लेखक परिचय

सिद्धार्थ शंकर गौतम

सिद्धार्थ शंकर गौतम

ललितपुर(उत्तरप्रदेश) में जन्‍मे सिद्धार्थजी ने स्कूली शिक्षा जामनगर (गुजरात) से प्राप्त की, ज़िन्दगी क्या है इसे पुणे (महाराष्ट्र) में जाना और जीना इंदौर/उज्जैन (मध्यप्रदेश) में सीखा। पढ़ाई-लिखाई से उन्‍हें छुटकारा मिला तो घुमक्कड़ी जीवन व्यतीत कर भारत को करीब से देखा। वर्तमान में उनका केन्‍द्र भोपाल (मध्यप्रदेश) है। पेशे से पत्रकार हैं, सो अपने आसपास जो भी घटित महसूसते हैं उसे कागज़ की कतरनों पर लेखन के माध्यम से उड़ेल देते हैं। राजनीति पसंदीदा विषय है किन्तु जब समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का भान होता है तो सामाजिक विषयों पर भी जमकर लिखते हैं। वर्तमान में दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, हरिभूमि, पत्रिका, नवभारत, राज एक्सप्रेस, प्रदेश टुडे, राष्ट्रीय सहारा, जनसंदेश टाइम्स, डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट, सन्मार्ग, दैनिक दबंग दुनिया, स्वदेश, आचरण (सभी समाचार पत्र), हमसमवेत, एक्सप्रेस न्यूज़ (हिंदी भाषी न्यूज़ एजेंसी) सहित कई वेबसाइटों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं और आज भी उन्‍हें अपनी लेखनी में धार का इंतज़ार है।

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सिद्धार्थ शंकर गौतम

राजनीति का चोला ओढ़कर अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम ने पहले ही वार में राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है| हालांकि जिस मुद्दे को उन्होंने उठाया है वह कोई पहली बार मीडिया की सुर्खियां नहीं बना है| हाँ, इतना अवश्य है कि राजनीति में कद्दावर नेहरु-गाँधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वढेरा की संपत्ति और मात्र ३ वर्षों में ३०० करोड़ का आसामी बनने की पोथी खोलकर टीम केजरीवाल ने पूरी कांग्रेस पार्टी को अचंभित कर दिया है| इससे पूर्व भी वढेरा भारतीय राजनीति में ऐसी अबूझ पहेली रहे हैं जिनके बारे में कोई भी पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है| याद कीजिए, उत्तरप्रदेश चुनाव के दौरान किस तरह उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मोटरसाइकिल रैली निकाल दी थी| तब ऐसा प्रतीत हुआ था कि वढेरा राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते गाँधी-नेहरु परिवार के गढ़ में सेंधमारी कर रहे हैं किन्तु १० जनपथ के कड़े एतराज के बाद उन्होंने चुप्पी साध ली| ऐसी भी खबरें आईं कि वढेरा और प्रियंका अब अलग रहने लगे हैं| हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई किन्तु इतना अवश्य है कि वढेरा की बढ़ती हसरतों के चलते गाँधी परिवार उनसे किनारा करने का मन बनाता रहा| पर अब जबकि वढेरा पर केजरीवाल और उनकी टीम ने गंभीर आरोप लगाए हैं और मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी उनके विरुद्ध मुखर हो गई है, ऐसे में सोनिया सहित अन्य कांग्रेसियों का वढेरा के पक्ष में आना परिवार में कथित बिखराव को समेटने की कोशिश के साथ ही पार्टी में भी जान फूंक सकता है| चूँकि यह सर्वविदित है कि वढेरा के विरुद्ध जांच तो होने से रही और यदि अधिक बवाल हुआ तो डीएलएफ की बलि ली जाना तय है लिहाजा वढेरा मजे से अपना कारोबारी विस्तार कर सकते हैं| यह हमारे देश की विडंबना ही है कि हम आज भी गाँधी-नेहरु परिवार के विरुद्ध उनके त्याग को देखते हुए कुछ नहीं कर सकते| वढेरा के कारोबार और उससे उपजी अकूत दौलत तो एक बानगी है इस परिवार के त्याग की| टीम केजरीवाल ने भी बेकार में वढेरा को लपेटे में लिया| पता नहीं क्यों, उनकी इस मुहिम में भी षड़यंत्र की बू आ रही है| कहीं ऐसा तो नहीं कि टीम केजरीवाल अप्रत्यक्ष रूप से १० जनपथ द्वारा संचालित होने लगी हो| ऐसा इसलिए भी संभव है क्योंकि वढेरा को सबक सिखाना भी ज़रूरी था वरना उनकी बेजा हरकतें भविष्य में सोनिया गाँधी के लिए ही मुश्किलें पैदा करतीं|

 

फिर सोचने वाली बात है कि गाँधी-नेहरु परिवार का प्रभावशाली और मीडिया की सुर्खियां बढ़ाने वाला दामाद मात्र ३०० करोड़ की संपत्ति का मालिक कैसे हो सकता है? या तो केजरीवाल और उनकी टीम ने वढेरा की संपत्तियों की जांच-पड़ताल ठीक से नहीं की या मात्र देश में राजनीतिक सनसनी और अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए केजरीवाल ने भी ओछी राजनीति का तरीका अख्तियार कर लिया है| आप खुद ही सोचिए, क्या वढेरा मात्र ३०० करोड़ की संपत्ति के मालिक हो सकते हैं? इससे अच्छा तो केजरीवाल एंड कंपनी उनकी पत्नी और कांग्रेस की उत्तराधिकारी प्रियंका गाँधी की संपत्तियों का लेखा-जोखा रखती, कम से कम देश भर में कांग्रेस के विरुद्ध दुष्प्रचार तो होता| मगर केजरीवाल और उनकी टीम ने यह सुनहरा मौका भी गवां दिया है| अब वढेरा के खिलाफ मोर्चा खोल केजरीवाल ने जो माहौल बना दिया है उसने तमाम घोटालों और राष्ट्रीय मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है| वैसे भी वढेरा कांग्रेस और भाजपा के लिए बहस का मुद्दा हो सकते हैं मगर देश की आम जनता को वढेरा से कोई सरोकार नहीं है| क्या जनता यह नहीं जानती-समझती कि राजनीति आज देशहित के बजाए स्वहित का साधन मात्र बन गई है| अब तो कहा भी जाने लगा है कि यदि आप धनकुबेर बनना चाहते हैं तो राजनीति से सरल राह कोई नहीं है| फिर वर्तमान में जब हर नेता के पास अरबों-करोड़ों की संपत्ति है तब वढेरा कोई सतयुग में तो पैदा हुए नहीं थे कि अपने जीवन यापन के लिए धन का प्रबंध भी न कर पाते| तब वढेरा के बहाने राजनीतिक हितों को साधना कहाँ तक उचित है? फिर किसी पर उंगली उठाने से पहले उस व्यक्ति के बारे में पूरी तरह जांच-पड़ताल कर लेनी चाहिए| पर यहाँ तो केजरीवाल और उनकी टीम ने मूर्खता का ही परिचय दिया है| आखिर जिस हस्ती की जांच तमाम राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर नहीं होती, भारतीय जांच-एजेंसियां वढेरा की जांच करने का साहस जुटा पाएंगी? ऐसे में केजरीवाल और टीम का असली मंतव्य कहीं अधूरा ही न रह जाए

One Response to “राबर्ट लीला के फेर में टीम केजरीवाल”

  1. शिवेंद्र मोहन सिंह

    केजरीवाल टीम ने शिकार बढ़िया पकड़ा है अगर शिकार की कुर्बानी हो गई तो समझें राजनीती में उनके कदम सही दिशा में आगे जा रहे हैं. बाकि राजनीती के निष्कर्ष तो आप ही जानें , जो जितना बड़ा धूर्त वो उतना ही अच्छा राजनीतिज्ञ.

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