अरुण कान्त शुक्ला

भारतीय जीवन बीमा निगम से सेवानिवृत्त। ट्रेड यूनियन में तीन दशक से अधिक कार्य करता रहा। अध्ययन व लेखन में रुचि। रायपुर से प्रकाशित स्थानीय दैनिक अख़बारों में नियमित लेखन। सामाजिक कार्यों में रुचि। सामाजिक एवं नागरिक संस्थाओं में कार्यरत। जागरण जंक्शन में दबंग आवाज़ के नाम से अपना स्वयं का ब्लॉग। कार्ल मार्क्स से प्रभावित। प्रिय कोट " नदी के बहाव के साथ तो शव भी दूर तक तेज़ी के साथ बह जाता है , इसका अर्थ यह तो नहीं होता कि शव एक अच्छा तैराक है।"

लेह में प्रधानमंत्री ने अनावश्यक दिया छद्म युद्ध वाला बयान…

-अरुण कान्त शुक्ला- ये छद्म युद्ध क्या होता है? क्या जो माहौल स्वयं प्रधानमंत्री ने बनाया था, उसमें पाकिस्तान के...

‘आम आदमी’ अब एक नजरिया और नजरिये जल्द नहीं मरते

हर तरफ, हर जगह, हर नुक्कड़ पर, कॉफ़ी हाउस या फिर चाय ठेले पर चुस्कियों के साथ चर्चा सिर्फ आम आदमी पार्टी की| आखिर क्या है...

आपदा में मानव जीवन को मदद पहुंचाते समय भेदभाव मानवता के खिलाफ अपराध

लेखक के व्यंग्‍य लेख “रजनीकांत बर्खास्त:रजनीकांत का कार्यभार नरेंद्र को सौंपा गया” पर आई टिप्‍पणियों का जवाब...  अरुण कान्त शुक्ला...

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