sllepवे

सपने बेच रहे हैं

एक अरसे से

बेच रहे हैं

भोर के नहीं

दोपहर के सपने

बेच रहे हैं

तरह तरह के

रंग बिरंगे सपने

बेच रहे हैं

खूब बेच रहे हैं

मनमाने भाव में

बेच रहे हैं

अपनी अपनी दुकानों से

बेच रहे हैं

मालामाल हो रहे हैं

निरंकुश हो रहे हैं

होते रहेंगे तबतक

अधजगे खरीदते रहेंगे

लोग  सपने  जबतक

Leave a Reply

25 queries in 0.370
%d bloggers like this: