लेखक परिचय

श्‍यामल सुमन

श्‍यामल सुमन

१० जनवरी १९६० को सहरसा बिहार में जन्‍म। विद्युत अभियंत्रण मे डिप्लोमा। गीत ग़ज़ल, समसामयिक लेख व हास्य व्यंग्य लेखन। संप्रति : टाटा स्टील में प्रशासनिक अधिकारी।

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मेहनत जो करते दिन-रात

वो दुख में रहते दिन-रात

 

सुख देते सबको निज-श्रम से

तिल-तिल कर मरते दिन-रात

 

मिले पथिक को छाया हरदम

पेड़, धूप सहते दिन-रात

 

बाहर से भी अधिक शोर क्यों

भीतर में सुनते दिन-रात

 

दूजे की चर्चा में अक्सर

अपनी ही कहते दिन-रात

 

हृदय वही परिभाषित होता

प्रेम जहाँ बसते दिन-रात

 

मगर चमन का हाल तो देखो

सुमन यहाँ जलते दिन-रात

 

2 Responses to “कविता ; प्रेम जहाँ बसते दिन-रात – श्यामल सुमन”

  1. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    खुद मितकर ही दाना ब्रूक्ष बने अमराई में.
    परजीवी क्या खाक बनेगा शेर महा बंराई में..

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  2. mahendra gupta

    हर्दय वही परिभाषित होता,प्रेम जहाँ बस्ता दिन रात सुमनजी एक मधुर रचना क्र लिए बधाई

    Reply

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