का – —— का बयान ? गुजरात में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की बात करते हैं मोदी —- — 24-4-14 के राजस्थान पत्रिका के पेज नं0-04 पर आया है मेहसाणा ( गुजरात ) से आम आदमी पार्टी कंडीडेट्स ‘वंदना’ पर तीन-तीन बार जानलेवा हमला हुआ है — मेरी पत्नी हिंदी शिक्षिका हैं इसीलिए उनपर रिलायंस टाउनशिप जामनगर ( गुजरात ) में जेंट्स सेक्यूरिटी पर्सनल ने अमानवीय अत्याचार किया है – संसार की सभी महिलाएँ मोदी के इस रूप को समझ जाएँ तो ही न्याय होगा !!!

    Reply
  8. सत्यार्थी

    आदर्नीय मधुसूदन् जी
    हास्य्व्यन्ग विध मेन प्रवक्ता मे शायद यह आप् का पह्ला लेख है.अति उत्तम तथ स्वस्थ मनोरन्जन से पूर्न लेख के लिये धन्यवाद
    अगले लेख की प्रतीक्शा रहेगी
    षुभेच्चु
    शत्यार्थी

    Reply
  9. Dr Ranjeet Singh

    के कैणा थारा मधुसूदन जी! बात तो थे एकदम साँवल अर ठीक कई है! लागै तो कीं इशो ही।

    डा० रण्जीत सिंह

    Reply

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