प्रभुदयाल श्रीवास्तव

हार्न‌ बजाकर बस का आना,
सुबह सुबह से ही रोज़ाना।

चौराहों पर सजे सजाये,
सारे बच्चे आँख गड़ाये,
नज़र सड़क पर टिकी हुई है.,
किसी तरह से बस आ जाये।
जब आई तो मिला खज़ाना।
सुबह सुबह से ही रोज़ाना।

सुबह सुबह सूरज आ जाता,
छत आँगन से चोंच लड़ाता,
कहे पवन से नाचो गाओ,
मंदिर में घंटा बजवाता।
कभी न छोड़े हुक्म बज़ाना।
सुबह सुबह से ही रोज़ाना।

सुबह सुबह आ जाता ग्वाला,
दूध नापता पानी वाला,
मम्मी पापा पूछा करते,
रास्ते में मिलता क्या नाला?
न ,न करके सिर मटकाना।
सुबह सुबह से ही रोज़ाना।

सात बजे दादा उठ जाते,
“भेजो चाय”यही चिल्लाते,
कभी समय पर नहीं मिली तो,
सारे घर को नाच नचाते।
बहुत कठिन है उन्हें मनाना।
सुबह सुबह से ही रोज़ाना।

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