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प्रवक्‍ता ब्यूरो

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गिरीश जोशी

11 मार्च को UP चुनाव परिणामों के आते ही मायावती ओर पंजाब के परिणाम आते ही केजरीवाल ने EVM को लेकर सवाल उठाए ओर यूपी & पंजाब चुनाव को फर्जी घोषित कर दिया ।
समझदारी सिफ॔ कांग्रेस ने दिखाई ओर हार की जिम्मेदारी EVM पर नहीं थोपी ।

मायावती ओर केजरीवाल क्यो EVM पर सवाल कर रहे है । दरअसल मायावती की पार्टी बसपा एक दलित आंदोलन की उपज है कांशीराम ने अपने कम॔ठ साथियों के साथ मिलकर यूपी / दिल्ली ओर पंजाब मे बड़ा दलित आदोंलन खड़ा किया था चूंकि दलित वोट-बैंक सबसे ज्यादा यूपी मे था तो आधार वोट बैंक बन गया । मगर कांशीराम के कथित तोर पर बीमार पडने ओर मृत्यु उपरांत मायावती ने ना सिर्फ उस दलित मूवमेंट को कनिष्ठ होते हुए हाइजैक कर लिया बल्कि कांशीराम के असली साथियों को भी तरीके से साइड लाइन कर एक दलित आंदोलन को ” प्राइवेट लिमिटेड ” कंपनी मे तब्दील कर दिया ओर यह दलित आंदोलन या मिशन टिकट बेचकर ” नोट पैदा ” करने का आंदोलन बनकर रह गया ।

एक समय तक तो ठीक ठाक चला लेकिन जब इस आंदोलन ने लिमिटेड कंपनी का रुप लिया ओर संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर की जगह मायावती के पत्थर के पुतलों ने सार्वजनिक जगहों पर ले ली बस वहीं से मायावती के पतन की कहानी शुरु हो गयी । करेला ओर वह भी नीम चढा कि तर्ज पर मायावती का खुद का अहंकारी ओर सामंती व्यवहार ओर वह भी उनकी अपनी पार्टी ओर मंत्रीयों के साथ हैरानी भरा ही रहा है उनके साथ कोई बैठ नहीं सकता था ..उनके समकक्ष किसी अन्य की कुर्सी नहीं लग सकती थी उनके विधायक जमीन पर दरी मे बैठाये जाते थे आदि ..ओर कांशीराम का यह दलित मिशन या ईमानदार आंदोलन मायावती ने ” टिकट खरीदी – ब्रिकी का केंद्र बना डाला था तो जब आप अपनी विचारधारा बेचोगे ओर इस अभिमान ओर भ्रम के साथ कि आपका कोर वोटर आपको भगवान मानता है तो बहनजी माफ कीजिएगा यह नई सदी का भारत है कोई भी मतदाताओं को अपनी जेब मे समझे ।

कुल मिलाकर बहनजी आप एक्सपोज हो चुकी है इसलिए जनता ने आपको नकार दिया है अब आप अपना कोर वोटबैंक ओर अपने कार्यकर्ताओ की भगदड रोकने के लिए EVM मे गडबडी के नारे को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है जबकि हकीकत यह है कि बसपा के एक एक बूथ एंजेट ने सभी 7 फेज मे EVM रेंडमाइजेशन ओर मतदान पूव॔ ओर पश्चात प्रकिया को सही करार देकर हस्ताक्षर किये है ओर आपकी पार्टी ने 7 फेज के चुनाव मे एक भी EVM की शिकायत नहीं की थी ।

अब बात केजरीवाल की तो केजरीवाल को तगडा झटका इसलिए लगा क्योकि कि वे आत्म मुग्ध थे कि उन्हे दिल्ली की तर्ज पर 90% वोट ओर सीटें मिलेगी लेकिन कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर की विश्वसनीयता केजरीवाल ओर अकाली – बीजेपी पर भारी पड़ी ओर सधा हुआ फैसला पंजाबियो ने लिया तो आप बोखला रहे है ओर मै घोषणा करता हुं दिल्ली नगर निगम के परिणामों की घोषणा के बाद आप ओर आपकी चोकडी शायद इतने कपडे आप फाडोगे कि भारत देखकर हंसेगा ।

कुल मिलाकर ” मीठा मीठा गप-गप ; कडवा कडवा धु धु ” लेकिन आज के भारत में यह नहीं चलेगा यह आपको समझना होगा, तुलसीदास जी ने कहा है जाको प्रभु दारुण दुःख देयी । वाकी मति पहले हर लेयी। वही अवस्था इन दोनों की होती दिख रही है।

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