सीमा उल्लघंन का मुंहतोड़ जवाब

संदर्भः सर्जिकल स्ट्राइक-2

प्रमोद भार्गव

यह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सेना को दी गई खुली छूट का ही परिणाम है कि भारतीय थल सेना ने दूसरी बार नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तानी सेना के जवानों को मार गिराया है। यह पैगाम पाक फौज की उस कायराना करतूत का बदला है, जो उसके बलों ने 23 दिसंबर 2017 को अंजाम दिया था। इस हमले में भारतीय सेना के एक मेजर सहित चार सैनिक शहीद हो गए थे। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब पुंछ के रावलकोट में पाकिस्तान की सीमा के अंदर उसके तीन जवान ढेर कर भारत ने पाक को एक बार फिर जता दिया है कि सीमा पर अराजकता अब बर्दाश्त के बाहर हो गई है। उसकी कारगुजारियों का जवाब उसी की भाषा में देने का संकल्प भारतीय सेना ने ले लिया है। क्योंकि जो खबरें मिली हैं, उनसे साफ हुआ है कि इस जवाबी हमले को अंजाम देने का निर्णय स्व-विवेक से स्वयं सेना की स्थानीय ईकाई ने लिया हैं। इस सफल परिणाम से तय हुआ है कि सेना को आजादी देने की केंद्र की नीति कारगर परिणाम दे रही हैं। यही सिलसिला भविष्य में भी जारी रहा तो तय है कि पाकिस्तानी बलों या उसके इशारों पर काम करने वाले आतंकियों को अब बचना आसान नहीं होगा।

नेतृत्व की इच्छाशक्ति और सेना के दुस्साहस का ही परिणाम है कि सेना ने लक्ष्मण रेखा लांघकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 3 किमी भीतर घुसकर करारा जवाब दिया है। पहली सर्जिकल स्ट्राइक बनाम लक्षित हमले में 38 आतंकी और पाक सेना के दो सैनिक भी मारे गए थे। इस दूसरी स्ट्राइक में तीन पाक रेंजर ढेर हुए हैं। भारतीय सेना के सीमा पर जो हाथ अब तक बंधे हुए थे, वह अब खुल गए हैं और सेना किसी भी आतंक की कार्यवाही का जवाब देने को तैयार है। बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसके द्वारा सीमा पर युद्ध विराम का उल्लंघन और आतंकी वारदातों को शह देने का प्रपंच बदस्तूर है। पाकिस्तानी सेना को सबक सिखाने की इस दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक के ठीक पहले भारतीय जवानों ने जम्मू-कश्मीर के झांगर में नियंत्रण रेखा के पास एक पाकिस्तानी स्नाइपर ढेर किया और ठीक इसके बाद पुलवामा में लंबे समय से वांछित आतंकी नूर मोहम्मद तांत्रे उर्फ छोटा नूरा को ठिकाने लगाया। इस बौने आतंकी का मारा जाना सीधे-सीधे जैश-ए-मोहम्मद और परोक्ष रूप से पाक में बैठे उसके आकाओं को संदेश है कि अब तुम्हारे किराए के टट्टूओं की खैर नहीं। घाटी में आतंकवादी ढांचे को दुबारा खड़ा करने में इस चार फीट दो इंच के बौने नूरा की अहम् भूमिका रहीं है। इसे पोटा अदालत ने ‘मौत का सौदागर‘ करार दिया हुआ था। इस साल अक्टूबर में श्रीनगर एयरपोर्ट के पास बीएसएफ शिविर पर हुए आतंकी हमले समेत वह कई वारदातों में शामिल था। इस नाते वह भारत के अर्द्धसैनिक बलों के लिए मुसीबत बना हुआ था। साफ है, सर्जिकल स्ट्राइक की इस दूसरी कड़ी को पाकिस्तान को उसी की भाषा में सबक सिखाने के रूप में देखा जाना चाहिए।

इन सर्जिकल स्ट्राइक से पूरी दुनिया को यह पैगाम गया है कि भारतीय फौज को खुली छूट दे दी जाए तो वह आतंकियों के ठिकाने नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। इससे यह भी संदेश गया है कि सेना और देश के नेतृत्व का रुख अब रक्षात्मक की बजाय आक्रामक हो गया है। भारत सरकार द्वारा  सेना को नियंत्रण रेखा पार करने की इजाजत इस तथ्य की पुष्टि है। पाक के विरुद्ध कोई कड़ी कार्यवाही होगी, यह सरकार द्वारा उरी हमले के बाद पाक की घेराबंदी से निरंतर सामने आ रहा है। बावजूद पाकिस्तान के सत्ताधारी दल और सेना के प्रमुखों को अपने नागरिकों और फौजियों की कतई परवाह नहीं है। वहां की सेना और गुप्तचर संगठन लगातार नादान युवकों को आतंकवादी बनने का प्रशिक्षण देकर भारत पर अप्रत्यक्ष युद्ध लादे हुए हैं। यही वजह रही कि न तो पाक ने पहली सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अपनी नाकाम हरकतों पर विराम लगाया और न ही अब लगाने वाला है। उसकी तरफ से युद्ध विराम का उल्लंघन और नियंत्रण रेखा से घुसपैठ भविष्य में भी जारी रहने वाली है। इसलिए भारतीय शीर्ष नेतृत्व और सेना को जरूरी है कि वे पाक की तरफ से घुसपैठ और सेना पर धोखे से किए जा रहे हमलों का इसी रूप में जवाब दें। साथ ही भारत को अब कूटनीतिक दृष्टिकोण भी अपनाने की जरूरत है, जिससे पाकिस्तानी शासक वर्ग युद्ध विराम के लिए विवश नजर आए। इस दृष्टि से पाकिस्तान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो आतंकवादी देश घोषित करने की मुहिम चलाई हुई है, उसे और तेज करने की जरूरत है। पाक से व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। सिंधु जल-बंटवारा संधि पर पुनर्विचार हो ? यदि भारत सरकार इन पहलों को आगे बढ़ाती है तो पाकिस्तान नापाक हरकतों पर लगाम लगाने के लिए विवश हो सकता है ?

इन स्ट्राइक के बाद अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में चिंता भी दिखाई दे रही है। क्योंकि भारत और पाक दोनों ही परमाणु शक्ति से संपन्न देश हैं। चूंकि भारत विकासशील देश है और अपनी अवाम की चिंता रखता है। इसलिए उसे वैश्विक समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं हैं। भारत युद्ध छेड़ने की मानसा भी नहीं रखता है। हां, भारत ने अपनी संप्रभुता की मर्यादा का ख्याल रखते हुए सर्जिकल स्ट्राइक-2 को अंजाम देकर पाकिस्तान को यह समझा दी है कि वह उसे उकसाने से बाज आए। अन्यथा वह ऐसी कार्यवाहियां और भी कर सकता है। अभी तक सर्जिकल स्ट्राइक में अमेरिका और इजराइल की सेना को ही पेशेवर दक्षता हासिल थी, लेकिन अब सर्जिकल स्ट्राइक के दो आॅपरेशन को अंजाम देकर भारतीय सेना ने जता दिया है कि उसने भी सर्जिकल स्ट्राइक आॅपरेशन करने में कुशलता हासिल कर ली है। हालांकि भारत ने 2015 में म्यांमार में इसी तरह का आॅपरेशन किया था, जिसमें भारतीय सेना ने 38 नगा उग्रवादियों को म्यांमार की सीमा में घुसकर मौत के घाट उतार दिया था, लेकिन यह आॅपरेशन म्यांमार सरकार की सहमति से हुआ था। अमेरिका इस तरह के आॅपरेशन ईराक में सद्धाम हुसैन और पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन को ठिकाने लगाने की दृष्टि से कर चुका है।

पाकिस्तान चीन की शह के चलते बेखौफ युद्ध विराम का उल्लंघन कर रहा है। दूसरी तरफ चीन पाक के साथ मिलकर भारत को घेरने की कोशिश में लगा है। क्योंकि चीन को यह चिंता लगातार सता रही है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था की होड़ में कहीं उससे आगे नहीं निकल जाए। इसीलिए पाक और चीन नई कुटिलता बरतते हुए पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने वाले ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा योजना‘ से अफगानिस्तान को भी जोड़ने की कवायद में लग गए हैं। भारत ने यदि इसको तत्काल नहीं रोका तो भारत के अफगानिस्तान से जो द्विपक्षीय मधुर संबंध बने हुए हैं, उन्हें पलीता लग सकता है।

हालांकि इंदिरा गांधी के कार्यकाल 1971 में जब भारत और पाक के बीच युद्ध हुआ था, तब भारत के सशस्त्र बलों ने नियंत्रण रेखा को पार किया था। लेकिन 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सेना को नियंत्रण रेखा पार करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। ऐसा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते किया था। किंतु अब मोदी के राज में सेना को खुली छूट मिल गई है। गोया, इन सर्जिकल आॅपरेशनों के जरिए सेना ने भी जता दिया है कि उसमें समूचे पाक अधिकृत कश्मीर के साथ-साथ गिलगित और बाल्तिस्तान तक इसी तर्ज पर हमला करने और मनचाहा लक्ष्य साधने की शक्ति है। भारत अब शायद इस मनस्थिति में भी आ गया है कि यदि पाक भारत के विरुद्ध लघु पैमाने पर भी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की भूल करता है तो भारत जबाव में बड़े परमाणु हमले की कार्यवाही कर सकता है। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी चिंतित है। लेकिन भारत ने यह कार्यवाही सिर्फ पाक को चेताने और भारत के नागरिकों को यह विष्वास दिलाने के लिए की है कि आतंक से निपटने के लिए सेना और सरकार किसी भी हद तक जा सकते हैं।

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