भगवान कृष्ण के जन्म का आँखों देखा हाल

भादों की अष्टमी की रात थी,जब जन्मे कृष्ण मुरारी
खुल गई तब बेड़ियाँ सारी,जब जन्मे कृष्ण बनवारी

धन्य हुये वासुदेव,ये खुशियाँ जब जीवन में पधारी
कंस के अंत की हो गई थी,अब सारी वहाँ तैयारी 

खुल गए सब ताले झट से,सो गये चौकीदार सारे
लेकर कान्हा को फिर वासुदेव आये यमुना किनारे

घनघोर घटाये घिरी थी,वर्षा रुकने का नाम न लेती
यमुना का जल ऊपर चढकर कृष्ण के पैरो को छूती

देख रहे थे ये सब ,फिर भी वासुदेव हिम्मत न हारे
कृष्ण को लेकर आगे बढ़ते गये,सिर पर टोकरा धारे

सिर पर रखकर टोकरे को,वासुदेव यमुना में चलते जाते
पीछे पीछे शेषनाग जी,बारिस से उनकी रक्षा करते जाते

गोकुल में जब वासुदेव आये,सबको वहाँ सोता पाये
यशोदा की बेटी उठा कर,कृष्ण भगवान को लिटाये

वापिस आने पर वासुदेव ने फिर से हथकडिया पाई
दरवान जग चुके थे,बच्चे की कंस को सूचना पहुचाई

जैसे ही कंस मारने को आया,हुई आकाश से एक वाणी
तेरा मारने वाला पैदा हो गया है,तू कर अपनी निगरानी

आर के रस्तोगी

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