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    Homeसाहित्‍यकवितानजर झुकाये बेटियाँ

    नजर झुकाये बेटियाँ


    कभी बने है छाँव तो, कभी बने हैं धूप !
    सौरभ जीती बेटियाँ, जाने कितने रूप !!

    जीती है सब बेटियाँ, कुछ ऐसे अनुबंध !
    दर्दों में निभते जहां, प्यार भरे संबंध !!

    रही बढाती मायके, बाबुल का सम्मान !
    रखती हरदम बेटियाँ, लाज शर्म का ध्यान !!

    दुनिया सारी छोड़कर, दे साजन का साथ !
    बनती दुल्हन बेटियाँ, पहने कंगन हाथ !!

    छोड़े बच्चों के लिए, अपने सब किरदार !
    माँ बनती है बेटियाँ, देती प्यार दुलार !!

    माँ ,बहना, पत्नी बने, भूली मस्ती मौज !
    गिरकर सम्भले बेटियाँ, सौरभ आये रोज !!

    कदम-कदम पर चाहिए, हमको इनका प्यार !
    मांग रही क्यों बेटियाँ, आज दया उपहार !!
     प्रियंका सौरभ

    प्रियंका सौरभ
    प्रियंका सौरभ
    रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

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