लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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शनिवार को पटना के गांधी मैदान से एक मानव-श्रृंखला का निर्माण हुआ, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी मानव-श्रृंखला माना गया है। इसमें तीन करोड़ से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। यह कतार 11 हजार 400 किमी लंबी थी और 38 जिलों में से होकर गई थी। इस मानव-श्रृंखला की लंबाई नापने के लिए ‘इसरो’ के उपग्रह और 38 ड्रोन और हेलिकाप्टर लगाए गए थे। यह दिन में लगभग पौन घंटे तक चली। यह श्रृंखला शायद बिहार के एक कोने से दूसरे कोने तक बनाई गई होगी। जहां तक मुझे याद पड़ता है, इतनी लंबी मानव-कतार मैंने तो कभी नहीं देखी।

यह कतार क्यों बनाई गई थी? इसलिए कि मुख्यमंत्री नीतिशकुमार ने बिहार में शराबबंदी का अभियान चला रखा है। इस मानव-श्रृंखला में कांग्रेस, नेशनल कांग्रेस, राजद आदि दलों के नेताओं ने भाग लिया। मैं पूछता हूं, भाजपा, कम्युनिस्ट पार्टी और सपा के नेताओं ने इसमें भाग क्यों नहीं लिया? क्या उन्हें नीतिश ने बुलाया ही नहीं? यदि यह सच है तो यह नीतिश की गलती है। सभी दलों को बुलाया जाना चाहिए था।

शराबबंदी तो ऐसा मुद्दा है, जिसके लिए हर संगठन को नीतिश का आभारी होना चाहिए। नीतिश ने यह इतना बुनियादी और क्रांतिकारी अभियान चलाया है कि वे बिहार के ही नहीं, देश के नेता बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की कुर्सियों में तो कोई भी बैठ जाता है लेकिन उसका नेता बनना बड़ा कठिन होता है। नीतिश जो कर रहे हैं, उसका अनुसरण देश के प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्रियों को भी करना चाहिए।

मुझे आश्चर्य है कि इस मानव-श्रृंखला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, आर्यसमाज, सर्वोदय तथा इस्लाम समेत सभी धर्मों के नेता क्यों नहीं शामिल हुए? राजनीतिक नेताओं के बारे में तो ये मान लिया जाता है कि वे सिर्फ वही करते हैं, जिससे उनका स्वार्थ सधता है लेकिन धर्म और संप्रदायों के नेता परमार्थिक कामों के लिए ही जाने जाते हैं। उनका काम इंसान को बेहतर इंसान बनाना है। नशा करते ही इंसान तो हैवान बन जाता है। उसकी चेतना खो जाती है। उसे शुभ-अशुभ, सत-असत और सही-गलत का भान नहीं रहता।

सुखद आश्चर्य है कि इसका बीड़ा एक राजनीतिक नेता ने उठाया है और धार्मिक नेता इस मामले में उदासीन हैं। इस अभियान में देश के प्रसिद्ध सिने कलाकारों, गायकों, नर्तकों, साहित्यकारों और पत्रकारों को भी जोड़ा जाना चाहिए। इन लोगों पर जनता का भरोसा काफी ज्यादा होता है। जैसी मानव-श्रृंखला बिहार में बनाई गई, वैसी दिल्ली में भी क्यों नहीं बनाई जाए? इस श्रृंखला में प्रणब मुखर्जी, नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल ओर उक्त सभी श्रेणियों के लोग भाग लें तो क्या उसका असर जबर्दस्त नहीं होगा?

One Response to “शराबबंदीः सबसे लंबी कतार”

  1. आर. सिंह

    R.Singh

    जहाँ तक मेरा ज्ञान है,बिहार में केवल ३८ जिले हैं.इसका मतलब यह मानव श्रृंखला सब जिलों से होकर गुजरी थी.मुझे तो लगता है कि हमारे प्रधान मंत्री इस तरह की मानव श्रृंखला पूरे देश को मिलाकर बनाएंगे और वह एक ऐसा रिकॉर्ड होगा,जिसको तोडना असंभव होगा.

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