लालकिले पर सातवीं बार तिरंगा फहराएंगे प्रधानमंत्री मोदी

जश्न ऐ आजादी:: कोरोना महामारी के बीच आजादी की 74 वीं वर्षगाँठ मनाएंगा देश

भगवत कौशिक।

देश का 74वां स्‍वतंत्रता दिवस इस साल कुछ अलग अंदाज में मनाया जाएगा। कोरोना महामारी के चलते इस बार स्‍कूलों, कॉलेजों सहित सारे सरकारी, निजी संस्‍थानों में परेड, सांस्‍कृतिक आयोजन तो नहीं होंगे।इसके साथ ही लालकिले पर भी होने वाले भव्य समारोह का रंग इस बार कोरोना के कारण कुछ फीका रहेगा।समारोह मे केवल चुंनिदा लोगो को ही प्रवेश दिया जाएगा।इस साल प्रधानमंत्री समेत लाल किले पर मौजूद सभी अतिथि और अन्य लोग मास्क लगाए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नजर आएंगे। गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया कि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए मास्क लगाना, सैनिटाइजेशन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा। समारोह स्थल पर निर्धारित क्षेत्र में बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।लेकिन देश की आजादी की वर्षगांठ को लेकर उत्‍साह में कमी नहीं रहेगी। इस ऑनलाइन दौर में ऑनलाइन बधाइयां दी जाएंगी और आजादी के किस्‍से कहे-सुने जाएंगे।15 अगस्त, 1947 को जो हमें आजादी मिली, वह आसानी से नहीं मिल गई। इसके लिए हमें बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी है और लंबा संघर्ष करना पड़ा है। महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ.राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुखदेव, गोपाल कृष्ण गोखले, चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्लाह खान ,लाला लाजपत राय, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, चंद्र शेखर आजाद जैसे हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिया। तब जाकर हम आजाद फिजा में सांस लेने के काबिल हो पाए।

■ आज आजादी की 74वीं सालगिरह—

आज हमारा देश की आज़ादी की 74वीं सालगिरह मना रहा है।हमारे भारत देशने इन 74 सालों पर तमाम उतार चढ़ाव देखे हैं। इस देश ने आजादी के तुरंत बाद युद्ध झेला है, तो आजादी के दो दशकों में 3 युद्ध। ये अलग बात है कि भारत देश ने हमेशा हर चुनौतियों से निपटने में सफलता पाई।चाहे 2008 की आर्थिक मंदी की बात हो या मौजूदा समय मे फैली कोरोना रूपी महामारी हमारे देश ने हर मोर्चे पर मुसीबतों का डट कर सामना किया है।हालांकि ये जरूर है कि देश आजादी के 74 सालों में भी कुछ मोर्चों गरीबी,बेरोजगारी, भुखमरी, भ्रष्टाचार, उच्च शिक्षा मे सुधार,कालेधन की वापसी,गिरती अर्थव्यवस्था, सांप्रदायिकता , आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर पूर्ण रूप से फतह हासिल नहीं कर पाया है।
पिछले 74 वर्षों में हमारा देश जिन स्थितियों से गुज़रा उसे बदला तो नहीं जा सकता , लेकिन भविष्‍य तो हमारे हाथों में ही है। हमें इतना भर तय करना है कि अपने अधिकारों को जान सकें और लोकतंत्र के कामों में गर्व की भावना से भागेदारी जताएं ताकि हमारा राष्‍ट्र सही दिशा में आगे बढ़ सके।

■ 15 अगस्त का दिन होगा यादगार,न्यूयोर्क भी करेगा तिरंगे को सलाम —

जिस साल 2020 को इतना बुरा भला कहा जा रहा है ,उसी 2020 मे 15 अगस्त के दिन भारतीय इतिहास मे स्वर्णिम अक्षरों से एक नया अध्याय लिखा जाएगा।भारत के साथ साथ 15 अगस्त को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में प्रतिष्ठित टाइम्स स्क्वायर पर   एफ.आइ.ए की तरफ से तिरंगा लहराया जाएगा । इस मौके के मुख्या अथिति भारत के महावाणिज्य दूत रंधीर जायसवाल होंगे ।

■ 15 अगस्‍त 1947 का दिन ऐसे हुआ तय —-

यह लार्ड माउंटबेटन ही थे जिन्‍होंने निजी तौर पर भारत की स्‍वतंत्रता के लिए 15 अगस्‍त का दिन तय करके रखा था क्‍योंकि इस दिन को वे अपने कार्यकाल के लिए “बेहद सौभाग्‍यशाली” मानते थे। इसके पीछे खास वजह थी। असल में दूसरे विश्‍व युद्ध के दौरान 1945 में 15 अगस्‍त के ही दिन जापान की सेना ने उनकी अगुवाई में ब्रिटेन के सामने आत्‍मसमर्पण कर दिया था। माउंटबेटन उस समय संबद्ध सेनाओं के कमांडर थे। लार्ड माउंटबेटन की योजना वाली 3 जून की तारीख पर स्‍वतंत्रता और विभाजन के संदर्भ में हुई बैठक में ही यह तय किया गया था।

■अभिजीत मुहूर्त में बजा आजादी का शंखनाद—

लार्ड माउंटबेटन ने 14 और 15 अगस्‍त की मध्‍यरात्रि का समय सुझाया और इसके पीछे अंग्रेजी समय का ही हवाला दिया जिसके अनुसार रात 12 बजे बाद नया दिन शुरू होता है। लेकिन हिंदी गणना के अनुसार नए दिन का आरंभ सूर्योदय के साथ होता है। ज्‍योतिषी इस बात पर अड़े रहे कि सत्‍ता के परिवर्तन का संभाषण 48 मिनट की अवधि में संपन्‍न किया जाए हो जो कि अभिजीत मुहूर्त में आता है। यह मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से आरंभ होकर 12 बजकर 15 मिनट तक पूरे 24 मिनट तक की अवधि का था।

■ बिर्टिश हुकूमत 1948 मे करना चाहते थे भारत को आजाद—

बिर्टिश हुकूमत 15 अगस्त 1948 को भारत को आजाद करना चाहते थे जिसकी पुष्टि खुद अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन ने की थी लेकिन भारतीय जनआंदोलन के बढते दबाव के कारण अंग्रेजों को 1947 मे ही भारत को आजाद करना पडा।

■ 15 अगस्त के बारे में रोचक तथ्य:

◆ 15 अगस्त 1947 को जब भारत को आजादी हासिल हुई उस वक्त भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जश्न का हिस्सा नहीं थे। क्योंकि उस दौरान वो बंगाल में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच हो रही सांप्रदायिक हिंसा को रोकने का काम कर रहे थे।

◆ 15 अगस्त को भारत के अलावा तीन अन्य देशों को भी आजादी मिली थी। इनमें दक्षिण कोरिया जापान से 15 अगस्त, 1945 को आज़ाद हुआ। ब्रिटेन से बहरीन 15 अगस्त, 1971 को और फ्रांस से कांगो 15 अगस्त, 1960 को आजाद हुआ था।

◆ जिस दिन भारत आजाद हुआ यानि 15 अगस्त को उस दिन तक भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा पूर्ण रुप से नहीं बनी थी, इसका फैसला 17 अगस्त को को रेडक्लिफ लाइन की घोषणा से हुआ।

◆ देश भले ही 15 अगस्त को आजाद हो गया था, लेकिन तक तक हमारे पास अपना कोई राष्ट्र गान नहीं था, हालांकि रवींद्रनाथ टैगौर ‘जन-गण-मन’ लिख चुके थे, लेकिन इसे 1950 में इसे राष्ट्र गान का दर्जा मिला।

◆ लार्ड माउंटबेटन ने भारत को इसलिए आजाद कराया क्योंकि इसी दिन जापान की सेना ने उनकी अगुवाई में ब्रिटेन के सामने आत्‍मसमर्पण कर दिया था। ऐसे में लार्ड माउंटबेटन ने निजी तौर पर भारत की स्‍वतंत्रता के लिए 15 अगस्‍त का दिन तय किया।

◆ आपको जानकर हैरानी होगी की 15 अगस्त 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन अपने कार्यालय में काम कर रहे थे, दोपहर को नेहरु ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल की सूची सौंपी और उसके बाद इंडिया गेट के पास एक सभा को संबोधित किया।

◆ जिस दिन भारत आजाद हुआ यानि की 15 अगस्त 1947 को, 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था और सोने का भाव 88 रुपए 62 पैसे प्रति 10 ग्राम था।

◆ भारत भले ही आजाद हो चुका था, लेकिन उस दौरान वर्तमान राज्य गोवा भारत का हिस्सा नहीं था। उस दौरान गोवा पुर्तगालियों के अंडर में आता था, 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने गोवा को पुर्तगालियों से आजाद करवाया था।

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