भारत की खासियत है ऐसी

—विनय कुमार विनायक
भारत की खासियत है ऐसी
कि अनेक जातियों को मिलाकर
एक जाति बना देती

भारत की अच्छाई है ऐसी
कि अनेक धर्म को घोंटकर
सर्वग्राह्य एक धर्म खड़ा कर देती!

भारत की प्रवृत्ति है ऐसी
कि अनेक संस्कृतियों को मिश्रितकर
एक समेकित संस्कृति बना देती!

ऐसे ही नीग्रो,औष्ट्रिक,द्रविड़,आर्य मिलकर
एक महान संस्कृति हिन्दू का बन जाना!

कभी कोई जाति नाम संस्कृत शब्द से बनी,
बाद में अपभ्रंश होकर बनी अनेक उपजाति,
फिर दौर एक ऐसा आता कि सारी उपजाति,
एकीकृत होके बन जाती है, एक बड़ी जाति!

विदेशी आक्रांता जातियां शक-हूंन-कुषाण आदि
भारत आकर राजपूत जाति में रचपच गईं थी!

भगवान बुद्ध ने आनन्द से भविष्यवाणी की थी
‘मेरा चलाया धर्म सिर्फ पांच सौ वर्ष तक चलेगा’
सचमुच पांच सौ वर्ष के अंदर बौद्ध धर्म टूटकर
एक हीनयान दूसरा महायान शाखा में बंट गया!

मूल बौद्ध धर्म हीनयान दिन ब दिन हीन होता गया,
महायान बौद्धधर्म छोड़ हिन्दुत्व की गोद में आ गया!

बुद्ध अपने जीवन काल में ईश्वर के विषय में मौन थे,
महायानियों ने बुद्ध को ईश्वर के अवतार बना दिए थे!

बुद्ध ने देवी-देवताओं की अराधना करना मना की थी
महायानी ने बुद्ध संग देवताओं की फौज खड़ी कर दी!

बुद्ध ने अपना धर्मोपदेश लोकभाषा पाली में दिया था,
महायानी ने बुद्ध साहित्य को संस्कृत में लिख दिया!

बुद्ध ने निज धर्म में संन्यासी को मोक्षकामी बनाया था,
महायान ने समग्र गृहस्थों को मोक्ष का पात्र बना दिया!

यह शाश्वत नियम है कि अति का अंत होता,
घोर निराकारी शीघ्र साकारवाद की ओर बढ़ता,
वैराग्य की अधिकता भोगवाद को जन्म देती!

भारतीय हिन्दू संस्कृति अमरबेल सी बढ़ गई,
सदियों से जुल्म को सहकर भारत मिटी नहीं!
मिस्र रोम ईरान मिट गए, अपने धर्म बदलकर,
किन्तु भारत की प्रवृत्ति ऐसी जो बदलती नहीं!

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