सुई धागा केवल फिल्म नहीं उम्मीदों का नाम है

विवेक पाठक
स्वतंत्र पत्रकार
कभी सोचा ही न था। सुई धागा नाम से भी फिल्म बनेगी और बनेगी तो उसमें वाकई सुई धागा दिखेगा भी। वही सुई धागा जो हर घर में होता है। रेडीमेड कपड़ों के चौतरफा बाजार ने सुई धागा को आम घरों में कभी कभार खुलने वाले छोटे बक्से तक सीमित कर दिया हो मगर सुई धागा आज भी भारत और इंडिया को बांधे हुए है। जी हां अनुष्का शर्मा और वरुण धवन अपनी आगामी फिल्म में उसी मजबूत भारतीय कारीगरी को पर्दे पर साकार करते दिखेंगे।
शाहरुख खान के साथ पर्दे पर हौले हौले हो जाएगा प्यार गीत गाने वाली अनुष्का शर्मा अपने अभिनय के चरम पर इस फिल्म में बताई जा रही हैं। निसंदेह अनुष्का शर्मा एक सफल और सशक्त अदाकारा हैं मगर व्यावसायिक फिल्मों का गणित ही कुछ ऐसा हो चला है कि वो प्रतिभा संपन्न कलाकारों को भी ऐसी फिल्में करने पर भी मजबूर करता है जिन्हें महीने दो महीने के बाद कोई याद नहीं करता। ऐसी फिल्में फिल्मी चैनलों को टाइम काटने के अलावा बहुत काम नहीं आतीं। 100 से 500 करोड़ क्लब टीम वाले निर्देशक करण जौहर की ए दिल है मुश्किल फिल्म अनुष्का के लिए कुछ ऐसी ही फिल्म रही। इसमें अदाकारी से ज्यादा फूहड़ता परोसी गई। खैर फिल्मी सितारे अपनी सफलता असफलातओं से खुद उन फिल्मों तक पहुंच जाते हैं जो उनके अभिनय के शिखर पर ले जाती हैं।
सुई धागा अनुष्का शर्मा के लिए ऐसी ही फिल्म बनने जा रही है। एक ग्रामीण महिला के किरदार में सस्ती सिथेंटिक साड़ी और सिर पर परंपरागत पल्ला लेकर उन्होंने पर्दे पर न केवल वैसा अभिनय किया बल्कि करोड़ों गांवों में रहने वालीं घरेलू महिलाओं के किरदार को जिया है।
फिल्म में पर्दे पर कढ़ाई करते करते अपने पति को आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाली ममता के पात्र में अनुष्का महिलाओं के हुनर की ताकत का प्रतीक हैं।
ममता बनीं अनुष्का उन करोड़ों भारतीय महिलाओं की प्रतिनिधि हैं जिन पर आगे बढ़ने के लिए सुनहरे रास्ते भले न हों मगर उन पर हौंसलों की उंची उड़ान है। फिल्म में अपने पति को बड़ी पार्टी में  कुत्ता बनकर लोगों को हंसाना कमजोर परिवार की गृहिणी ममता को द्रवित कर देता है। ममता को अपने हाथों के हुनर सिलाई कड़ाई पर अटूट विश्वास है अपने इस विश्वास को पति मौजी से वह साझा करती है और गरीबी से जूझते ममता और मौजी जिंदगी को बुनना और उस पर कड़ाई शुरु कर देते हैं।
सिलाई कड़ाई किस तरह एक संघर्षशील परिवार की जिंदगी को आगे बढ़ाती है और उसे दुनिया में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला हथियार है सुई धागा फिल्म बखूबी बताने जा रही है।
फिल्म में मौजी  का किरदार वो युवा वरुण धवन निभा रहे हैं जो स्टूडेंट ऑफ द ईयर की करण जौहर नुमा क्लॉस से निकलकर आए हैं। वरुण ने सुई धागा में अदाकारी से साबित कर दिया कि भले ही उन्होंने मसाला फिल्मों से शुरुआत की हो मगर वे हमेशा मसाला फिल्म करने वाले कलाकार के दायरे में नहीं रहना चाहते।
गुजरता वक्त सबको सिखाता है और भारतीय सिनेता का सशक्त मंच अब तेजी से उन फिल्मों की ओर बढ़ रहा जो मनोरंजन के साथ समाज को संदेश भी दे रही हैं।
सुई धागा जैसी फिल्म सिनेमा की वही रोशनी है जो ढाई अरब हाथों वाले भारत को हुनरमंद बनने की बात न अपने कई भावप्रवण दृश्यों से दिखा जाती है।
यह फिल्म उस समय प्रदर्शित होने जा रही है जब मेक इन इंडिया के जरिए देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करोड़ों भारतीयों से हुनरमंद बनने की बात कर रहे हैं। आज मेक इन इंडिया देश में तमाम तरह के हुनर सिखाकर लोगों को रोजगार की दिशा दिखा रहा है। ऐसे में सुई धागा फिल्म उन सबको अपनी खुद की कहानी लग सकती है। फिल्म का नाम सुई धागा रखकर निर्देशक ने हर घर से एक रिस्ता कायम करने की सफल कोशिश की है।
चंद रुपए का सुई धागा भारत और भारतीयों का पुराना हुनर है । भारत में लखनउ, चंदेरी, कानपुर, चंदेरी से लेकर तमाम बड़े और तमाम छोटे शहर सिलाई और कढ़ाई के लिए देश दुनिया में जाने जाते हैं।
ममता और मौजी का पुराना घर द्वार, हाथ से कपउे़ पर नीली साड़ी और सिर पर पल्ला लिए कड़ाई करती अनुष्का, सिलाई मशीन पर खटखट बढ़ती उम्मीदें इस फिल्म की यूएसपी रहने वाली हैं।
फिल्म की मध्यप्रदेश के चंदेरी कस्बे में जब शूटिंग हुई तो उससे पहले अनुष्का और वरुण धवन ने यहां कपड़े पर हाथ का हुनर पहले खुद सीखा फिर पर्दे पर जिया।
हालांकि ये बेहतरीन फिल्म अभी देखी नहीं है सो अभी केवल इतनी बात। आगे इस फिल्म में दम लगा के हइशा वाले रमेश कटारिया किस किस जगह अदाकारी की दम लगवा पाए हैं ये देखने जानने हमें  सुई धागा के पर्दे पर रिलीज होने का इंतजार करना पड़ेगा। तब तक सुई धागा से हम भी स्वालंबन की सीख ले सकते हैं।

Leave a Reply

%d bloggers like this: