लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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शादाब जफर शादाब

टाइटेनिक की 100वी बरसी पर विशेषः-

आज टाइटेनिक हादसे में मरे लोगो की 100वी बरसी है। विश्व इतिहास में सब से बड़ी शांतिकाल समुद्री दुर्घटनाओ में से एक। आरएमएस टाइटेनिक जहाज ने आज ही के दिन 100 साल पहले 15 अप्रैल, 1912 तडके करीब ढाई बजे जलसमाधी ली थी। टाइटेनिक के इस हादसे को हम और आप लोगो ने फिल्मी पर्द पर पूरा का पूरा सांस रोक कर जिस तरह से देखा है ये हादसा असल में उस से कई गुना ज्यादा भयावह था। इस हादसे को आज पूरे सौ साल हो गये, में धन्यवाद देना चाहॅूगा फिल्म टाइटेनिक के उस महान सह-निर्माता, निर्देषक, स्टोरी राईटर, सह-संपादक जेम्स कैमरून को जिसने एक शानदार फिल्म के जरिये टाइटेनिक जैसे जबरदस्त और भयावह हादसे पर यादगार फिल्म बनाकर पूरी दुनिया को टाइटेनिक त्रासदी से रूबरू ही नही कराया बल्कि टाइटेनिक हादसे में मरने वाले के प्रति एक ऐसा रिश्ता कायम कर दिया की आज टाइटेनिक हादसे की 100वी बरसी के अवसर पर पूरी दुनिया इस हादसे में मरे लोगो को अपनी ओर से, अपने तरीको से श्रद्धांजलि दे रही है। इस फिल्म के कारण ही आज पूरी दुनिया में पॉच से दस साल का अवयस्क बच्चा भी कुछ इस तरह से इस हादसे से जुड़ा हुआ है मानो वो इस हादसे का गवाह हो। जेम्स कैमरून ने इस फिल्म में जिस प्रकार से टाइटेनिक हादसे को जीवित किया है मुझे आज तक पूरी दुनिया में ऐसी कोई दूसरी मिसाल नही मिलती। सन् 1997 में जब टाइटेनिक त्रासदी पर टाइटेनिक (अग्रेजी) में फिल्म बनने की खबर मीडिया में फैली तो मीडिया ने ये कह कर इसे नकार दिया की ये फिल्म भी टाइटेनिक जहाज की तरह डूब जायेगी इतना ही नही ये फिल्म फॅाक्स और पैरामाऊट को भी ले डूबेगी। पर जिस ईमानदारी से जेम्स कैमरून ने भव्य सेट, खूबसूरत इफैक्ट देकर फिल्म को बनाया गया वो यादगार होने के साथ ही जिसने भी फिल्म को देखा वो टाइटेनिक और जेम्स कैमरून को भूल नही पाया। जहॉज डूबने के वक्त प्राकृतिक रूप से चूहो का कमरो से निकल कर भागना, जहाज के कमरो में पानी का भरना, मौत के खौफ से बेखर लोगो का वायलन बजाना, बच्चो बूढो के चेहरो पर ठंड़ और मौत का खौफ, टाइटेनिक के दो टुक्डे होकर अटलांटिका में समाना। सन् 1997 से आज तक फिल्म टाइटेनिक का एक एक सीन उस के ज़हन में कुछ इस तरह से रचा और बसा है मानो ये हादसा उस की जिंदगी का अपना हादसा हो। इस फिल्म में केट विस्लेट रोज़ डीविट बुकाटर और लियोनाडों ड़ि कैप्रियो जैक डॉसन की भूमिका वाले दोनो चंचल किरदार यू तो दो अलग अलग वर्ग के होते है बिल्कुल हिंदी फिल्मो की तरह यानी अमीर और गरीब पर असल टाइटेनिक हादसे से इन किरदारो का दूर दूर तक कोई वास्ता नही था पर जिस ईमानदरी से दोनो कलाकारो ने इस फिल्म में रोज़ और जैक के किरदारो को जीवित किया टाइटेनिक हादसा भयावह, और खौफनाक होने के साथ ही एक ऐसी लव स्टोरी बन गया जिसने नौजवानो के साथ ही ज्यादा उम्र के लोगो को भी कई कई रात परेषान रखा। लेकिन कुछ किरदार और कहानी इस फिल्म में असली थे जैसे जहाज के चालक दल के कुछ लोग जिन के किरदार वास्तविक ऐतिहासिक टाइटेनिक घटना पर आधारित थें। यू तो इस फिल्म को बैस्ट फिल्म के साथ ही कुल 11 आस्कर अवार्ड मिले और इस टाइटेनिक फिल्म ने उस समय लगभग 1.8 अरब डॉलर की कमाई भी की।

टाइटेनिक उस समय का सब से बडा भव्य पानी में चलने वाला यात्री जहॉज था। जो अटलांटिका समुद्र में एक बडे हिमखंड से टकराने की वजह से डूबा, हिमखंड से इसे काफी नुकसान पहॅुचा था जिस कारण ये डूबा। टाइटेनिक जिस समय डूबा उस वक्त वो 2,223 यात्रियो को लेकर साउथम्पटन ( इंग्लैण्ड) से न्यूयार्क जा रहा था। 10 अप्रैल सन् 1912 को इसने ये अपनी पहली (और आखिरी भी) यात्रा षुरू की थी। जिस के ठीक चार दिन बाद यानी 14 अपै्रल 1912 को चालक दल के एक सदस्य और टाइटेनिक जहाज के कप्तान की जरा सी लापरवाही चलते एक बडे हिमखंड से टकरा जाने के कारण इस हादसे में 1517 यात्रियो को भव्य टाइटेनिक जहाज सहित अपनी जान गंवानी पड़ी। टाइटेनिक उस समय के सब से अनुभवी इंजीनियरो के द्वारा डिजाइन और तैयार किया गया था। इस के निर्माण में उस समय में की उपलब्ध उन्नत टैक्नोलोजी इस्तेमाल की गई थी। टाइटेनिक का निर्माण 31 मार्च 1909 को अमेरिकी कंपनी जेपी मॉरगन और उस की सहायक इंटरनेशनल मर्चेटाइल मेरिन कंपनी ने खुद अपनी लागत से इसे बनाना षुरू किया था लगभग दो साल टाइटेनिक को बनाने में लगे। टाइटेनिक एक ब्रिट्रिश कंपनी हरलैण्ड ऐंड वोल्फ शिपयार्ड में तैयार किया गया था। इस की डिजाइन का श्रेय लॉर्ड पीरी (हरलैंड ऐंड वोल्फ और व्हाइट स्टार के संचालक ) नौसेना वास्तुकार थॉमस एंडूज, एलेक्जेंडर कॉर्लिसल और उन की टीम को जाता है। कार्लिसल को टाइटेनिक की साज-सज्जा, उपकरण, जीवनरक्षक नौकाओ को लटकाने के लिये यंत्र की डिजाईन करने जैसी व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई थी पर वो सन् 1910 में इस प्रोजेक्ट से अलग हो गये थे।

टाइटेनिक की पतवार को पहली बार 31 मई 1911 को पानी में डाला गया और इस के अगले वर्ष 31 मार्च तक इसे सभी साज-ओ-सामान से लैस कर लिया गया। टाइटेनिक अन्य सभी प्रतिद्वंद्वी जहाजो से बहुत ही ज्यादा सुन्दर और मजबूत था। पानी में खडा टाइटेनिक यू लगता था मानो पानी में कोई राजमहल तैर रहा हो। इस में अमीरो की पसंद के सभी शौक मौजूद थें। इस के पहले तल पर स्विमिंग पुल, जिम, एक स्क्वैष कोर्ट, तुर्की बाथरूम, इलैक्टानिक्स ठण्डे और गरम पानी के बाथरूम और एक कैफे का बरामदा था। इस के फर्स्ट क्लास के कमरो को खूबसूरत और महंगी लकडी के तख्तो से बनाने के साथ ही इन कमरो में महंगे कालीन और महंगे फर्नीचर और सौफे से सजाया गया था। इन कमरो में महंगे झाड फानूस भी टागे गये थें। पर्शियन कैफे के अलावा फर्स्ट क्लास के यात्रियो के लिये सूर्य स्नान के लिये बेहतरीन तरीके से टाइटेनिक के ऊपरी हिस्से के बरामदे को समुद्र के किनारे का लुक दिया गया था। जहाज के पहले तल पर ही एक खूबसूरत रेस्तरा भी बनाया गया था जिस में बनाये लजीज़ व्यंजन यात्रियो को परोसे जाते थे। टाइटेनिक के पहले और दूसरे के दर्ज के विभागो में लाईब्रेरी और हेयर सैलून भी बनाये गये थे। जबकि थर्ड क्लास में सब सुविधाए नही थी थर्ड क्लास के कमरो की चौखटे दरवाजे और फर्नीचर पाइन लकडी के तख्तो से बनाये गये थे। इस के अतिरिक्त लिफ्ट, भाप चालित जनरेटर, दूसरे जहाजो से सम्पर्क करने के लिये मारकॉनी रेडियो जैसी सुविधाए भी टाइटेनिक में मौजूद थी।

टाइटेनिक को इस कदर भव्य बनाते हुए मुझे लगता है कि इस के निर्माताओ की शायद ये सोच रही होगी की ये टाइटेनिक जहाज केवल अमीरो की तफरीह का सामान रहेगा जो इस की भव्यता से प्रभावित होकर महीनो महीनो अपने परिवार के साथ सैर पर निकलेगे और ये लोग इस से सालो साल मोटी कमाई कर के जिंदगी भर ऐश करेगे। ये ही सोच कर इन लोगो ने फर्स्ट क्लास के यात्रिओ से सिर्फ ट्रांस अटलांटिका की एक तरफ की यात्रा के लिये 4350 डॉलर का भुगतान लिया था। जिस की आज अगर तुलना की जाये तो ये कीमत लगभग 95860 अमरीकी डॉलर से भी ज्यादा होती है। टाइटेनिक के इस 100 सौ साल पहले हुए हादसे ने दुनिया को हिलाकर रख दिया था वही ये भी दिखा और बता दिया था की इंसान, इसान ही रहेगा। मौत इंसान का कही भी पीछे नही छोडेगी, न अमीर को छोडेगे न गरीब को। चांदी और सोने की थालियो में खाने खाने वाला भी मौत के आगोश में उसी तरह समायेगा जैसे मिट्टी की प्लेट में खाने वाला। आज टाइटेनिक की 100वी बरसी पर हम उन लोगो को जरूर श्रद्धांजलि दे जो टाइटेनिक की वजह से दुनिया के सब से बडे इस समुद्री हादसे का शिकार हुए।

5 Responses to “ओह………..टाइटेनिक”

  1. Vaghela shiv

    वाह वाह भाई टाईटेनिक की दूरघटना को ईस तरासे कहने के लिए.

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  2. KAMRAN ALI

    वाह वाह टाईटेनिक पर बहुत ही सुन्दर लेख पढने को मिला लेखक को घन्यवाद टाइटेलिक की यादे ताजा करने के लिये

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  3. LAIQ AHMAD CHODRY

    वाह वाह शादाब भाई टाईटेनिक की सारी यादे ताजा हो गई वास्तव में समुद्री इतिहास की ये सब से भयावह और दुखद घटना था। सुन्दर लेख के लिये घन्यवाद

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