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    Homeसाहित्‍यगजलदुपट्टा अब तो आउट ऑफ़ फैशन हो गया |

    दुपट्टा अब तो आउट ऑफ़ फैशन हो गया |

    दुपट्टा अब तो आउट ऑफ़ फैशंन हो गया |
    अब तो बेचारा ये फटकर बेकार हो गया ||

    समझते थे कभी इसे शर्म-हया की निशानी |
    अब तो बेशर्मी का ये रूप साकार हो गया ||

    लहराते थे कभी दुपट्टे को इश्क को दर्शाने में |
    कैसे दिखाई दे ये अब तो अन्धकार हो गया ||

    आ जाती थी कभी छत पर लाल दुपट्टा ओढ़कर |
    पता चल जाता था,मोहब्बत का इजहार हो गया ||

    ओढती थी दुपट्टा जब निकलती थी लडकियाँ |
    पता नहीं अब क्यों ये तन से फरार हो गया ||

    कंधे से जब ये सरकता तो हाथ लपक लेता |
    अब तो ये सीन देखना ही दुस्वार हो गया ||

    रस्तोगी ने फाड़ कर दुपट्टा,घावो पर बाँध लिया |
    बांधते ही घावो पर दुपट्टा,उसका दीदार हो  गया ||

    आर के रस्तोगी 

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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