More
    Homeसाहित्‍यकविताबोली व गोली एक जाति की होती

    बोली व गोली एक जाति की होती

    —विनय कुमार विनायक
    बोली व गोली एक जाति की होती,
    बोली गोली से अधिक प्रभावी होती!
    गोली एकबार प्रहार कर मिट जाती,
    बोली की चोट आजीवन तक रहती!

    मधुर बोली मुहावरे जैसी प्रिय होती,
    मुंह वरे जिसे वह मुहावरे की बोली!
    बोली घायल करती, मरहम लगाती,
    बोली हमेशा गोली से, घातक होती!

    बोली से किसी को घात नहीं पहुंचे,
    बोली का दुःख, वाचिक हिंसा होती!
    भगवान कृष्ण के गीता में वचन ये,
    हितकर,प्रिय बोली है, तप वाणी के!

    मनन कर बोलने वाले होते हैं मुनि,
    वाणी का संयमी हैं, जैन मतावलंबी!
    मुहावरे व लोकोक्ति है अभिव्यक्ति,
    मुख से निकली सुन्दर वाणियों की!

    मुहावरे में अन्यार्थ,लक्ष्यार्थ,व्यंग्यार्थ,
    प्रसिद्ध साहित्यकारों के वाक्चातुर्य!
    मुहावरे मानकभाषा से लोकभाषा में,
    कहावत लोकभाषा से मानकभाषा में!

    मुहावरे,-लोकोक्ति काफी प्रांजल होते,
    लेखक-कवियों के प्रिय संक्षेपण होते!
    मुहावरे, लोकोक्ति और कहावत ऐसे,
    वाणी हिंसा न होती जिसके योग से!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Must Read

    spot_img