लेखक परिचय

अरुण कान्त शुक्ला

अरुण कान्त शुक्ला

भारतीय जीवन बीमा निगम से सेवानिवृत्त। ट्रेड यूनियन में तीन दशक से अधिक कार्य करता रहा। अध्ययन व लेखन में रुचि। रायपुर से प्रकाशित स्थानीय दैनिक अख़बारों में नियमित लेखन। सामाजिक कार्यों में रुचि। सामाजिक एवं नागरिक संस्थाओं में कार्यरत। जागरण जंक्शन में दबंग आवाज़ के नाम से अपना स्वयं का ब्लॉग। कार्ल मार्क्स से प्रभावित। प्रिय कोट " नदी के बहाव के साथ तो शव भी दूर तक तेज़ी के साथ बह जाता है , इसका अर्थ यह तो नहीं होता कि शव एक अच्छा तैराक है।"

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-अरुण कांत शुक्ला-
smriti

-मां को दी गई थी मुझे मारने की सलाहः स्मृति ईरानी-

वैसे तो मंत्री बनने के बाद एक आदमी को कुछ भी बकवास करने का लाईसेंस मिल जाता है और लोग उनकी इन बकवासों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं लेकिन आज शुक्रवार को जो कुछ केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने भोपाल में छोटे बच्चों के बीच कहा है, उसे नजरअंदाज करना बहुत गलत होगा… स्मृति ईरानी ने भोपाल के मॉडल स्कूल में बच्चों द्वारा पूछे गए कन्या भ्रूण हत्या संबंधी सवाल के जवाब में कहा कि वह पहली बार यह खुलासा कर रही हैं कि वह जब पैदा हुई थीं तो कुछ लोगों ने बेटी को बोझ बताते हुए उनकी मां को उन्हें मार देने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, लेकिन मेरी मां बहादुर थीं और उन्होंने ऐसा नहीं किया तथा यही कारण है कि मैं आज आपके सामने खड़ी हूं।

यदि देश की मानव संसाधन मंत्री ऐसा कह रही हैं तो यह बहुत ही गंभीर बात है, क्योंकि वे किसी भी हालत में अत्यंत दकियानूसी परिवार से नहीं आती होंगी| इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत में आज भी लुका छिपे कन्या भ्रूण नष्ट किये जाते हैं, या कन्या जन्म के बाद कुछ मामलों में ह्त्या भी की जाती है| पर, यह भी महत्वपूर्ण है कि आजादी के बाद सरकारी स्तर पर और सामाजिक संगठनों के स्तर पर चलाये गए जागरण अभियानों के फलस्वरूप पिछले कुछ दशकों में इनमामलों में भारी कमी आई है| स्मृति बहुत उम्रदराज नहीं हैं| उनका जन्म आठवें दशक के अंतिम हिस्से (1976) में एक पंजाबी-बंगाली परिवार में दिल्ली में हुआ और उस लिहाज से उनकी माँ को कन्या हत्या की सलाह दिया जाना गंभीरअपराध की तरफ इशारा करता है और विशेषकर जबकि वे अपने माँ बाप की पहली संतान हों| इस बात की भी पूरी संभावना है कि वे आपराधिक और कुत्सित मानसिकता के लोग जिन्होंने उनकी माँ को ऐसा करने की सलाह दी थी, अभी ज़िंदा होंगे| इसलिए या तो स्मृति स्वयं होकर रिपोर्ट करें या फिर पोलिस या न्यायालय स्वत: संज्ञान लेकर स्मृति से पूछताछ कर कार्रवाई करे| यदि स्मृति इसमें सहयोग न करें तो फिर उन्हें गिरफ्तार करके उनसे पूछताछ की जाए|

यह मामला केवल भ्रूण ह्त्या का नहीं है| उनके पूरे बयान से ऐसा पता चलता है कि उनकी माँ के उपर यह दबाव स्मृति के पैदा होने के बाद आया, याने मामला ह्त्या के लिए उकसाने का है और यह किसी भी हालत में गंभीर अपराध है| पोलिस और न्यायालय को चाहिए कि स्मृति को तुरंत हिरासत में लें और उनसे पूछताछ करें कि किन लोगों ने यह सलाह उनकी माँ को दी थी|

यद्यपि उनके इस बात को कहने के बाद उपस्थित लोगों और बच्चों ने बहुत तालियाँ बजाईं, पर स्मृति की यह बात आम लोगों तक कुछ बहुत अच्छा सन्देश लेकर नहीं जाती है| जब स्मृति जैसा महत्वपूर्ण व्यक्तित्व कन्या ह्त्या या भ्रूण ह्त्या जैसे मामले को केवल लोकप्रियता के लिए इस्तेमाल करेगा और समर्थ हो जाने के बावजूद, उसके खिलाफ कदम नहीं उठाएगा तो समाज में तो ये सन्देश ही जाएगा कि कन्या हत्या या कन्या भ्रूण को नष्ट करना क़ानून की दृष्टि में भले ही अपराध हो पर सामाजिक रूप से यह एक साधारण बात है| यदि स्मृति चाहती हैं कि उनके इस खुलासे के बाद समाज में कोई गलत और नकारात्मक सन्देश न जाए तो उन्हें तुरंत स्वयं होकर उन लोगों के खिलाफ पोलिस में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए| केन्द्रीय मंत्री का पद वैसे ही बहुत महत्वपूर्ण होता है और फिर मानव संसाधन मंत्री की जिम्मेदारियां अलग होने के साथ साथ समाज में अपने आचरण से शिक्षा और चेतना फैलाने वाली भी होती हैं| इस लिहाज से भी स्मृति को इस बात को केवल भाषणों में बोलकर सस्ती लोकप्रियता के लिए भुनाने के बजाय, स्वयं होकर उन लोगों के खिलाफ पोलिस में एफआईआर दर्ज करानी चाहिए|

इस मामले में प्रधानमंत्री को भी तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्मृति ईरानी से एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहना चाहिए या स्वयं सीबीआई को मामले में अनुसंधान करने के लिए आदेश देने चाहिए| ऐसा नहीं होने की दशा में आम लोगों के बीच यह सन्देश जाएगा कि प्रधानमंत्री ने अपने मंत्री मंडल में कुछ भी बोल कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले बड़बोले लोगों को जगह देकर रखी है|

6 Responses to “स्मृति ईरानी उन अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएं”

  1. narendrasinh

    r sinhji hamesha aap (kejrivalki) ka bachav karte the aaj aapke paksh me hai lekin mai ye kahunga ki mantriji ne samaj ka najariya samjane ki kosis ki hai naki satyasaty ki !!!!!!

    ye bade afsos or sarmondgi vali bat hai ki aap apani logik or vichar shakti ka bharopur durpayog logo me kutark or dwesh badhane ke liye or samagra desh ka mahol bigadne me kar rahe ho !!!

    hamare desh me salo se kuchh log aisa kam karte aaye hai jo sabhi aap jaise apane aap ko vicharvant or samaj ke hitechhi mante rahe hai jaise r sinhji aap (kejrival) ko desh ka udhdharak manate the—–aap or r sinh ek hi huve___________

    chhodiye aise kutarko ko or desh ki pragati or vikash ke liye likhiye abhibhi 50 % bharat achche vichaor se vanchit hai _______________

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    • आर. सिंह

      आर. सिंह

      नरेन्द्रसिंह जी ,आपने यही न लिखाहै.

      “ये बड़े अफ़सोस और सरमनदगी वाली बात है कि आप अपनी लॉजिक और विचार शक्ति का भरोपुर दुरपयोग लोगो में कुतर्क और द्वेष बढ़ाने के लिए और समग्र देश का माहोल बिगाङने में कर रहे हो !!!

      हमारे देश में सालो से कुछ लोग ऐसा काम करते आये है जो सभी आप जैसे अपने आप को विचारवंत और समाज के हितेछी मानते रहे है जैसे आर सिंहजी आआप (केजरीवाल ) को देश का उद्धारक मानते थे —–आप और आर सिंह एक ही हुवे ___________

      छोड़िये ऐसे कुतर्को को और देश कि प्रगति और विकाश के लिए लिखिए अभिभ i 50 % भारत अच्छे विचाोर से वंचित है” _______________
      गलत फहमी न हो इसके लिए आपकी पूर्ण टिप्पणी को मुझे देवनागरी लिपि में लििखना पड़ा.यह काम थोड़ी मिहनत से आप भी कर सकते थे.खैर.
      ऐसे तो आपने मंत्री जी के बचाव में मेरे कट्टू सत्य को भी कुतर्क माना.दूसरी बात इसमें आपने जबरदस्ती आआप और अरविन्द को घुशेड दिया.आपको मेर्री टिप्पणी का कौन अंश कुतर्क लगा?ऐसे तो मैंने नमोके मंत्रिमंडल के सदस्य के विरुद्ध लिखा है,अतः आप मुझे देश द्रोही भी कहते ,तो आश्चर्य नहीं होता. नरेंद्र सिंह जी,स्ययं स्मृति ईरानी ने गलतफहमी फैलाने की कोशिश की है.यह भ्रूण हत्या भी नहीं है,वह तो सीधे सीधे हत्या की बात कर रही हैं.अतः इस मामले को आज भी उठाया जा सकता है. मुझे नसीहत देने के बदले अगर आप इसबाद बोले मंत्री को यह नसीहत देते तो ज्यादा अच्छा होता.
      रही बात भारत के बंचित होने की ,तो आज भी भारत एक गरीब देश है,क्योंकि भारत की जनता अभी भी अशिक्षित और बीमार है.न पिछले ६७ वर्षों में यह अशिक्षा और बीमारी दूर करने के प्रयत्न किये गए और न आज किया जा रहा है.

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  2. इंसान

    Duplicate comment detected; it looks as though you’ve already said that! BUT IT WAS NOT PUBLISHED! Why?

    “मैं प्रायः सोचता हूँ कि हम वृदावस्था में भी बच्चों की तरह क्यों बात चीत करते हैं? बालावस्था से वृदावस्था तक शरीर प्रौढ़ता की ओर अवश्य बढ़ता है लेकिन परिपक्वता क्यों हमें छू तक नहीं पाती? मैं चाहूँगा पाठक इस निबंध को “सन्देश नहीं सन्देश वाहक को ही मार दो|” के दृष्टिकोण से पढ़ें व अपने विचार प्रस्तुत करें|”

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    • आर. सिंह

      आर. सिंह

      इंसान जी,आपने माननीय मंत्री महोदय को भरसक बचाने की चेष्टा अवश्य की है,पर यहाँ क्यायह संभव है?विद्वान लेखक ने जो कहा है,उसमे क्या गलत है?ऐसे तो सच पूछिये तो श्रीमती स्मृति ईरानी ने जिस वाकये का वर्णन किया है,वह मनगढंत लगता है.एक बंगाली ने एक पंजाबी से दिल्लीं महानगर में साठ के दशक के उत्तरार्ध में शादी की.इसका मतलब दोनों कुछ हद तक प्रगति शील विचार धारा के थे. उनकी माँ बंगाली है.बंगालियों में देहातों में भी भ्रूण हत्या का प्रायः कोई रेकार्ड नहीं है.,क्योंकि लड़कियों को वहां वैसा बोझ नहीं माना जाता ,जैसा बिहार ,उत्तर प्रदेश,हरियाणा या पंजाब में माना जाता है.उसपर तुर्रा यह यह कि इसमें तो भ्रूण हत्या नहीं, बल्कि साफ़ साफ़ हत्या करने को कहा जा रहा था,जो संभव नहीं दीखता. इसीलिये मैंने अपनी पहली टिप्पणी में लिखा है कि यह साफ़ साफ़ वाह वाही लूटने का मामला है.

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  3. आर. सिंह

    आर. सिंह

    शुक्ल जी,आपने भी यह कहाँ का पछड़ा उछाल दिया? वाह वाही लूटने के ख्याल से दिए हुए वक्तव्य को आप ले उड़े. कौन ऐसे बयानों को गंभीरता से लेता है? अगर अधिक उछला गया तो स्मृति ईरानी साफ़ साफ़ इंकार कर जाएंगी कि उन्होंने कभी ऐसा कहा भी था.स्मृति ईरानी तो इस पर आगे की कार्रवाई करने से रही. रही बात पी.एम की ,तो उन्हें ऐसी छोटी बातों पर ध्यान देने की फुर्सत कहाँ? विश्वास न होतो,सीधे पीएम के वब साईट पर जाइए और इसको लिख कर देखिये.ऐसे इस सन्दर्भ में गुजरात के नए मुख्य मंत्री का वयान भी उल्लेखनीय है,जब उन्होंने कार्य भार संभालते ही गुजरात की समस्याओं का जिक्र करते हुए भ्रूण हत्या का विशष रूप से उल्लेख किया था.

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    • अरुण कान्त शुक्ला

      अरुण कान्त शुक्ला

      सिंह सर ..लगता है वाकई हमारे देश में अनेक लोग ऐसे हैं जो भ्रूण ह्त्या या कन्या के जन्म होते ही हरया के पक्ष में न होते हुए भी उसे गंभीर या बड़ा अपराध नहीं मानते | मुझे अच्छे से मालूम है कि माननीय मंत्री ने ये बात केवल नासमझों से तालियाँ बटोरने के लिए कही होगी, पर इस तरह के बयानों से विपरीत प्रभाव भी पड़ता है..अब कुछ इंसान तो होंगे ही जो स्थायी रूप से उलजुलूल भावनात्मक बातों के समर्थन में हमेशा खड़े रहेंगे..आपने लेख का मर्म समझा और उसका अच्छा बचाव किया..उसके लिए ह्रदय से आभारी हूँ..

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