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    Homeसाहित्‍यकविताकुछ कहता है सावन

    कुछ कहता है सावन


    कुछ कहता है सावन,
    मेरे मन के आँगन मे,
    साजन से तेरा मिलन करा दू
    क्या दोगी मुझे निछावन मे.

    मैं एक ऐसा सावन हूँ,
    तेरे तन मे अग्नि लगाता हूँ
    मैं ही तेरे साजन को बुलाकर
    तेरे तन की प्यास बुझाता हूँ

    सावन मे ही तुमको मैं
    कोयल की कूक सुनाता हूँ
    बागो मे झूले डलवा कर
    तुझे झूले पर झूलाता हूँ

    वर्षा ऋतु के मौसम मे ही मैं
    दिन को मैं ही रात बनाता हूँ
    कही भूल न जाये पथ तेरा साजन
    बिजली से प्रकाश मैं कराता हूँ

    रिम झिम बूँदे लाकर मैं ही
    धरती की प्यास बुझता हूँ
    अगर बदन पर पड़ जाये बूंदे
    तेरे बदन मे आग लगाता हूँ

    मेरे सावन के महीने मे ही
    कल कल नदियाँ बहती है
    झरने की झर झर आवाज
    नदियाँ प्यार से सहती है

    मेरे कारण ही सारे नभ मे
    उमड़ घुमड़ कर बादल आते है
    अपनी डरावनी आवाजो से
    विरहणी को खूब डराते है

    मेरे ही इस पवित्र महीने मे
    शिव की भी पूजा होती है
    जल चढ़ाकर शिवलिंग पर
    सबकी इच्छा पूरी होती है

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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