राजस्थान सरकार और महिला विकास की बयार

डॉ मनोज चतुर्वेदी

राजस्थान ऐतिहासिक रूप से वीर महिलाओं की गाथाओं से भरा राज्य है. फिर भी वर्तमान संदर्भ में पितृसत्ता, सामंती मानसिकता और रुढ़िवादी प्रथागत कानूनों के कारण  प्राय: यह राज्य महिलाओं की स्वस्थ जीवन की तस्वीर पेश करने में असफल रहता है.
राजस्थान में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 6,86,21,012  थी. इसमें से महिला जनसंख्या 3,30,00,926 थी .राजस्थान में साक्षरता का प्रतिशत  67.06 प्रतिशत रहा है. राजस्थान में पुरुष साक्षरता जहां 80.51 प्रतिशत है .वहीं स्त्री साक्षरता  52.66 प्रतिशत है. राजस्थान में कोटा जिले में सर्वाधिक महिला साक्षरता है .यहां स्त्री साक्षरता 62.32 प्रतिशत है .वहीं   जालौर जिला में मात्र 38.73% ही महिलाएं साक्षर हैं.
लिंगानुपात, साक्षरता ,स्वास्थ्य, रोजगार ,आदि विभिन्न क्षेत्रों में राजस्थान की महिलाओं की स्थिति में सन 1991 की तुलना में काफी सुधार देखने में आया है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 922 महिलाएं हैं .जटिल सामाजिक -आर्थिक स्थिति वाले इस राज्य में महिलाओं की बढ़त अच्छी खबर है .
फिर भी सांस्कृतिक परंपराओं और वीरता के महाकाव्य कथाओं के किवदंती रहे, इस राज्य के महिलाओं की पिछड़ी स्थिति अपने अस्तित्व का नेतृत्व चाहती है .राजस्थान में लड़कियों और महिलाओं के खराब स्वास्थ्य और शिक्षा, सामाजिक भेदभाव ,दमन, गरीबी और अभाव से  निहायत पीड़ित महिलाओं का औसत 64.64 प्रतिशत तक रहा है.
महिला आबादी को मुख्यधारा में लाने के लिए राजस्थान महिला आयोग की स्थापना की गई. राजस्थान महिला आयोग का गठन 15 मई 1991 को सांविधिक निकाय के रूप में किया गया .
महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विकास के लिए तथा इनके सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन विभिन्न विभागों द्वारा किया जा रहा है.
महिलाओं को सुलभ न्याय दिलाने हेतु पारिवारिक न्यायालय की स्थापना की गई है. इस योजना के तहत सभी जिला मुख्यालयों, महिला थाना एवं महिला सुरक्षा सलाह केंद्र की स्थापना कर –सामाजिक – पारिवारिक या किसी भी स्तर पर पीड़ित ,शोषित, हिंसा से व्यथित महिला को तत्काल सहायता एवं संरक्षण दिलाना है.
राजस्थान में बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए बालिका शिक्षा फाउंडेशन ने ‘राजस्थान पदमकशी पुरस्कार योजना’ 2018
प्रारंभ किया है. इस योजना के तहत कक्षा 12 में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाली छात्राओं को स्कूटी दिया जाता है .
22 जनवरी 2018 को जिला स्तरीय कार्यक्रम जो राममवी राजसमंदर में आयोजित था ,इस में पिछड़ी अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बालिकाओं  को शिक्षित करने, एवं शिक्षा हेतु  उन्हें प्रोत्साहित करने हेतु कक्षा 8 में प्रवेश करने पर स्कूटी दिया जाएगा.
इसके अलावा भारतीय डाक विभाग और श्रम रोजगार मंत्रालय में बेरोजगार युवाओं के रोजगार पंजीकरण हेतु ‘राजस्थान डाकघर रोजगार सेवा केंद्र’ पंजीकरण/ डाकघर रोजगार सेवा केंद्र 2018 प्रारंभ किया है.
गत वर्ष नवंबर 2017 राजस्थान में ‘वसुंधरा सखी वाहन योजना का प्रारंभ किया गया है .इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, आसान और गंतव्य स्थल तक उन्हें मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करना है. राजस्थान में महिला जनसंख्या वृद्धि हेतु तथा कन्या भ्रूण हत्या रोकने तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राजश्री योजना’ 8 मार्च 2016 चल रही है.
महिला से ही परिवार, समाज एवं राष्ट्र का विकास होता है. उससे ही परिवार और समाज को सही दिशा मिलती है. इसीलिए राजस्थान में महिला सशक्तिकरण एवं विकास हेतु ‘राजस्थान भामाशाह योजना’ प्रारंभ की गई है .इस योजना के तहत सभी सरकारी लाभ सीधे महिला लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित होता है .निश्चय ही इससे भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिलती है. इसमें सबसे प्रमुख बात यह है कि –इस योजना में घर की सबसे बड़ी महिला के नाम पर ही बैंक में खाते खोले जा रहे हैं. इस योजना के तहत 1 करोड़  40 लाख से अधिक परिवारों और 5 करोड़ 8 लाख से अधिक व्यक्तियों को पंजीकृत किया गया है. 6736 करोड़ से ज्यादा की रकम सीधे बैंक खातों में जमा कराई गई है .
वर्तमान समय में केंद्र सरकार हर व्यक्ति को किसी भी एक कौशल में प्रवीण होने पर बल दे रही है. हर स्त्री- पुरुष जो 18 से 35 वर्ष आयु के हैं, वह अपनी रुचि अनुसार कोई भी कौशल सीख कर अपना रोजगार शुरू करके आमदनी कमा सकते हैं. निश्चय ही इससे आर्थिक समृद्धि प्रति व्यक्ति और परिवार में बढ़ेगी. जिससे देश में निर्धनता, आर्थिक असंतुलन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार आदि दूर होगा. सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में दिनों -दिन बढ़ती भीड़ का दबाव भी से कम होगा .साथ ही गांव ,कस्बे  और छोटे शहरों के लोगों का बड़े शहरों की ओर तीव्र पलायन भी थमेगा. क्योंकि हर व्यक्ति जो कौशल प्राप्त है वह अपने घर ,अपने क्षेत्र ,अपने गांव -शहर में ही रहकर आमदनी कमा सकेगा . इसलिए राजस्थान में भी युवा महिलाओं को रोजगार कुशल बनाने हेतु ‘कौशल विकास प्रशिक्षण’ चलाया जा रहा है. जिसके तहत ना केवल इस में युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण ही मिलता है, बल्कि उन्हें अपना रोजगार शुरू करने हेतु रियायती दर पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है. इसके तहत अब तक राज्य में 11 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा चुके हैं .राज्य में लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने हेतु ‘हमारी बेटी योजना ‘प्रारंभ की गई है .10वीं और 12वीं कक्षा में प्रथम आने वाली लड़कियों के लिए यह योजना बहुत ही लाभकारी है. गत वर्ष 92 हजार लड़कियों को इस योजना का लाभ मिला.
‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ महिलाओं को धुंए और घुटन से मुक्त कराने में काफी सफल रही है. हर घर को एलपीजी कनेक्शन देने वाली यह योजना महिलाओं को सुरक्षित तथा स्वस्थ रखने एवं एक विशेष पहचान देने के साथ ही धुआं रहित, वातावरण प्रदूषण में कमी और स्वच्छ जीवन देने में भी मील का पत्थर साबित हो रही है .इस ‘उज्ज्वला योजना’ का मुख्यमंत्र है –स्वच्छ ईंधन ,बेहतर जीवन और महिलाओं को  सम्मान. उज्ज्वला योजना के तहत पिछले वित्त वर्ष में देश में 2.20 करोड़ नए एलपीजी कनेक्शन दिए गए.
जनसंख्या नियंत्रण हेतु ‘अंतरा इंजेक्शन योजना ‘प्रारंभ की गई है. इससे महिला स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी तथा बच्चों में अंतर रखना भी आसान होगा.
मातृ मृत्यु दर एवं उच्च शिशु मृत्यु दर कम करने हेतु राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा ‘जननी शिशु सुरक्षा योजना ‘चल रही है .इसमें गर्भवती स्त्रियों और नवजात शिशुओं को मुफ्त चिकित्सा एवं अन्य सुविधाएं जैसे मुफ्त दवाइयां ,उपभोग्य सामग्रियां, प्रयोगशाला  परीक्षण, भोजन ,रक्त की सुविधा , रेफरल परिवहन सुविधाएं दी जाती है.
इस योजना के साथ ही 600 ‘जननी एक्सप्रेस वाहन ‘राज्य में चल रहे हैं, जो गर्भवती एवं नव प्रसूता महिलाओं को घर ,तथा घर से अस्पताल ले जाने में सहायक होते हैं.
राजस्थान में सुदूर इलाकों ,गांवों में  कम उम्र की  बालिकाओं का विवाह दशकों से होता रहा है. अल्पवयस्क बालक -बालिका विवाह के बंधन में तो बंध  जाते हैं, किंतु इसे निभा पाने तथा उत्तरदायित्व संभालने में नितांत अक्षम होते हैं. दूसरी तरफ कम उम्र की लड़कियों का विवाह होने से उनके स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की भी अनदेखी होती है.
इसीलिए वर्ष 2016 -17 में UNFPA और UNISEF के समर्थन में राज्य में साझा अभियान ‘बाल विवाह मुक्ति’ प्रारंभ किया गया .वर्ष 2012-13 की वार्षिक रिपोर्ट में दर्शाया गया कि –राजस्थान में 51.2% लड़कियों का 18 वर्ष की आयु से पूर्व विवाह कर दिया गया. यह ‘बाल विवाह’ अधिनियम 2006 का निषेध है. इसके साथ ही कामकाजी और गैर- कामकाजी महिलाओं के शिशुओं की देखभाल तथा उचित पालन -पोषण हेतु ‘नंद घर  योजना’ चल रही है .जिसमें गैर- सरकारी संगठन एवं कारपोरेट जगत  के लोग किसी भी एक आंगनवाड़ी को गोद लेते हैं और संबंधित आंगनवाड़ी के द्वारा महिलाओं के  स्वास्थ्य, सुरक्षा, और शिक्षा की व्यवस्था करते हैं. राजस्थान में बालिकाओं  हेतु ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना चल रही है. जिसके द्वारा लड़कियों की शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है.
प्रत्येक 24 जनवरी को ‘राष्ट्रीय कन्या दिवस’ मनाया जाता है. इस दिन स्त्रियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों ,संगठनों को ‘गरिमा बालिका संरक्षण ‘एवं स्त्रियों का सम्मान करने वाले को 25 हजार  नगद व मान्यता प्रमाण पत्र दिए जाते हैं. राजस्थान में बालिका शिक्षा हेतु जागरूकता लाने हेतु प्रयास किए गए हैं .
महिलाओं के शिक्षित ,स्वस्थ और विकसित होने से ही परिवार ,समाज, और राष्ट्र शिक्षित, स्वस्थ तथा विकसित होगा .राजस्थान में बाल विवाह, दहेज प्रणाली के विरोध में तथा अनियमित रूप से बालिकाओं के स्कूल छुड़ा देने या स्कूल न भेजने वाले माता-पिता, अभिभावकों में बालिका शिक्षा हेतु जागरूकता लाने के लिए भी तरह- तरह के प्रयास किए गए हैं .साथ ही कक्षा 6 से कक्षा 8 तक में पढ़ रही बालिकाओं को शामिल कर 9206 नोडल स्कूल और 200 केजीबीवी में ‘मीना मंचों ‘ का गठन किया गया है.
बालिकाओं की गुणवत्तापरक शिक्षा हेतु ‘स्कूल निगरानी कार्यक्रम ‘शुरू किया गया. 2015 -16 के प्रथम चरण में 6742 स्कूलों की निगरानी की गई थी .इसका उद्देश्य भौतिक व मानव संसाधन स्कूल के वातावरण ,शिक्षण सीखने की प्रक्रिया ,हिंदी ,गणित, अंग्रेजी में छात्रों के सीखने के स्तर की स्थिति का पर्यवेक्षण  करना है.
बालिकाओं की माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई पहल में  -‘साइकिल वितरण योजना ‘, ‘फिक्स्ड डिपाजिट रसीद’ (एफडीआर) ‘गार्गी पुरस्कार’, ‘हमारी बेटी योजना’,  ‘बालिका शिक्षा फाउंडेशन’ आदि है. यद्यपि महिलाओं का विकास और सशक्तिकरण राजस्थान सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में है.. तथापि महिलाओं के समग्र विकास की परिकल्पना तब तक यथार्थ में परिणत नहीं हो पाएगी, जब तक महिलाओं के सामाजिक- आर्थिक विकास की सभी धाराओं में महिलाओं के योगदान को मान्यता नहीं मिलती.
राजस्थान में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 6,86,21,012  थी. इसमें से महिला जनसंख्या 3,30,00,926 थी .राजस्थान में साक्षरता का प्रतिशत  67.06 प्रतिशत रहा है. राजस्थान में पुरुष साक्षरता जहां 80.51 प्रतिशत है .वहीं स्त्री साक्षरता  52.66 प्रतिशत है. राजस्थान में कोटा जिले में सर्वाधिक महिला साक्षरता है .यहां स्त्री साक्षरता 62.32 प्रतिशत है .वहीं   जालौर जिला में मात्र 38.73% ही महिलाएं साक्षर हैं.
लिंगानुपात, साक्षरता ,स्वास्थ्य, रोजगार ,आदि विभिन्न क्षेत्रों में राजस्थान की महिलाओं की स्थिति में सन 1991 की तुलना में काफी सुधार देखने में आया है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर 922 महिलाएं हैं .जटिल सामाजिक -आर्थिक स्थिति वाले इस राज्य में महिलाओं की बढ़त अच्छी खबर है .
फिर भी सांस्कृतिक परंपराओं और वीरता के महाकाव्य कथाओं के किवदंती रहे, इस राज्य के महिलाओं की पिछड़ी स्थिति अपने अस्तित्व का नेतृत्व चाहती है .राजस्थान में लड़कियों और महिलाओं के खराब स्वास्थ्य और शिक्षा, सामाजिक भेदभाव ,दमन, गरीबी और अभाव से  निहायत पीड़ित महिलाओं का औसत 64.64 प्रतिशत तक रहा है.
महिला आबादी को मुख्यधारा में लाने के लिए राजस्थान महिला आयोग की स्थापना की गई. राजस्थान महिला आयोग का गठन 15 मई 1991 को सांविधिक निकाय के रूप में किया गया .
महिलाओं की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विकास के लिए तथा इनके सुदृढ़ीकरण हेतु विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का क्रियान्वयन विभिन्न विभागों द्वारा किया जा रहा है.
महिलाओं को सुलभ न्याय दिलाने हेतु पारिवारिक न्यायालय की स्थापना की गई है. इस योजना के तहत सभी जिला मुख्यालयों, महिला थाना एवं महिला सुरक्षा सलाह केंद्र की स्थापना कर –सामाजिक – पारिवारिक या किसी भी स्तर पर पीड़ित ,शोषित, हिंसा से व्यथित महिला को तत्काल सहायता एवं संरक्षण दिलाना है.
राजस्थान में बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए बालिका शिक्षा फाउंडेशन ने ‘राजस्थान पदमकशी पुरस्कार योजना’ 2018
प्रारंभ किया है. इस योजना के तहत कक्षा 12 में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाली छात्राओं को स्कूटी दिया जाता है .
22 जनवरी 2018 को जिला स्तरीय कार्यक्रम जो राममवी राजसमंदर में आयोजित था ,इस में पिछड़ी अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बालिकाओं  को शिक्षित करने, एवं शिक्षा हेतु  उन्हें प्रोत्साहित करने हेतु कक्षा 8 में प्रवेश करने पर स्कूटी दिया जाएगा.
इसके अलावा भारतीय डाक विभाग और श्रम रोजगार मंत्रालय में बेरोजगार युवाओं के रोजगार पंजीकरण हेतु ‘राजस्थान डाकघर रोजगार सेवा केंद्र’ पंजीकरण/ डाकघर रोजगार सेवा केंद्र 2018 प्रारंभ किया है.
गत वर्ष नवंबर 2017 राजस्थान में ‘वसुंधरा सखी वाहन योजना का प्रारंभ किया गया है .इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, आसान और गंतव्य स्थल तक उन्हें मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करना है. राजस्थान में महिला जनसंख्या वृद्धि हेतु तथा कन्या भ्रूण हत्या रोकने तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राजश्री योजना’ 8 मार्च 2016 चल रही है.
महिला से ही परिवार, समाज एवं राष्ट्र का विकास होता है. उससे ही परिवार और समाज को सही दिशा मिलती है. इसीलिए राजस्थान में महिला सशक्तिकरण एवं विकास हेतु ‘राजस्थान भामाशाह योजना’ प्रारंभ की गई है .इस योजना के तहत सभी सरकारी लाभ सीधे महिला लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित होता है .निश्चय ही इससे भ्रष्टाचार को कम करने में मदद मिलती है. इसमें सबसे प्रमुख बात यह है कि –इस योजना में घर की सबसे बड़ी महिला के नाम पर ही बैंक में खाते खोले जा रहे हैं. इस योजना के तहत 1 करोड़  40 लाख से अधिक परिवारों और 5 करोड़ 8 लाख से अधिक व्यक्तियों को पंजीकृत किया गया है. 6736 करोड़ से ज्यादा की रकम सीधे बैंक खातों में जमा कराई गई है .
वर्तमान समय में केंद्र सरकार हर व्यक्ति को किसी भी एक कौशल में प्रवीण होने पर बल दे रही है. हर स्त्री- पुरुष जो 18 से 35 वर्ष आयु के हैं, वह अपनी रुचि अनुसार कोई भी कौशल सीख कर अपना रोजगार शुरू करके आमदनी कमा सकते हैं. निश्चय ही इससे आर्थिक समृद्धि प्रति व्यक्ति और परिवार में बढ़ेगी. जिससे देश में निर्धनता, आर्थिक असंतुलन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार आदि दूर होगा. सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में दिनों -दिन बढ़ती भीड़ का दबाव भी से कम होगा .साथ ही गांव ,कस्बे  और छोटे शहरों के लोगों का बड़े शहरों की ओर तीव्र पलायन भी थमेगा. क्योंकि हर व्यक्ति जो कौशल प्राप्त है वह अपने घर ,अपने क्षेत्र ,अपने गांव -शहर में ही रहकर आमदनी कमा सकेगा . इसलिए राजस्थान में भी युवा महिलाओं को रोजगार कुशल बनाने हेतु ‘कौशल विकास प्रशिक्षण’ चलाया जा रहा है. जिसके तहत ना केवल इस में युवाओं को रोजगार प्रशिक्षण ही मिलता है, बल्कि उन्हें अपना रोजगार शुरू करने हेतु रियायती दर पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाता है. इसके तहत अब तक राज्य में 11 लाख से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा चुके हैं .राज्य में लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने हेतु ‘हमारी बेटी योजना ‘प्रारंभ की गई है .10वीं और 12वीं कक्षा में प्रथम आने वाली लड़कियों के लिए यह योजना बहुत ही लाभकारी है. गत वर्ष 92 हजार लड़कियों को इस योजना का लाभ मिला.
‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ महिलाओं को धुंए और घुटन से मुक्त कराने में काफी सफल रही है. हर घर को एलपीजी कनेक्शन देने वाली यह योजना महिलाओं को सुरक्षित तथा स्वस्थ रखने एवं एक विशेष पहचान देने के साथ ही धुआं रहित, वातावरण प्रदूषण में कमी और स्वच्छ जीवन देने में भी मील का पत्थर साबित हो रही है .इस ‘उज्ज्वला योजना’ का मुख्यमंत्र है –स्वच्छ ईंधन ,बेहतर जीवन और महिलाओं को  सम्मान. उज्ज्वला योजना के तहत पिछले वित्त वर्ष में देश में 2.20 करोड़ नए एलपीजी कनेक्शन दिए गए.
जनसंख्या नियंत्रण हेतु ‘अंतरा इंजेक्शन योजना ‘प्रारंभ की गई है. इससे महिला स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी तथा बच्चों में अंतर रखना भी आसान होगा.
मातृ मृत्यु दर एवं उच्च शिशु मृत्यु दर कम करने हेतु राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा ‘जननी शिशु सुरक्षा योजना ‘चल रही है .इसमें गर्भवती स्त्रियों और नवजात शिशुओं को मुफ्त चिकित्सा एवं अन्य सुविधाएं जैसे मुफ्त दवाइयां ,उपभोग्य सामग्रियां, प्रयोगशाला  परीक्षण, भोजन ,रक्त की सुविधा , रेफरल परिवहन सुविधाएं दी जाती है.
इस योजना के साथ ही 600 ‘जननी एक्सप्रेस वाहन ‘राज्य में चल रहे हैं, जो गर्भवती एवं नव प्रसूता महिलाओं को घर ,तथा घर से अस्पताल ले जाने में सहायक होते हैं.
राजस्थान में सुदूर इलाकों ,गांवों में  कम उम्र की  बालिकाओं का विवाह दशकों से होता रहा है. अल्पवयस्क बालक -बालिका विवाह के बंधन में तो बंध  जाते हैं, किंतु इसे निभा पाने तथा उत्तरदायित्व संभालने में नितांत अक्षम होते हैं. दूसरी तरफ कम उम्र की लड़कियों का विवाह होने से उनके स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की भी अनदेखी होती है.
इसीलिए वर्ष 2016 -17 में UNFPA और UNISEF के समर्थन में राज्य में साझा अभियान ‘बाल विवाह मुक्ति’ प्रारंभ किया गया .वर्ष 2012-13 की वार्षिक रिपोर्ट में दर्शाया गया कि –राजस्थान में 51.2% लड़कियों का 18 वर्ष की आयु से पूर्व विवाह कर दिया गया. यह ‘बाल विवाह’ अधिनियम 2006 का निषेध है. इसके साथ ही कामकाजी और गैर- कामकाजी महिलाओं के शिशुओं की देखभाल तथा उचित पालन -पोषण हेतु ‘नंद घर  योजना’ चल रही है .जिसमें गैर- सरकारी संगठन एवं कारपोरेट जगत  के लोग किसी भी एक आंगनवाड़ी को गोद लेते हैं और संबंधित आंगनवाड़ी के द्वारा महिलाओं के  स्वास्थ्य, सुरक्षा, और शिक्षा की व्यवस्था करते हैं. राजस्थान में बालिकाओं  हेतु ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना चल रही है. जिसके द्वारा लड़कियों की शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है.
प्रत्येक 24 जनवरी को ‘राष्ट्रीय कन्या दिवस’ मनाया जाता है. इस दिन स्त्रियों को संरक्षण देने वाले व्यक्तियों ,संगठनों को ‘गरिमा बालिका संरक्षण ‘एवं स्त्रियों का सम्मान करने वाले को 25 हजार  नगद व मान्यता प्रमाण पत्र दिए जाते हैं. राजस्थान में बालिका शिक्षा हेतु जागरूकता लाने हेतु प्रयास किए गए हैं .
महिलाओं के शिक्षित ,स्वस्थ और विकसित होने से ही परिवार ,समाज, और राष्ट्र शिक्षित, स्वस्थ तथा विकसित होगा .राजस्थान में बाल विवाह, दहेज प्रणाली के विरोध में तथा अनियमित रूप से बालिकाओं के स्कूल छुड़ा देने या स्कूल न भेजने वाले माता-पिता, अभिभावकों में बालिका शिक्षा हेतु जागरूकता लाने के लिए भी तरह- तरह के प्रयास किए गए हैं .साथ ही कक्षा 6 से कक्षा 8 तक में पढ़ रही बालिकाओं को शामिल कर 9206 नोडल स्कूल और 200 केजीबीवी में ‘मीना मंचों ‘ का गठन किया गया है.
बालिकाओं की गुणवत्तापरक शिक्षा हेतु ‘स्कूल निगरानी कार्यक्रम ‘शुरू किया गया. 2015 -16 के प्रथम चरण में 6742 स्कूलों की निगरानी की गई थी .इसका उद्देश्य भौतिक व मानव संसाधन स्कूल के वातावरण ,शिक्षण सीखने की प्रक्रिया ,हिंदी ,गणित, अंग्रेजी में छात्रों के सीखने के स्तर की स्थिति का पर्यवेक्षण  करना है.
बालिकाओं की माध्यमिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए की गई पहल में  -‘साइकिल वितरण योजना ‘, ‘फिक्स्ड डिपाजिट रसीद’ (एफडीआर) ‘गार्गी पुरस्कार’, ‘हमारी बेटी योजना’,  ‘बालिका शिक्षा फाउंडेशन’ आदि है. यद्यपि महिलाओं का विकास और सशक्तिकरण राजस्थान सरकार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में है.. तथापि महिलाओं के समग्र विकास की परिकल्पना तब तक यथार्थ में परिणत नहीं हो पाएगी, जब तक महिलाओं के सामाजिक- आर्थिक विकास की सभी धाराओं में महिलाओं के योगदान को मान्यता नहीं मिलती.

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