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    Homeसाहित्‍यकविता‘सर्व शुक्ला सरस्वती' एनी बीसेंट और थियोसोफिकल सोसाइटी

    ‘सर्व शुक्ला सरस्वती’ एनी बीसेंट और थियोसोफिकल सोसाइटी

    —विनय कुमार विनायक
    मां एनी बीसेंट जन्म से एक ईसाई थी
    मगर कर्म से गुलाम भारत में हिन्दुत्व को
    जगाने वाली पूर्व जन्म की हिन्दू थी!

    एनी बीसेंट एक प्रेत विद्या की जानकार
    रुसी महिला हेलेना पेत्रोवना ब्लेवास्की
    लिखित पुस्तक ‘द सीक्रेट डॉक्ट्रिन’ पढ़कर
    थियोसोफिकल सोसाइटी में दीक्षित हुई!

    थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना
    रुसी हेलेना और अमेरिकी कर्नल आलकाट ने
    7 सितंबर 1875 ई. में न्यूयॉर्क में की!

    तिब्बत की महान संत आत्माओं के निर्देश पर
    ब्लेवास्की और आलकाट ने 16 फरवरी 1879 को
    इस ब्रह्मविद्या समाज को बम्बई लेकर आए,
    फिर 1882ई.में अडयार मद्रास में मुख्यालय बनाए!

    एनी बीसेंट 16 नवंबर1893 ई.में भारत आई
    और मृत्युपर्यंत 1933 ई.तक सभानेत्री बनी रही!
    एनी बीसेंट भारत और हिंदुत्व की भक्त थी!

    उनका कहना था ‘हिन्दुत्व ही वह मिट्टी है,
    जिसमें भारतवर्ष का मूल गड़ा हुआ है,यदि ये मिट्टी
    हटा ली गई तो भारत रुपी वृक्ष सूख जाएगा!

    आर्य समाज व ब्रह्म समाज ने
    जहां खंडित संशोधित हिन्दुत्व वरण किया,
    वहीं एनी बीसेंट ने अखंड हिन्दुत्व अपनाया,
    सिर्फ वेद उपनिषद गीता का ही हवाला नहीं,
    बल्कि स्मृति,पुराण,धर्मशास्त्र,महाकाव्य, देव-देवी,
    पुनर्जन्म, अवतार,आख्यान,अनुष्ठान की बातें की!

    एनी बीसेंट ने कहा ‘चालीस वर्षों के
    सुगंभीर चिंतन के बाद मैं यह कह रही हूं
    कि विश्व के सभी धर्मों में हिन्दू धर्म से बढ़कर
    पूर्ण, वैज्ञानिक,दर्शनयुक्त एवं आध्यात्मिकता से
    परिपूर्ण धर्म दूसरा कोई नहीं है।‘

    एनी बीसेंट भारतीय राजनीति में भी सक्रिय थी
    उन्नीस सौ चौदह से तिलक के होम रुल में भाग ली
    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सभापति भी बनी थी,
    उन्होंने सेंट्रल हिन्दू कॉलेज बनारस स्थापना की
    जो बाद में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बनी थी!

    थियोसोफी कोई अलग धर्म मजहब नहीं,
    यह सर्व धर्म समन्वयवादी आंदोलन थी,
    थियोसोफी होने हेतु धर्म छोड़ने की नहीं
    बल्कि अच्छे स्वधर्मी होने की जरूरत थी!

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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