प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लालकिले की प्राचीर से देशवासियों को ओजस्वी, तेजस्वी, सारगर्भित एवं प्रेरणादायक सम्बोधन के लिए अभिनन्दन

मनमोहन कुमार आर्य

स्वतन्त्रता दिवस के पुण्य अवसर पर देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लालकिले की प्राचीर से देशवासियों को सम्बोधित किया। उनका सम्बोधन ओजस्वी, तेजस्वी, प्रभावशाली,  प्रेरणादायक एवं प्रशंसनीय था। एक अच्छे व आदर्श प्रधानमंत्री से देशवासी जो अपेक्षा करते हैं वह सब बातें सूत्र व सिद्धान्त रूप में उन्होंने अपने सम्बोधन में कही हैं। देश की उन्नति में सेना, किसानों व मजदूरों का महत्वपूर्ण योगदान है। इनकी भी चर्चा सम्बोधन में हुई है। भ्रष्टाचार व कालाधान देश की उन्नति में बाधक हैं, इसका उल्लेख व सरकार की भ्रष्टाचार व बेनामी सम्पत्ति आदि के विरुद्ध की गई कार्यवाही का उल्लेख भी प्रधानमंत्री जी ने अपने सम्बोधन में किया है। आतंकवाद का दृणता से मुकाबला किया जायेगा, कहीं कोई कसर नहीं रखी जायेगी, इसका भी प्रशंसनीय उल्लेख प्रधानमंत्री जी ने किया। प्रधानमंत्री जी के भाषण में अनेक विषय थे जिसका उन्होंने उल्लेख किया। इन सब के लिए मोदी जी सभी देशवासियों के आदर व प्रशंसा के पात्र हैं।

देश की उन्नति अर्थात् सुख-समृद्धि-शान्ति में ‘जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सत्य का ग्रहण और असत्य का त्याग’ का एक प्रमुख सर्वमान्य सत्य सिद्धान्त है। हमें लगता है कि विज्ञान में तो यह नियम भलीभांति काम करता है परन्तु सामाजिक मान्यताओं, भोजन छादन व मत-पन्थ-सम्प्रदायों में यह नियम ठीक से काम नहीं करता है व कर रहा है। यदि यह नियम ठीक से कार्य करता तो एक से अधिक मत, धर्म, सम्प्रदाय, पन्थ आदि न होते और न ही इस देश में कोई सामाजिक कुरीति, अन्धविश्वास व मिथ्या परम्परा होती। न जन्मना जातिवाद होता और न छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना ही होती। ऐसा न होने पर राजनीति में वोट बैंक की राजनीति भी न होती। इसके कारण देश को जो हानि हुई है वह भी न होती। अनेक मत-मतान्तरों व समाज में लिंग भेद व इससे जुड़ी जो घटनायें सामने आती हैं, वह भी न होती। इसकी जड़ में कहीं न कहीं अथवा किसी न किसी रूप में मत-मतान्तरों की असत्य मान्यतायें व परम्परायें जमी पड़ी है। जब तक इसे दूर नहीं किया जायेगा, देश व समाज की स्थिति में सुधार नहीं हो सकता।

स्वामी दयानन्द मर्यादा पुरुषोत्तम राम और योगश्वर कृष्ण की परम्परा के महापुरुष, युग पुरुष, ऋषि वा महर्षि, देवता, विद्वान, ज्ञानी, वेदभक्त, ईश्वरभक्त, मानवता के सच्चे व सबसे प्रमुख आदर्श रूप थे। उन्होंने मनुष्यों की सबसे बड़ी समस्या, मत-सम्प्रदायों में विद्यमान असत्य व असत्य पर आधारित मान्यतायें, परम्पराओं व पूजा पद्धतियों, को जाना था। उन्होंने उन सभी समस्याओं को अपने व्याख्यानों, ग्रन्थों के लेखन व शास्त्रार्थों आदि में सप्रमाण उठाया भी है। उन सभी समस्याओं का समाधान भी उन्होंने अपने लघुग्रन्थ स्वमन्तव्यामन्तव्य वा आर्योद्देश्यरत्नमाला दिया है। उन्होंने अपना जीवन देश से अज्ञान, असत्य व अन्धविश्वास को भगाने में ही लगाया और उसी के लिए उन्होंने अपना बलिदान भी दिया। देश को महाभारत से पूर्व के अज्ञान व अन्धविश्वासों से रहित स्वर्णिम दिनों में ले जाने के लिए उन्होंने अनेक प्रयत्न किये। सत्यार्थप्रकाश उनके जीवन की देश व विश्व को सबसे बड़ी देन है जिसमें वह मानव जीवन के लिए समान रूप से लाभकारी सत्य सिद्धान्तों व मान्यताओं का विधान करते हैं व मत-मजहब-धर्म-सम्प्रदाय आदि की असत्य व पक्षपात पर आधारित मान्यताओं, सिद्धान्तों व परम्पराओं का खण्डन वा आलोचना करते हैं। यदि विश्व समुदाय ने उनकी बातों को अपने निहित स्वार्थां से ऊपर उठकर विचार किया होता तो पक्षपात, अन्याय, शोषण, सामाजिक अन्याय, उपेक्षा तथा हिंसा आदि से रहित एक नया विश्व निर्मित किया जा सकता था। स्वामी दयानन्द जी ने सत्यार्थप्रकाश में जो लिखा है, वह वेद की शिक्षाओं पर आधारित हैं और वेद की सभी शिक्षायें मानव निर्मित न होकर ईश्वर से उद्बुद्ध संसार के सभी मनुष्यों के लिए ईश्वरीय आदेश हैं। जब तक ईश्वरीय आदेश वेद की शिक्षाओं की उपेक्षा की जाती रहेगी, समाज व देश में सुख व शान्ति उत्पन्न नहीं हो सकती। मत-मजहब-सम्प्रदाय आदि रहेंगे तो आतंकवाद जैसे अनेक सामाजिक रोग आदि भी बने रहेंगे। अतः सत्यार्थप्रकाश के परिप्रेक्ष्य में पुनः विचार करने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री जी के अनेक संवैधानिक उत्तरदायित्व हैं जिन्हें उन्हें पूरा करना है तथा वह भलीभांति सन्तोषजनक तरीकों से उन सब को पूरा कर रहे हैं। देश के जो पूर्व कुछ यशस्वी व कीर्तिशेष प्रधानमंत्री हुए हैं उनके समान श्री नरेन्द्र मोदी जी वर्तमान की कठिन व जटिल स्थिति में देश को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहे हैं। देश की जनता को उन पर पूरा विश्वास है। उनके राजनैतिक प्रतिद्वन्दी अपने राजनैतिक स्वार्थों के कारण उनकी सभी वा अधिकांश बातों का विरोध करते हैं। यहां तक की भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक का भी प्रमाण मांगते हैं। वह यह दिखाने का प्रयत्न करते हुए दीखते हैं कि यह वास्तविक व यथार्थ नहीं अपितु यह हुआ ही नहीं। अतः देशवासियों को नकारात्मक राजनीति करने वाले दलों से सावधान रहना होगा और सक्षम एवं योग्य नेता को ही आगे बढ़ाना होगा तभी देश सुरक्षित, सुखी व शान्त रह सकता है। हम प्रधानमंत्री जी का आज लालकिले की वेदी से दिये गये ओजस्वी व तेजस्वी भाषण के लिए अभिनन्दन करते हैं। ओ३म् शम्।

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