लेखक परिचय

मृत्युंजय दीक्षित

मृत्युंजय दीक्षित

स्वतंत्र लेखक व् टिप्पणीकार लखनऊ,उप्र

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inflationमृत्युंजय दीक्षित
विगत कुछ दिनों से देश में बढ़ रही महंगाइ्र्र पर चर्चा फिर शुरू हो गयी है। यह चर्चा संसद से लेकर सड़क तक हर तरह के प्लेटफार्म पर हो रही है। जब घरों में परिवारों के सदस्य मिल बैठकर कोई बहस प्रारम्भ करते हैं तो फिर चर्चा का विषय महंगाई बम पर ही शुरू हो जाता है। विगत सप्ताह संसद के दोनों सदनों में महंगाई पर जमकर चर्चा हुयी। इस चर्चा में लगभग अधिकांश दलों के सांसदों ने जोरदार तरीके से अपनी बातों को रखने का प्रयास किया। राज्यसभा में भीमहंगाई पर जोरदार चर्चा हुयी लेकिन वहां पर सबसे दिलचस्प नजारा यह देखने को मिला कि जब देश की संसद में जनहित के मुददे पर गर्मागर्म बहस हो रही थी उस समय अधिकांश सीटें खाली पड़ी थीं। यह खाली सीटें अधिकांशतः विपक्षी दलों के सांसदों की थी। यह नजारा राज्यसभा टी वी के सौजन्य से साफ देखा जा रहा था। जबकि लोकसभा में जिन विपक्ष के सांसदों ने महंगाई पर जिस प्रकार से भाषण दिये व अपने विचार व्यक्त किये वह घोर निराशावादी थे। लोकसभा व राज्यसभा में महंगाई के दौरान चर्चा में तर्क हीन, आंकडों से हीन, समस्या समाधान के विचारों से हीन था।विपक्षी सांसद केवल सोशल मीडिया के फर्जी आंकड़ों के आधार पर पीएम मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार को घेरने का असफल प्रयास कर रहे थे।
लोकसभा में महंगाइ्र पर चर्चा का प्रारम्भ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने किया राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरूआत में तो बेहद आक्रामकता दिखलायी और पीएम मोदी पर सीधा हमला ही बोल दिया था लेकिन जैसे जैसे वे आगे बढ़ते गये बेहद कमजोर होते चले गये। राहुल गांधी के भाषण को सुनकर राजग के सांसद मुस्करा रहे थे।राहुल गांधी महंगाई पर जो भाषण दे रहे थे वह पूरी तरह से आगामी विधानसभा चुनावों की रैलियों में दिये जाने वाले भाषण का रिहर्सल ही था। लोकसभा में सभी विपक्षी दलों के अपने भाषण में महंगाई को रोकने का कोई ठोस उपाय तो नहीं सुझाया अपितु वह सभी संासद एक सोची समझी रणनीति के तहत केवल पीएम मोदी का अपमान व आलोचना कर रहे थे तथा सरकार व संसद तथा देश की जनता को केवल यह बता रहे थे कि आगामी लोकसभा चुनावों में महंगाई एक बड़ा गम्भीर मुददा बनाया जायेगा। विपक्षी सांसद जनहित में भाषण न देकर केवल पीएम मोदी के खिलाफ अपनी असहिष्णुता का अन्यायपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
वहीं वित्तमंत्री अरूण जेटली और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान तथा राजग के अन्य सांसदों ने विपक्ष को लगभग निरूत्तर कर दिया था। महंगाई पर बहस के दौरान एक संासद ने गजब के तर्क प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार से जब देश में गैर कांग्रेसी सरकारें आती है तो मुद्रास्फीति कम होती है और जब कांग्रेस सत्ता में आती है तो मुद्रास्फीति बढ़ती चली जाती है और जीडीपी घटती चली जाती है। यही कारण है कि पीएम मोदी अपने सभी सांसदों को मजबूत सांसद की संज्ञा दे रहे है। सत्तापक्ष के सांसदों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज देश में जो महंगाई हैं उसके पीछे पुरानी यूपीए सरकार की गलत नीतियां ही हैं। यह बात बिलकुल सही है कि वर्तमान समय में महंगाई है लेकिन केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से उसमें काफी नियंत्रण भी बना हुआ है। महंगाई न तो बढ़ी है और नही घटी है अपितु इसको स्थिर माना जा सकता है। महंगाई का सबसे बड़ा कारण बदलता मौसम भी है। मानसून आधारित कृषि के कारण खेती का दायरा सीमित होता जा रहा है।देश का एक बड़ा हिस्सा जहां सूखे का संकट झेल रहा था वहीं दूसरी ओर अब कई जगह बाढ़ आदि भी आ रही है।फिर भी महंगाई स्थिर है। केंद्र सरकार विगत कई दिनों से कई स्तरों पर महंगाई रोकने के लिए कड़े कदम भी उठा रही है तथा आगे आने वाले समय और कदम भी उठायेगी। केंद्र सरकार बार बार राज्य सरकारों से जमाखोरों कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों व गिराहों पर कड़ी कार्यवाही करने की बात कहती है लेकिन अधिकांश जमाखोरों के खिलाफ कार्यवाही करने में कोई रूचि नहीं दिखा रहे।केंद्र सरकार ने राज्यों से दालों व अन्य खाद्य उत्पादों पर वैट व अन्य राज्यस्तरीय करों की व्यवस्था को कम करने से लेकर पूरी तरह समाप्त करने की बात कही है लेकिन अभी तक किसी भी राज्य सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है। यहां पर इस बात पर ध्यान देने की बात है कि पूरा विपक्ष सरकार पर यह आरोप लगाता है कि पेट्रोल और डीजल की कम हो रही कीमतों का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा जिसका दुष्प्रचार किया जा रहा है । यहां पर भी राज्य सरकारों ही काम है कि वह पेट्रोल- डीजलों में लगने वाले वैट व अन्य करों को कम करने का साहस दिखायें। चीनी के दामों में वृद्धि के पीछे चीनी मिलों का कारनामा है।
यह मोदी सरकार का ही अभिनव प्रयास है कि विगत 60 वर्षो के इतिहास में पहली बार यूरिया खाद आदि के दामों में भारी कमी की गयी है। वह दिन भी अच्छी तरह से याद आ रहे हैं कि जब किसान खाद लेने के लिए पास के जिलों व शहरों में जाता था तो उसे खाद के बदले लाठियां मिलती थीं। आज किसानों को खाद सस्ते दामों में उपलब्ध है वह भी आसानी से। केंद्र सरकार ने प्रकृति की ओर से दी गयी बेहद विपरीत स्थितियों के बावजूद महंगाई पर नियंत्रण किया हुआ है । देश में ऐसा पहली बार हुआ है देश की खुफिया एजेंसियों को दालों के कारोबारियों पर नजर रखने का आदेश दिया गया है कि ताकि यह भी पता चल सके कि दालों की महंगाई बढ़ने के पीछे कोई साजिश तो नहीं है। पहली बार अफ्रीकी देशों के साथ दालों की खरीद के समझौते करने के प्रयास किये जा रहे हैं। विगत दिनों पीएम मोदी के मोजाम्बिक दौरे के दौरान दालों की खरीद का एक बड़ा समझौता हुआ है। सरकार का मानना है कि वर्ष 2016 में अच्छे मानसून के चलते जहां खरीफ की अच्छी फसल होगी वहीं दाल की पैदावार भी अच्छी होगी । नई फसल आने के बाद अरहर व अन्य दालो की कीमतों में कमी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। कम से कम सरकार ने बहस के दौरान पूरी ईमानदारी से यह बात स्वीकार की है केवल दालों के ही दाम बढ़े है। यह सच्चाई है। केंद्र की राजग सरकार व पीएम मोदी को महंगाई की चिंता है तथा सरकार लगातार महंगाई पर नियंत्रण के उपाय एक आपदा प्रबंधन के तौर पर कर रही है। जबकि महंगाई पर पिछली सरकारों ने कोई विशेष उपाय नहीं किये थे। महंगाइ के नियंत्रण के लिए राज्य सरकारों का रवैया भी बेहद लचर व राजनीति से प्रेरित है।
उप्र, बिहार व बंगाल आदि में तो कालाबाजारियों व जमाखोरों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त होने की भी खबरंे आ रही है। यह बात बिलकुल सही है कि यूपीए सरकार चली तो गयी लेकिन अपने पीछे महंगाई छोड़ गयी। अब उल्टा चोर कोतवाल से पूछ रहा है कि ,”कब रूकेगी महंगाई – संसद में बताओ सही तारीख।“

 

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