पचनदा का पौराणिक एवं बीहड़ परिक्षेत्र

पचनदा धार्मिक और पौराणिक महत्व का सबसे दुर्भल स्थल है। यहां के प्राचीन मंदिरों में लगे पत्थर आज भी दुनिया के इस आश्चर्य और भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक धार्मिक विरासत का बखान कर रहे हैं। 800 ईसा पूर्व पचनदा संगम पर बने महाकालेश्वर मंदिर पर साधु-संतों का जमावड़ा लगा रहता है।

डा.राधेश्याम द्विवेदी
पांच नदियों यमुना, चंबल, सिंधु, क्वारी और पहुज का यह संगम परिक्षेत्र उत्तर प्रदेश में इटावा जिला मुख्यालय से 70 किमी दूर सिण्डौस के पास बिठौली गांव है। यहां इन पांच नदियों का दिव्य मिलन होता है। मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले में पहुज नदी बहती है। यह सिन्धु नदी की एक शाखा है। यहां यमुना में चम्बल नदी मिलती है ,उसके तुरन्त बाद पहुज उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में यमुना में मिलती है। क्वारी जिसे कुवारी या कनवरी कहा जाता है मध्य प्रदेश के मुरौना व भिण्ड जिले में बहती है। यह सिन्धु नदी की एक शाखा है। यह उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में सिन्धु में मिलकर फिर यमुना में मिलती है। सिन्ध या काली नदी मध्य प्रदेश की नदी है। यह मालवा के विदिशा के पहाडी से निकली है। यह यमुना नदी में मिलती है। यमुना में चम्बल तथा सिन्ध के क्वारी और पहुज मिलने को ही पचनदा कहते है। इन नदियों के तट पर अनेक शिव मंदिर बने हुए हैं। यह स्थान उत्तर प्रदेश के तीन जिलों इटावा, औरेया तथा जालौन के सीमाओं के निकट का क्षेत्र है। यह क्षेत्र डाल्फिन मछली के प्रजनन का प्रमुख स्थल है। इस संगम को पचनदा या पचनद भी कहा जाता है। पचनदा धार्मिक और पौराणिक महत्व का सबसे दुर्भल स्थल है। यहां के प्राचीन मंदिरों में लगे पत्थर आज भी दुनिया के इस आश्चर्य और भारत की श्रेष्ठ सांस्कृतिक धार्मिक विरासत का बखान कर रहे हैं। 800 ईसा पूर्व पचनदा संगम पर बने महाकालेश्वर मंदिर पर साधु-संतों का जमावड़ा लगा रहता है। बाबा साहब के मंदिर के ठीक सामने नदियों के पार इटावा जनपद में कालेश्वर का मंदिर है। जहां श्रद्धालु बाबा साहब के दर्शन करने जाते हैं। मन में आस्था लिए लाखों श्रद्धालु कालेश्वर के दर्शन से पहले संगम में डुबकी अवश्य लगाते हैं। यह वह देव स्थान है जहां भगवान विष्णु ने महेश्वरी की पूजा कर सुदर्शन चक्र हासिल किया था।
मुकुंद वन की तपस्थली:- लोग पचनदा की धाराओं में डुबकी मारकर तरने का मनोरथ लेकर आते है। गोस्वामी तुलसी दास के संगी रहे बाबा मुकुंद वन की तपस्थली जाकर भी श्रद्धालु शीश नवाते हैं। पचनदा के तट पर यह मेला पांच रोज चलता है। श्रद्धालु डुबकी लगाकर मुकुंद वन महाराज के दरबार बाबा साहब में माथा टेककर आशीष मांगते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां पर सभी नदियों की धाराएं अलग-अलग दिखाई देती हैं। यहां एक प्राचीन मंदिर है जो कि बाबा मुकुंदवन की तपस्थली कहलाता है और बाबा साहब के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। ऐसा माना जाता है कि मुकुंदवन महाराज ने आज से पांच सौ वर्ष पूर्व यहां आश्रम बनाकर तपस्या की थी।
तुलसीदास जी से सम्बन्धित:- जनश्रुति के अनुसार संवत 1636 के आसपास भाद्रपद की अंधेरी रात में तुलसीदास जी कंजौसा से गुजर रहे थे उस समय नदियां पूरे उफान पर थी। आश्रम देख उन्होंने प्यासे होने की आवाज लगाई और पानी पिलाने का आग्रह किया। कहा जाता है कि तुलसीदास जी की आवाज सुनकर मुकुंदवन से कमंडल में पानी लेकर यमुना की तेज धार पर चलना शुरू कर दिया और पानी पिलाकर गोस्वामी तुलसीदास को तृप्त कराया। इसके बाद वह गोस्वामी तुलसीदास को अपने आश्रम ले आए। आश्रम में कई दिन तुलसीदास जी रुके तब बाबा मुकुंदवन ने तुलसीदास जी को जगम्मनपुर रियासत के राजा रूपसहाय से मिलवाया और तुलसीदास ने जगम्मनपुर किले के शालिगराम के मंदिर में शालिगराम जी की मूर्ति स्वयं स्थापित की थी। उन्होंने राजा रूपसहाय को एक मुखी रुद्राक्ष तथा दक्षिणावर्ती शंख भेंट स्वरूप दिया था जो लंबे समय तक किले में सुरक्षित रहा। तुलसीराम जी के जाने के बाद से कंजौसा गांव में बाबा साहब के मंदिर पर कार्तिक पूर्णिमा पर लक्खी मेला लगना शूर हो गया जो अनवरत जारी है। इस मेले में जिले के साथ ही सीमावर्ती जनपदों, औरैया, इटावा, भिंड, ग्वालियर, कानपुर देहात के अलावा प्रदेश और मध्यप्रदेश के श्रद्धालु भी आते हैं। यमुना, चंबल, सिंध, पहुज व क्वारी नदियों के कटाव से उजड़े बाबा मुकुंद वन को फिर हरा भरा बनाने की मुहिम छेड़ी गई है। यहां पौधे रोपे गए और संकल्प भी लिया गया कि आने वाले श्रद्धालुओं से पौधे रोपित कराए जाते हैं। बाबा मुकुंद वन बीहड़ क्षेत्र का पौराणिक स्थल है। यहां चहुं ओर आम के पेड़ दिखते थे, लेकिन नदियों के कटाव से यह क्षेत्र वृक्ष विहीन हो गया है। पर्यावरणविद भगवत विश्नोई ने अपने उद्यान से रुद्राक्ष, चंदन एवं जामुन के पौधे ले जाकर महंत शिव बाबा व जुहीखा के सपा नेता वीरेंद्र सिंह सेंगर से रोपित कराए हैं।
डाकुओं के प्रभाव :- पचनदा धार्मिक और पौराणिक महत्व का सबसे दुर्भल स्थल है एक समय डाकुओं के प्रभाव के चलते इस इलाके में विकास की गंगा नहीं बह सकी है। आजादी के बाद से देश दुनिया के एक मात्र पांच नदियों के संगम स्थल पचनदा को सरसब्य बनाने की दिशा में किसी भी राजनैतिक दलों ने हिम्मत नहीं दिखाई। पचनदा को विकास से वंचित रखने वाले राजनेताओं को सिर्फ चुनाव के दौरान ही इस पौराणिक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल की याद आती है। यदि पर्यटन केंद्र बन जाएगा तो बीहड़ी क्षेत्र के लोग खुशहाल हो जाएंगे। बीहडांचल ऐजेंडे में ही पचनदा के विकास को शमिल करके रखा हुआ है। वे इस बात से बेहद खुश हैं कि उनके क्षेत्र में प्रकृति ने देश दुनिया के एक मात्र पांच नदियों के संगम स्थल को दे करके रखा हुआ है। यहां पर देश दुनिया के पर्यटक इस स्थल को निहारने आ रहते हैं।
पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में कोशिश:-1989 से पहले कांग्रेस की सरकार के दौरान कई बार कार्ययोजनाए पचनदा के विकास के बाबत बनाई गई लेकिन तकनीकी कारणों से पचनदा के विकास की योजनाएं परवान नहीं चढ़ सकी हैं। पूरे चंबल क्षेत्र के विकास के लिए लोकसमिति पिछले पांच सालों से सक्रियता दिखा रही है। लोकसमिति के अध्यक्ष सुल्तान सिंह पूरे चंबल इलाके में घूम-घूम कर चंबल को नया राज्य बनाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि चंबल का अगर हकीकत में ही विकास करना है तो 38000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र फल में फैले दस्यु प्रभावित इटावा, आगरा, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, धौलपुर और भरतपुर को मिला कर एक नए राज्य का सृजन करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से 17000 करोड़ के पैकेज की भी मांग की है। उनका कहना है कि चंबल में ऊंचे-ऊंचे मिट्टी के टीलों को काट कर उनका समतलीकरण करना चाहिए साथ ही पचनदा पर छोटे चेकडैम बनाने चाहिए ताकि पानी को स्टोर किया जा सके। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार के भूमि संरक्षण विभाग के अलावा कई अन्य विभागों की ओर से हमेशा भूमि संरक्षण योजना के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन इन खर्चों का कोई हिसाब-किताब हकीकत में नजर नहीं आता है। यह सब कागजो में ही खर्च दिखलाया जाता है। पचनदा स्थित कालेश्वर मंदिर के दर्शन करने आते रहे हैं सभी पचनदा को सरसब्य बनाने का भरोसा इस बार दे रहे हैं लेकिन हकीकत में इनके वादे ऐसे नहीं लग रहे हैं कि यह लोग पचनदा के लिए विकास जैसा कुछ कर पाएंगे। दशकों से चुनाव मैदान में उतर रहे राजनेताओं की ओर से इस तरह के ही भरोसे दिए जाते रहे हैं और उनके भरोसे थोथे साबित होते रहे क्योंकि उन्होंने कुछ किया ही नहीं इसलिए पचनदा दशकों से विकास से वचिंत पड़ा हुआ है।
प्रस्तावित पचनदा बांध के निर्माण :- प्रत्येक वर्ष बरसात में वर्षा द्वारा अत्यधिक पानी इन नदियों में आता है, किन्तु बांध न होने के कारण बहकर निकल जाता है। यह क्षेत्र पूर्णतया कृषि पर आधारित है तथा जीविकोपार्जन के लिए दूसरा कोई अन्य साधन क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है। विगत् 5 वर्षों से बुंदेलखण्ड क्षेत्र के किसान भीषण सूखा पड़ने के कारण भुखमरी, आत्महत्या व क्षेत्र से पलायन करने को मजबूर हैं जल स्तर बहुत नीचे चला गया है। मवेशियों व मनुष्यों को पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है। सरकार की उदासीनता के कारण प्रस्तावित पंचनदा बांध योजना चालू करने के बाद ही बंद कर दी गई जिससे किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता। क्षेत्र के किसानों , मजदूरों, व्यापारियों आदि सभी वर्गों को दो वक्त की रोटी, पीने का स्वच्छ पानी एवं पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित पंचनदा बांध योजना को स्वीकृत कराने के लिए प्रस्तावित पचनदा बांध योजना को स्वीकृत कर तुरंत कार्य प्रारंभ कराने की आवश्यकता है। पचनदा बांध बन जाने से वहां के किसान खुशहाल रहेगा तथा सूखे की स्थिति से हमेशा के लिए निपटा जा सकेगा। जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पचनदा बांध के निर्माण को स्वीकृति प्रदान कर तुरंत प्रारंभ कराने के आवश्यक निर्देश जारी करें।
इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत:- बुंदेलखंड के महोबा में केन, बेतवा नदी लिंक में 17 हजार करोड़ रुपये की लागत से दो तीन राज्यों की नदियों को जोड़कर इंटरलिंकिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत होने जा रही है। यह देश का अब तक का पहला प्रोजेक्ट है जिससे करीब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की आठ लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी। हवाई सर्वेक्षण के जरिये यह जानने और समझने की कोशिश की जा रही है कि डाकुओं के आतंक से अर्से से जूझते रहे, इस इलाके का किस तरह विकास किया जा सकता। पचनदा बांध योजना के तहत उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में यमुना नदी पर औरैया घाट से 16 किमी अपस्ट्रीम में सढरापुर गांव में बैराज का निर्माण प्रस्तावित रहा लेकिन बाद में यह योजना फाइलों में बंद इसलिए हो गई क्योंकि इस योजना से इलाकाई किसानों का बडे स्तर पर नुकसान का आंकलन किया जाने लगा था।
फिल्म की शूटिंग से पचनदा का विकास :- जिस तरह से इटावा में लायन सफारी बनाई गई है उसी तरह से पचनदा का भी विकास कराया जाए। जाहिर है कि पचनदा भी विकास से वचिंत नहीं रह पाएगा। एक समय डाकुओं के प्रभाव के चलते इस इलाके में विकास की गंगा नहीं बह सकी है। फिल्मों की शूटिंग के लिए पांच नदियों का संगम स्थल पंचनदा विकसित होगा। प्रदेश के इटावा जिले के दुर्गम बीहडों में स्थित दुनिया के इकलौते पांच नदियों के संगम स्थल पचनदा को फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से विकसित करने की पहल की जायेगी। इस अहम स्थल को फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से विकसित किया जाना चाहिये। इस स्थल का बेहद शांत वातावरण और यहां के मनमोहक नजारे फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से बेहद अनुकूल हैं। यहां पर वन्य जीवों की बहुलता भी किसी भी फिल्म की शूटिंग को जानदार और शानदार बनाने में सहायक होगी। बेशक पचनदा सैंक्च्युरी एरिया में आता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बेहतर पयर्टन केन्द्र बनाने की दिशा में अगर कोई बेहतर कार्य किया जाता है तो उन कठिनाईयों को भी दूर करने की कोशिश की जायेगी जो सैंक्च्युरी एरिया होने के नाते आती हैं। पंचनदा फिल्मों की शूटिंग के लिहाज से विकसित कराया जाता है तो इससे देश के कई नामी फिल्मकारों को यहां पर शूटिंग के लिए आकर्षित किया जा सकेगा। विकसित होने पर पंचनदा के इलाके के लोगों की बेरोजगारी भी दूर होगी, फलस्वरूप प्रदेश सरकार द्वारा बेरोजगारी दूर करने का जो वादा किया गया है उसे भी बड़ी हद तक पूरा किया जा सकेगा। चंबल के बीहडों को लेकर सैकडों फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है, जिनमें कई बेहद लोकप्रिय भी हो चुकी हैं। प्रदेश के चहुंमुखी विकास के साथ-साथ फिल्म निर्माण की दृष्टि से भी प्रदेश के विकास को गति दे रहे हैं। इससे रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल सकेगा।

1 thought on “पचनदा का पौराणिक एवं बीहड़ परिक्षेत्र

  1. Sir ye pichda elaka h yha government dhayan ni degi. Agar ye yojna khi or hoti jaise delhi . Mumbai jaisi jagah hoti toh sarkar kab ka nirman kr deti. Ye vote bank ka jariya h toh kaam kaise suru hoga . Abbi july me etwah sansad ji aa kr jhoote vaade kr gye the . 3 mahine me project pr kaam suru ho jayega. Lekin abi tak kuch aisa dikha hi ni. Or sayad hoga bhi ni.koi bhi sarkar aa jaye lekin gareeb kisan mar rahe h or aage bhi marenge .isse kisi bhi sarkar ko fark ni padta hai.

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