लेखक परिचय

अनिल गुप्ता

अनिल गुप्ता

मैं मूल रूप से देहरादून का रहने वाला हूँ! और पिछले सैंतीस वर्षों से मेरठ मै रहता हूँ! उत्तर प्रदेश मै बिक्री कर अधिकारी के रूप मै १९७४ मै सेवा प्रारम्भ की थी और २०११ मै उत्तराखंड से अपर आयुक्त के पड से सेवा मुक्त हुआ हूँ! वर्तमान मे मेरठ मे रा.स्व.सं. के संपर्क विभाग का दायित्व हैऔर संघ की ही एक वेबसाइट www.samvaadbhartipost.com का सञ्चालन कर रहा हूँ!

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manmohan singhअनिल गुप्ता
प्रधानमंत्री ने लालकिले से बड़े-२ दावे किये हैं.लेकिन इनमे कितनी सच्चाई है?रोजगार के क्षेत्र में एनडीए ने ७.५ करोड़ अवसर जुटाए थे यूपीए ने केवल २७ लाख.इन्फ्रास्ट्रकचर के क्षेत्र में ७ लाख करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स निर्णय के अभाव में लटके हुए हैं जिससे अर्थव्यवस्था और रोजगार पिछड़ रहा है.पिछले पांच वर्षों से औद्योगिक क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है.सड़क निर्माण के क्षेत्र में यूपीए की रफ़्तार एनडीए से केवल एक चौथाई है जबकि लागत बढ़ गयी है.विश्व आर्थिक फोरम की रेंकिंग में पिछले ४ वर्षों में ९ स्थान नीचे आ गया है.यूपीए की गलत नीतियों के कारण लघु अवधि ऋण का जीडीपी अनुपात पिछले नौ वर्षों से लगातार बढ़ा हैशिक्षा के क्षेत्र में लगातार गिरावट आ रही है.गरीबों की संख्या में गिरावट का दावा खोखला है क्योंकि गरीबों की कुल संख्या में गिरावट नहीं आई है बल्कि आबादी बढ़ने के कारण प्रतिशत गिरा हुआ दीख रहा है.मानव विकास इंडेक्स में लगातार गिरावट आ रही है.निर्यात में भी गिरावट आ रही है.आर्थिक विकास दर में गिरावट है.औद्योगिक उत्पादन घट रहा है.महंगाई लगातार बढ़ रही है जिससे आम आदमी का दो जून की रोटी खाना भी कठिन हो गया है.बचत में लगातार कमी आ रही है जिससे घरेलु पूँजी निर्माण में कमी आ रही है.पेट्रोल/डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं.रुपये की कीमत में गिरावट जारी है.१९४७ में एक रुपये में एक डालर था आज ६१-६२ रुपये का एक डालर है.सच्चाई तो ये है की प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह एक फेक अर्थशास्त्री हैं वर्ना देश के लिए अनर्थशास्त्री न साबित होते.सही तो ये है की १९९१ के आर्थिक सुधार गैर नेहरूवादी अर्थ व्यवस्था की शुरुआत थी जो नरसिम्हा राव ने शुरू किये थे जो नेहरु परिवार से इतर कांग्रेसी प्रधान मंत्री थे.उनकी असफलता की स्थिति में ठीकरा मनमोहन सिंह के सर फोड़ा जा सके इसलिए इन्हें मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधार के रूप में प्रचारित किया गया.इन सुधारों या नेहरूवादी नीतियों से छुटकारे के सुझाव जनसंघ द्वारा पहले से ही दिए जाते रहे थे और १९६९-७० में संसद में डॉ सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा लिखित वैकल्पिक योजना संसद में प्रस्तुत की थी जिसे उस समय प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने अमान्य कर दिया था. जहाँ तक खाद्य सुरक्षा बिल का सवाल है इस बारे में मध्य प्रदेश में शिवराज चोहान की योजना अधिक बेहतर है.बढ़ते घाटे के दौर में खाद्य सुरक्षा के लिए सब्सिडी से घटा और बढेगा.जिसकी पूर्ती के लिए अन्य क्षेत्रों में भार बढाकर लोगों पर और बोझ दाल जायेगा.इसके अलावा इस योजना के लिए भरी धन व्यवस्था के लिए बजट में कोई आबंटन नहीं है जिससे इसकी सफलता संदिग्ध है.प्रधान मंत्री ने भ्रष्टाचार पर एक शब्द नहीं बोल है.जिसका जिक्र राष्ट्रपति ने अपने उद्बोधन में किया है.शायद भ्रष्टाचार पी एम् के लिए शिष्टाचार है.सेना के लिए भी एक भी शब्द नहीं कहा है.जबकि सैनिकों के सर काटे जा रहे हैं और घात लगाकर उनकी हत्याएं की जा रही हैं.ये प्रधान मंत्री की सैनिकों के प्रति उपेक्षा को दिखाता है.कुल मिलकर प्रधान मंत्री का भाषण बेहद निराशाजनक था.

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