आरक्षण रक्षण है मानवों का

आरक्षण रक्षण है मानवों का
आरक्षण रक्षण करता है
मानवीय समानता का!

आरक्षण नाश करता है
पिछड़े जन की विषमता का!

आरक्षण हितरक्षक है
हक वंचित दलित आदिवासी का!

आरक्षण रक्षण है
असुरक्षित नारियों के जीवन का!

आरक्षण दर्शन है
अवसर विहीनता से दलित, पिछड़े,
असहाय बच्चे,महिला जीवन को बचाने का!

आरक्षण संरक्षक है
हर जाति धर्म के मेधावी छात्र-छात्राओं का!

आरम्भ से भारतजन का है चार स्तरीकरण,
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र-अंत्यज-हरिजन!

भारत में बड़ी असमानता है रंग रूप कद में,
भारत में भगवान होते हैं श्याम वर्ण रंग के,
पर भारत में बहुत ही गुमान है गोरे रंग पे!

एक वो जो छः फीट से ऊंचे कद के होते,
जो छः फुट ऊंची दीवार के पार दृश्य को
खड़े-खड़े बिना उचके सहजता से देख लेते!

दूसरे की ऊंचाई तीन इंच कम है दीवार से,
जो ऊचककर भी देख ना पाते उसपार को!

तीसरे की ऊंचाई छ: इंच कम है दीवार से,
चौथे की ऊंचाई नौ इंच कम है दीवार से!

दूसरे-तीसरे-चौथे व्यक्ति बिना वाह्य मदद,
बिना आरक्षण, कुछ नहीं देखते उसपार के!

दीवार के उसपार दृश्य को देखने के लिए
पहले को आरक्षण की बैसाखी नहीं चाहिए!

दूसरे को दीवार के उस पार देखने के लिए
तीन इंच से बड़ी ऊंचाई का टूल होना चाहिए!

तीसरे-चौथे को छः-नौ इंच से बड़ा टूल चाहिए!
आरक्षण का ये बंटवारा मुनासिब है देश के लिए!

दबे-कुचले, गरीब को ऐसे आरक्षण देकर उनको
शैक्षिक,सामाजिक,आर्थिक समता दी जा सकती!

आरक्षण को समाप्त करना
असहाय दीन दलितों को हक वंचित करने जैसा!
आरक्षण को हटा देना सदियों से
जातिगत गाली सुन रहे लोगों को ठगने जैसा!

आरक्षण समाप्त करना, कद्दावर लोगों हेतु
ट्रेन के सब सीट को मुहैय्या करा देने जैसा!

थ्री टायर के तीनों बैठने वाले सीट को सिर्फ
एक यात्री को टांगें पसारकर सोने देने जैसा,
और शयन हेतु सीट हटा देना बीच-ऊपर का!

भारत सदा से द्वंद्व सामासिक देश रहा है,
अगड़े-पिछड़े, दलित-अंत्यज, नर व नारी का!

पांच फीट तीन इंच से, छ’: फीट के ऊपर
ऊंचाई के लोग, रहते अपने भारत देश में,
नारी औसत पांच फीट पांच इंच की होती!

आरक्षण समाप्ति की वकालत करने से पहले
किसी सरकारी दफ्तर के दृश्य देखना चाहिए!

एक समान कुर्सी में कोई धंसे-धंसे बैठे मिलेंगे,
कोई अकड़े-अकड़े, तो कोई उकड़ू-उकड़ू से बैठे,
कुछ निर्भय, कुछ डरे-सहमे से, कुछ जैसे-तैसे!

शिक्षा की ऐसी स्थिति कि टेन सीजीपीए अंकवाले,
नोटिंग-ड्राफ्टिंग, हिन्दी-अंग्रेजी में नहीं लिख सकते!

बेहतर हो जनसंख्या अनुपात में जाति-जनजाति को
आधी सीटें आरक्षित कर बांकी अनारक्षित कर दो!

सौ में पचास प्रतिशत सीटों को आरक्षित कर दो,
ताकि किसी जाति की प्रतिभा हक वंचित नहीं हो!

आरक्षण जीवन के हर क्षेत्र में जरूरी है,
तुम्हें जाना है कहीं तो बिना आरक्षण के
बस पड़ाव,ट्रेन स्टेशन,एयरपोर्ट जाते हो क्या?

आरक्षण सबको चाहिए ब्राह्मण से अंत्यज तक,
आज सभी आरक्षित गुलाब फूल से पंकज तक!

फिर आरक्षण शब्द से इतनी अधिक दूरी क्यों?
यदि आरक्षण का परित्याग करना चाहता कोई
तो आवेदन में आरक्षण त्यागने का कॉलम हो,
फिर कितने लोग आरक्षण छोड़ते हैं, देख लो?
विनय कुमार विनायक

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