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    Homeसाहित्‍यकविताअब प्यारी लगती बेटी है

    अब प्यारी लगती बेटी है

    -प्रभुदयाल श्रीवास्तव-
    poem

    अपनी प्यारी बहनों को अब,
    भैया कभी सताना मत|
    तिरस्कार करके उनका हर,
    पल उपहास उड़ाना मत|

    एक जमाना था लड़की को,
    बोझ बताया जाता था|
    दुनियां में उसके आते ही,
    शोक जताया जाता था|

    हुई यदि लड़की घर में तो,
    मातम जैसा छा जाता|
    हर पास पड़ोसी घर आकर,
    अपना दर्द जता जाता|

    ऐसा लगता लड़की ना हो,
    कोई आफत गले पड़ी|
    ढेरों ताने तो माता को,
    सुनना पड़ते घड़ी घड़ी|

    किंतु आज परिवर्तन की कुछ,
    लहर दिखाई देती है|
    परियों जैसी नटखट सी अब,
    प्यारी लगती बेटी है|

    माता और पिता को अब तो,
    लड़की भार नहीं लगती|
    जो कठिन काम करते लड़के,
    वह लड़की भी कर सकती|

    सैनिक बनकर सीमा पर भी,
    बम बारूद चलाती है|
    बनकर दुर्गा वह रिपुओं का,
    शीश काट ले आती है|

    उड़ अंबर में भी जाती है,
    सागर तल भी छू आती|
    पर्वत के सीने छलनी कर,
    सिर उसके ध्वज फहराती|

    कंधे से कंधा मिलाना अब,
    बेटी को चलना आता|
    सड़कों पर चलती बाला से,
    अब कौन नज़र टकराता|

    अब भी कुछ पुरा पंथियों को,
    पर लड़की दिखती भारी|
    दुर्गा, देवी, काली को भी,
    अब तक समझे बीमारी|

    बहकावे में आ लड़की को,
    पेटों में मरवाना मत|
    तिरस्कार करके उनका हर‌,
    पल उपहास उड़ाना मत|

    प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    प्रभुदयाल श्रीवास्तव
    लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|
    1. समाज और देश के लिए लड़की का समान रूप से महत्व बताती एवं उसके प्रति उपेक्षापूर्ण व तिरस्कार की भावना त्यागने का सराहनीय संदेश देती सुंदर कविता है। कवि श्री प्रभुदयाल श्रीवास्तव जी को बधाई।
      हिन्दी कविता के लिए अंग्रेजी में `Poetry’ शीर्षक देना खलता है। यदि संभव हो तो कलात्मक ढंग से हिन्दी में ही `कविता’ लिखवाएँ।

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