सोलह महाजनपद


बुद्ध कालीन भारत में सोलह जनपद थे,
जो वर्तमान की तरह राज्य के पर्याय थे!
ये सभी भारत के महाजनपद कहलाते थे,
मगर वास्तव में मगध ही महाजनपद थे!

भगवती सूत्र के अनुसार अंग,बंग, मगध,
मलय,मालव,अच्छ,वच्छ, कोच्छ,पाढ, लाढ,
वज्ज,मोली,काशी, कोशल,अवाह, संयुक्तार,
जनपद, जो भिन्न अंगुत्तरनिकाय सूची से!

अंगुत्तरनिकाय के अनुसार महाजनपद के
ये नाम गन्धार, जिसमें शामिल पाक के
पेशावर, रावलपिंडी औ अफगानिस्तान के
कन्दहार, जिसकी राजधानी तक्षशिला में!

तक्षशिला से काबुल नदी तक का क्षेत्र ही
गांधार है, जो बसा चंद्रवंशी राजा ययाति
पुत्र द्रहयु की पांचवीं पीढ़ी के वंशधर से,
ययातिपुत्र यदु से यादव, द्रहयु द्रविड़ हुए!

द्रहयुवंशी अंगार पुत्र गंधार के नाम बसा
एकराज क्षेत्र, पांडु कंबल हेतु प्रसिद्ध था,

गंधार का राजा व राजपुत्र गांधार कहलाता,
जबकि गंधार राजकुमारी गांधारी कहलाती!
तक्षशिला विश्वविद्यालय अतिप्रसिद्ध था!

कम्बोज था कश्मीर का लद्दाख, तिब्बत,
अफगानिस्तानी हिस्सा, पामीर का पठार,
वक्षु तीर बसा एकराज जनपद, जहां का
राजा और राजपुत्र कहलाता था काम्बोज!

अश्मक जनपद गोदावरी के तीर बसा था
जो वर्तमान में झारखण्ड के सिंहभूम तक,
जिसकी राजधानी प्रतिष्ठान या पोतन थी,
वत्स जनपद फैला था प्रयागराज भू तक!

वत्स जनपद काशीराज प्रतर्दन के सुपुत्र
वत्स के नाम पर बसा, वत्सराज उदयन
व अवन्ती की राजकुमारी वासवदत्ता की
प्रेमकथा भास रचित स्वप्नवासदत्ता थी!

अवन्ती मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र तक,
झारखंड के पलामू सीमा लगकर विस्तृत,
उत्तरी अवन्ती की राजधानी उज्जयिनी व
दक्षिणी अवन्ती की राजधानी माहिष्मती,
हैहयवंशी क्षत्रिय महिष्मन्त के नाम बसी!

अवन्तिराज प्रद्योत बिम्बिसार,बुद्धकाल के,
प्रद्योत क्रूरता के कारण चण्ड प्रद्योत बने!
विक्रमादित्य संतावन ईसा पूर्व में प्रमुख हुए
मालव गण के जिन्होंने विक्रम संवत चलाए!

वर्तमान ब्रजभूमि प्राचीन शूरसेन जनपद था,
वसुदेव कुन्ती के पिता शूरसेन नाम से बसा,
शूरसेन और कुन्ती हैहय यदु वंशी क्षत्रिय थे,
शूर के वंशधर शौरि, शूरसेनवंशी शूरसेनी थे!

चेदि जनपद था विदर्भ राज चिदि स्थापित,
चम्बल और केन नदी के मध्य में स्थित,
महा भारत काल में शिशुपाल चेदिराज था,
जो कृष्ण का बुआपुत्र यदुवंशी समाज का!

निश्चय ही शिशुपाल हैहयवंशी यादव था,
जिसने भाई कृष्ण को सौ गालियां दी थी,
औ बदले में कृष्ण से गर्दन कटा ली थी,
यादवों की ज्येष्ठ शाखा हैहय है यदुवंशी!

मल्ल गणराज्य जनपद गोरखपुर, देवरिया,
कुशीनगर, जिसकी राजधानी कुशीनगर थी
यह जनपद कुशीनगर व पावा में बंटा था,
कुरु जनपद दिल्ली-हरियाणा-मेरठ तक था
कुरु जनपद के स्थापक ययाति पुत्र पुरु था,
जिनके वंशज हस्ति ने हस्तिनापुर बसाया!

पांचाल जनपद कन्नौज, बदांयू व फर्रुखाबाद,
महाभारत काल में द्रुपद राजा थे पांचाल के,
अर्जुन ने पराक्रम से पांचाल राज जीत कर
गुरु द्रोणाचार्य को गुरु दक्षिणा में दिए थे!

राजस्थान के अलवर, भरतपुर, जयपुर तक
विस्तृत भूभाग मत्स्य जनपद कहलाता था,
मत्स्य जनपद की राजधानी विराटनगर थी
मत्स्यपुत्री उत्तरा अभिमन्यु की वामांगी थी,
सम्प्रति मत्स्य मीणा जन जाति कहलाती!

वृज्जि जनपद बिहार की वैशाली, हाजीपुर,
मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, चंपारण में फैली,
जिसकी राजधानी वैशाली थी, जो गणतंत्र
शासन पद्धति की आरंभ भूमि कहलाती!
जिसे इच्छवाकुपुत्र विशाल ने स्थापित की!

अंग जनपद मगध के पूर्व में स्थित था
भागलपुर, मुंगेर, संथाल परगना से बसा
अंग प्रदेश की राजधानी चम्पा भागलपुर
जहां कामदेव शिव के नेत्र से अनंग हुआ

काशी जनपद गंगा और गोमती के मध्य,
बनारस परिक्षेत्र में बसा सुदर्शन नगर था
दुष्यंत शकुंतला पुत्र चक्रवर्ती भरत प्रपौत्र
काश ने काशी की स्थापना की बनारस में!

कोशल जनपद अवध परिक्षेत्र में बसा था,
जिसकी पूर्व राजधानी साकेत/अयोध्या थी,
दूसरी राजधानी बुद्धकाल में थीं श्रावस्ती,
अयोध्या की स्थापना वैवस्वत मनु ने की,
कोशल का विस्तार सारण सीवान तक था!

मगध जनपद पटना, गया,राजगृह तक थी,
पहली राजधानी गिरिव्रज, फिर राजगृह हुई,
बाद में पाटलिपुत्र हो गई जो अब पटना है,
मगध ही भारत की केन्द्रीय सत्ता बन गई!
—विनय कुमार विनायक

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