लेखक परिचय

विपिन किशोर सिन्हा

विपिन किशोर सिन्हा

जन्मस्थान - ग्राम-बाल बंगरा, पो.-महाराज गंज, जिला-सिवान,बिहार. वर्तमान पता - लेन नं. ८सी, प्लाट नं. ७८, महामनापुरी, वाराणसी. शिक्षा - बी.टेक इन मेकेनिकल इंजीनियरिंग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय. व्यवसाय - अधिशासी अभियन्ता, उ.प्र.पावर कारपोरेशन लि., वाराणसी. साहित्यिक कृतियां - कहो कौन्तेय, शेष कथित रामकथा, स्मृति, क्या खोया क्या पाया (सभी उपन्यास), फ़ैसला (कहानी संग्रह), राम ने सीता परित्याग कभी किया ही नहीं (शोध पत्र), संदर्भ, अमराई एवं अभिव्यक्ति (कविता संग्रह)

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rahulप्यारे राहुल बचवा,

तुम दो महीने की छुट्टी बैंकाक में बिताकर इन्डिया आ गए, मनवा को बड़ा सकून मिला। बचवा, इस तरह कबतक कभी बैंकाक में तो कभी कैलिफ़ोर्निया में छुट्टी मनाते रहोगे? राजनीति तो तुम्हारा पुश्तैनी धंधा है, कान्ग्रेस की अध्यक्षी कहीं भागे थोड़े जा रही है? देखो, दिग्गी चचवा बुढ़ौती में अमृता को सरे आम रख लिया, नरायन दत्त तिवरिया भी एक पांव कबर में होने के बावजूद भी बियाह करिये लिया। अब तुम भी देसी-बिदेसी – कवनो लड़की छांट कर घरवा बसा ही लो। चार साल के पहले मोदिया गद्दी छोड़ने से रहा। कलावती के यहां कबतक रोटी खाओगे और ट्रेन की जेनरल बोगी में बैठकर लड़कियों के हाथ पर कबतक चित्रकारी करोगे? चाचा की बात मानो और सोनिया भौजी के लिए जल्दी से एगो बहुरिया ले आ दो। हिन्दुस्तान में बाढ़, सूखा, भूकंप, सुनामी तो हर साल आता है। एक्टिंग करने में तो तुम सलमान और शाहरुख का भी कान काट देते हो। बांह चढ़ाकर जब अपनी सरकार का विधेयक फाड़ देते हो, तो मोदी सरकार का फाड़ने में कितना टैम लगेगा। अब तो लोकसभवा में भी तुम ठीकेठाक बोल रहे हो। एक्टिंग और जबानी भुगतान का मौका यह देश बार-बार देता है। जवानी बरबाद करने से का फायदा? कही “मेक इन इंडिया” का कान्सेप्ट देश की जनता के साथ कांग्रेसियों के दिमाग में घुस गया, तो कहीं के नहीं रहोगे। देश तो कांग्रेस-मुक्त होइये गया है, अगर तुम्हारे ही चेला-चपाटी स्वदेशी कांग्रेस के भुलावे में आ गए, तो समझो हो गया बंटा ढार। पुराने कांग्रेसियों से ज्यादा पनगा मत लेना। ये कभी भी मोदी के कन्धे पर बन्दूक रखकर पार्टी के अंदर भी “मेक इन इंडिया” का बुलेट झोंक सकते हैं। एक ठो सलाह औरो है। पंजाब, महाराष्ट्र, बंगलोर जाओ, यह तो ठीके है लेकिन बिहार या नेपाल, भूकंप पीड़ितों को देखने मत चले जाना। वह सिस्मिक ज़ोन है। वहां की धरती कब उलट-पुलट जाये, भगवानो को मालूम नहीं रहता है। जान है तो जहान है। अब चिठ्ठी बन्द करता हूं। थोड़ा लिखना, जियादा समझना। अपना खयाल रखना। भौजी को पयलग्गी कहना।

तुम्हारा अपना – चाचा बनारसी

4 Responses to “एक पाती राहुल बचवा के नाम”

  1. himwant

    अरे चचा, काहे चिंता करते हो. एक दिन अधीर कांग्रेसी जन हीं इसे उहाँ से उतार कर इसकी जगह इसकी बहिनिया प्रियंका को बैठा देंगे. वैसे प्रियंका इसकी माँ है, जब ले दू पैग अंदर नही जाता है, आँख नही खोल पाती है.

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  2. शकुन्तला बहादुर

    Shakuntala Bahadur

    राहुल बचवा केर नाम बनारसी चच्चू केर पाती बहुतइ नीक लागी ।हमरा जिया जुड़ाय गवा । चच्चू , तनि अपन भतिजवा का पुचकार कै समझावै क चही । उई तुम्हरी नाहीं सुनै तौ तुम अपन बचवा कौ गुस्साए सकत हौ के नाहीं ? ऊ बहुतै बिगड़ गवा है ।।

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  3. बी एन गोयल

    B N Goyak

    बनारसी चाचा –
    तुम्हारी पाती मिली – अरे तुम हमें का इत्ता मुर्ख समझे हो – अरे चाचा हम बैंकाक के बारे में बहुत कुछ सुने थे – लोग जाने का का उट पटांग कहते थे – हम सोचे चलो ससुर एक बार बैंकाक जा कर देखहिं आवें। और फिर हमार तो एहि उमर है फिर का हम बुढ़ौती में जाते। खैर – आप तो ठहरे गहरे अनुभवी, घाट घाट का पानी पिए हो। आप ठीक कहे हो – मोदीवा बहुत बोले है – बोल बोल कर हमरा नुक्सान करे है। अब आप ही कहो हमने कोउ गलत कही की पी एम टूर करने इंडिया आते हैं – अरे वो अरुणवा – वो वकील – हमारी बखिया ही उधेड़ दी। कैसा जुग आ गया – तनक सा मजाक भी ना कर सके – कोउ बात नाय -अच्छा सबन को हमारी राम राम कहना ,

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  4. mahendra gupta

    राहुल बचवा को यह बात समझ आएगी तब है ना , वह तो अब छोकरों के धक्के चढ़ कर पगला गया है चार साल में क्या हो जाये कह नहीं सक्ते , कहीं आगरा या रांची न ले जाना पड जाये

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